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होर्मुज बंद होने से पहले भर लिया महीनों का तेल, भारत के इस पड़ोसी को पता था जंग होगी?

चीन ने अधिकतर बैरल तब खरीदे थे, जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ी ही ज्यादा थी. अब जब कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, तो उस समय की गई खरीद से बीजिंग को दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा फायदे में है.

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26 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 01:32 PM IST)
china knew about potential attack of us on iran moths back stockpiled its oil and gas
चीन ने पहले ही इस संभावित जंग का अंदाजा लगा लिया था (PHOTO-X)
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ईरान-अमेरिका में चल रही जंग का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है. कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इस बीच ईरान ने भारत समेत 5 देशों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की अनुमति दे दी है. लेकिन एक तरफ जहां वैश्विक बाजार तेल की कीमतों में संभावित उछाल के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं, वहीं चीन से एक शांत और ज्यादा सोची-समझी कहानी सामने आ रही है. ऐसा लग रहा है कि चीन ने पहले से खतरे को भांप लिया था. चीन पिछले कई महीनों से ऐसी स्थिति को संभालने के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार कर रहा था. यानी किल्लत होने से पहले ही चीन अधिक-से-अधिक तेल-गैस को स्टोर कर रहा था.

2025 की शुरुआत के कस्टम और शिपिंग डेटा से पता चलता है कि चीन अपनी घरेलू मांग से कहीं ज्यादा कच्चा तेल आयात कर रहा था. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी-फरवरी 2026 में ही चीन ने रोजाना लगभग 1.24 मिलियन बैरल का एक्सट्रा स्टॉक जमा कर लिया. यह इस बात का संकेत है कि चीन ने तेल को जमा करने का फैसला कई महीने पहले कर लिया था. चीन ने तेल खरीदा, ये तो समझ आता है. लेकिन कहां से खरीदा, ये भी जानना जरूरी है. इस तेल का अधिकतर हिस्सा उन देशों से आया, जो राजनीतिक रूप से काफी सेंसिटिव हैं. चीन ने रूस, ईरान और वेनेजुएला से तेल की खरीद बढ़ा दी. ये ऐसे देश हैं जिन पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं. इसलिए चीन को यहां से बहुत कम कीमत पर तेल मिलता है.  

इनमें से अधिकतर बैरल तब खरीदे गए थे, जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ी ही ज्यादा थी. अब जब कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, तो चीन को महंगा तेल-गैस बड़ी मात्रा में नहीं लेना पड़ रहा है.

उधर, वेस्ट एशिया की जंग का असर अब अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा हैै. Macquarie, Kotak Securities और Nuvama Institutional Equities जैसी कई ब्रोकरेज फर्मों का मानना ​​है कि अगर सप्लाई में रुकावटें बनी रहीं, तो तेल की कीमत 120 से 150 डॉलर तक भी पहुंच सकती है.

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