US में कोरोना, HIV, इबोला से भरी 'सीक्रेट लैब' के मालिक को चीन से मिला पैसा: रिपोर्ट
अमेरिकी संसद की सिलेक्ट कमेटी की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें दावा किया गया है कि इस लैब के मालिक को चीन से 13 लाख अमेरिकी डॉलर (11 करोड़ 83 लाख रुपये) से भी ज्यादा का पेमेंट हुआ है. रिपोर्ट के बाद से अमेरिकी सांसद इस मसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बता रहे हैं.

साल 2023 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक सीक्रेट लैब का पता चला था. इस लैब में COVID-19, HIV, मलेरिया और सार्स समेत कई रोगाणुओं के स्टॉक मिले थे. लैब के अंदर हजारों चूहे भी मौजूद थे. इस लैब का कनेक्शन कथित तौर पर चीन से जुड़ा था. अब अमेरिकी संसद की सिलेक्ट कमेटी की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें दावा किया गया है कि इस लैब के मालिक को चीन से 13 लाख अमेरिकी डॉलर (11 करोड़ 83 लाख रुपये) से भी ज्यादा का पेमेंट हुआ है. रिपोर्ट के बाद से अमेरिकी सांसद इस मसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बता रहे हैं.
लॉस एंजिल्स टाइम्स के हवाले से इंडिया टुडे ने बताया कि साल 2023 में एनफोर्समेंट ऑफिसर जेसालिन हार्पर ने एक वेयरहाउस की बगल से निकली हुई नाली देखी. यह वेयरहाउस दशकों से बंद पड़ा था. इसलिए किसी का भी ध्यान इस पर नहीं गया. हार्पर को वहां अजीब सी बदबू आ रही थी. इसलिए उन्हें कुछ गड़बड़ी का शक हुआ. वह बिल्डिंग के अंदर गईं. दरवाजा खटखटाने पर लैब कोट में एक महिला बाहर आई. वहां कुछ और लोग भी थे. वो लोग भी लैब कोट में थे. उन्होंने प्लास्टिक के ग्लव्स और सर्जिकल मास्क भी लगा रखा था. वे शिपिंग के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की पैकिंग कर रहे थे.
लैब में हार्पर को दर्जनों रेफ्रीजिरेटर और अल्ट्रा लो टेंपरेचर फ्रीजर दिखाई दिए. बिजली के लिए अवैध तरीके से वायरिंग की गई थी. इनके अलावा लैब में यूरिन की शीशियां और प्लास्टिक के कंटेनर रखे थे. लैब में कथित तौर पर 1 हजार के करीब चूहे भी मौजूद थे. जेसालिन हार्पर ने FBI और फ्रेस्नो काउंटी के स्वास्थ्य अधिकारियों को घटना की जानकारी दी. स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच में कई परेशान करने वाली बातें सामने आईं. स्वास्थ्य विभाग के डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, गोदाम में डेंगू, हेपेटाइटिस बी और सी, इबोला और सार्स कोरोनावायरस समेत करीब 20 से ज्यादा संक्रामक रोगाणु मौजूद थे.
बताया गया कि इस लैब का मालिक चीन में रहता है. उसका नाम जिया बेई झू है. झू पर गलत लेबल वाले मेडिकल इक्विपमेंट बनाने, ड्रिस्ट्रीब्यूट करने और रेगुलेटरी संस्थाओं के सामने झूठ बोलने का आरोप लगा. बाद में उन पर चीन से पैसे के लेनदेन के लिए 'वायर फ्रॉड' और साजिश रचने का आरोप भी लगाया गया.
जांच अधिकारियों का आरोप है कि झू और उनकी सहयोगी वांग ने चीन से लाखों कोविड किट आयात किए और उनको अमेरिकी बताकर गलत तरीके से बेचा. आरोप है कि इन किटों को प्रेग्नेंसी किट के नाम पर आयात किया गया था. इससे दोनों ने लगभग 17 लाख अमेरिकी डॉलर कमाए.
साल 2023 में कैलिफोर्निया के रीडली में गोदाम की तलाशी के कुछ दिन बाद ही वांग अपने नवजात बच्चे के साथ अमेरिका छोड़कर चीन चली गईं. तब से वह वापस नहीं लौटी हैं. बाद में उन पर घोटाले के आरोप लगाए गए. लेकिन उन्होंने अभी तक अपना पक्ष नहीं रखा है. हालांकि उनकी लीगल टीम ने इन आरोपों से इनकार किया है.
और अब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर अमेरिकी संसद की एक सिलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट आई है. इस रिपोर्ट में बताया गया कि झू को चीनी बैंकों से 13 लाख अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का पेमेंट हुआ है. लेकिन इस पेमेंट का डिटेल सामने नहीं आया है. यानी किस मद में पेमेंट हुआ. सिलेक्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है,
रीडली बायोलैब जैसी लैब हमारे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं. इस तरह के लैब अगर चलते रहे तो भविष्य में इनका फायदा उठाया जा सकता है.
इस साल की शुरुआत में जांच अधिकारियों ने झू के लास वेगास स्थित एक घर पर छापा मारा. यहां से उनको लैब इक्विपमेंट और 1000 हजार से ज्यादा अज्ञात पदार्थों के सैंपल बरामद हुए. अमेरिकी जांच एजेंसियों ने एक इजरायली नागरिक ओरी सोलोमन को हथियार और खतरनाक पदार्थों के कथित दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से मिले पदार्थ रीडली में मिले पदार्थों से मिलते जुलते पाए गए है. हालांकि अभी इनके नेचर की टेस्टिंग चल रही है.
हालांकि लैब के मालिक झू ने कोर्ट में किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. उन्होंने बताया कि गोदाम का इस्तेमाल केवल स्टोरेज के लिए किया जा रहा था. उनकी टीम ने बताया कि उन पर बायो टेरर के आरोप निराधार हैं. रीडली के अधिकारियों ने बताया कि लैब से सभी सामग्रियों को हटा दिया गया था. लेकिन अब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिला है कि उन्हों स्टोर क्यों किया गया था. और उनका उपयोग किस काम में किया गया. और क्या इस तरह के और भी लैब चलाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसके पीछे एक इंटरनेशनल लेवल पर फैला हुआ नेटवर्क भी हो सकता है.
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