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जिनपिंग से दोस्ती, पर शक भी! रूसी दस्तावेज़ों में चीन 'राष्ट्रीय सुरक्षा का दुश्मन'

Leaked Documents की मानें तो Putin सार्वजनिक तौर पर Xi Jinping के जितना करीब दिखते हैं, असल में उतने है नहीं. Lubyanka स्थित FSB हेडक्वार्टर से लीक डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक China को Russia की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है.

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9 जून 2025 (पब्लिश्ड: 10:42 AM IST)
china is the enemy says russian intelligence kremlin leaked report
पुतिन और जिनपिंग सार्वजनिक तोर पर काफी करीब जान पड़ते हैं (PHOTO-AP)
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पब्लिक में दोस्ताना बयानबाजी और गर्मजोशी, पुतिन और जिनपिंग (Putin Jinping Friendship) की दोस्ती के बावजूद, रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) के एक सीक्रेट डॉक्यूमेंट में चीन के प्रति गहरा शक जाहिर किया गया है. सीक्रेट डॉक्यूमेंट में चीन को रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया गया है. इतना ही नहीं, चीन को रूस की ‘राष्ट्रीय सुरक्षा का दुश्मन’ तक बताया गया है. 

न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक टेलीग्राम पर, साइबर अपराधी दुनिया भर से चुराए गए सरकारी दस्तावेजों को बेच रहे हैं. हर सीक्रेट उपलब्ध है. सिर्फ कीमत सही लगाइए. जैसे इंडोनेशिया से 5 हजार डॉलर में खुफिया ब्रीफिंग, ताइवान से 10 हजार डॉलर में राजनयिक केबल्स और सिर्फ 3 डॉलर में ईरानी जासूसों की पहचान उपलब्ध है. बस पैसे दीजिए, सारी जानकारी आपके हाथ में. टेलीग्राम पर मौजूद इन चैनलों को कोई भी ब्राउज कर सकता है. नवंबर 2024 में, Ares Leaks नाम के एक क्रिमिनल ग्रुप ने टेलीग्राम पर घोषणा की कि वह क्लासीफाइड यानी खुफिया रूसी दस्तावेज बेच रहे हैं. ग्रुप ने दावा किया कि उसके पास ये डॉक्यूमेंट्स रूसी एजेंसी FSB से आए थे.

चीन की चाल

न्यू यॉर्क टाइम्स में छपे इन लीक्ड डॉक्यूमेंट्स की मानें तो पुतिन सार्वजनिक तौर पर जिनपिंग के जितना करीब दिखते हैं, असल में बात उतनी सीधी है नहीं. कम से कम लुबयांका (Lubyanka) स्थित FSB का हेडक्वार्टर तो ऐसा नहीं सोचता. यही वजह है कि उसके दस्तावेजों में चीन को ‘दुश्मन’ बताया गया है. FSB की एक यूनिट ने चेतावनी दी है कि चीन, रूसी सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है. इसके अधिकारियों का कहना है कि बीजिंग तेजी से रूसी जासूसों की भर्ती करने और संवेदनशील सैन्य तकनीक के बारे में जानकारियां हासिल करने की कोशिश कर रहा है. 

इसके लिए वो कई तरीके अपना रहे हैं. मसलन वो सरकार से नाखुश रूसी वैज्ञानिकों को लुभाने की कोशिश कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि चीन वेस्टर्न हथियारों और युद्ध के बारे में जानने के लिए यूक्रेन में रूसी सेना के अभियानों पर जासूसी कर रहा है. उन्हें डर है कि चीनी शिक्षाविद रूसी क्षेत्र पर दावा करने के लिए एक तरह का बौद्धिक आधार तैयार कर रहे हैं. अपनी रिपोर्ट में उन्होंने चेतावनी दी है कि चीनी खुफिया एजेंट माइनिंग से जुड़ी फर्मों और यूनिवर्सिटीज़ से जुड़े सेंटर्स का उपयोग करके आर्कटिक में भी जासूसी कर रहे हैं.

न्यू यॉर्क टाइम्स को मिले 8 पन्नों की रिपोर्ट में में चीनी जासूसी को रोकने के लिए कदम उठाने की बात की गई है. रिपोर्ट पर कोई तारीख नहीं है. लेकिन उसके कॉन्टेक्स्ट से ऐसा जान पड़ता है कि इसे 2023 के अंत या 2024 की शुरुआत में लिखा गया होगा. साइबर क्राइम ग्रुप Ares Leaks ने ये दस्तावेज प्राप्त किए हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि उसने ऐसा कैसे किया. लेकिन NYT ने रिपोर्ट को छह पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के साथ साझा किया था, जिनमें से सभी ने इसे सही माना है. यह दस्तावेज चीन के बारे में रूसी खुफिया एजेंसी की सोच को दर्शाता है. 

न्यू यॉर्क टाइम्स ने कहा है कि इस मामले पर उसने रूस और चीन का पक्ष जानने की भी कोशिश की. पुतिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया. दूसरी तरफ चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इसपर कोई कॉमेंट नहीं किया.

(यह भी पढ़ें: ट्रंप ने किया पुतिन के साथ खेल: US की खुफिया मदद से यूक्रेन ने लिखी ऑपरेशन स्पाइडवेब की स्क्रिप्ट!)

वीडियो: दुनियादारी: डॉनल्ड ट्रंप और एलन मस्क क्यों भिड़े?

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