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'दारू दर्द दूर करे, मजबूत करे,' आबकारी मंत्री ने ऐसी बातें कहीं हर शराबी गले लगा लेगा

शराबबंदी पर इन आबकारी मंत्री का बयान सुन बिहार के सीएम नीतीश कुमार बुरा ना मान जाएं.

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10 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 10 अप्रैल 2023, 11:37 PM IST)
Chhattisgarh Cabinet Minister Kawasi Lakhma on consumption of liquor
शराबबंदी पर छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री कवासी लखमा का बयान वायरल. (फाइल फोटो: @Kawasilakhma)
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सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री कवासी लखमा का एक बयान वायरल है. कवासी लखमा राज्य के आबकारी मंत्री हैं. उनका बयान भी शराब और शराबबंदी पर ही है. बयान भी ऐसा जिसे सुनकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार बुरा ना मान जाएं. कवासी लखमा ने कहा है कि उनके जीते जी बस्तर में शराबबंदी नहीं होगी. मंत्री का कहना है कि शराब मेहनत का काम करने वालों की जरूरत है. उनके मुताबिक आदमी दारू पीने से नहीं, बल्कि ज्यादा दारू पीने से मरता है.

कवासी लखमा ने ये भी कहा कि लोग शराब पीने का स्टाइल नहीं जानते. उनके इस बयान पर BJP के एक विधायक ने लखमा पर निशाना साधा. विधायक ने कहा कि मंत्री बताएं कि सार्वजनिक रूप से शराब कैसे पीनी चाहिए.

'दारू पीने का स्टाइल नहीं जानते लोग'

बस्तर में मीडिया से बात करते हुए कवासी लखमा ने कहा,

“विदेश में 100 परसेंट लोग दारू पीते हैं. बस्तर में 90 पर्सेंट लोग पीते हैं. लेकिन पीने का स्टाइल नहीं जान रहे. दारू पीने से आदमी नहीं मरता है, पीने से मजबूत होता है, लेकिन ज्यादा (शराब) पीने से आदमी की जान लेता है.”

लखमा ने कहा कि खेती करने वाले, भारी भरकम सामान उठाने वाले मजदूर काम करने के लिए दारू पीते हैं. उन्होंने कहा कि मेहनतकश लोग दारू नहीं पीएंगे तो उनका काम नहीं हो पाएगा. मंत्री का कहना है,

“उद्योगों, फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को दारू की जरूरत होती है क्योंकि दारू दर्द खत्म करती है.” 

'बस्तर में शराबबंदी के नियम अलग होंगे'

न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक कवासी लखमा ने शराब को आदिवासी लोगों की जरूरत बताया. उन्होंने ये भी कहा कि कम मात्रा में शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक लखमा ने इससे पहले कहा था कि आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में शराबबंदी के नियम पूरे राज्य से अलग होंगे और इस संबंध में फैसला वहां की पंचायत करेगी.

उन्होंने कहा था,

"बस्तर के लोग और उनकी पूजा का तरीका अलग है. पूजा के दौरान कई रस्में बिना शराब के नहीं की जाती हैं. इसलिए बस्तर में शराबबंदी को लेकर नियम अलग होंगे और वहां शराबबंदी का सवाल ही नहीं उठता. क्षेत्र की आबादी आदिवासी बहुल है और वहां की पंचायत इस संबंध में निर्णय लेगी."

BJP विधायक ने कसा तंज

कवासी लखमा के बयान पर कुरूद से BJP विधायक अजय चंद्राकर ने तंज कसा है. उन्होंने ट्वीट किया,

“छत्तीसगढ़ (कांग्रेस शोषित) के माननीय मंत्री श्री @Kawasilakhma को छत्तीसगढ़ में घूम-घूम कर सार्वजनिक रूप से पी-पी कर बताना चाहिए कि शराब कैसे और कितनी पीनी चाहिए...उन्होंने छत्तीसगढ़ के श्रमवीरों को भी शराबी बता दिया. माननीय मंत्रियों का बयान स्तरहीन हो चुका है.”

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी के मुद्दे पर विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर हमलावर है क्योंकि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में शराबबंदी की बात कही थी. विपक्ष का सवाल है कि कांग्रेस ने अपना वादा अब तक क्यों पूरा नहीं किया. वहीं हाल ही में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि बिना समाज के सहयोग के शराबबंदी संभव नहीं है. इसके लिए अभियान चलाने की जरूरत है. 

वीडियो: WHO ने शराब को लेकर क्या बड़ा खुलासा कर दिया?

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