Sorry, सोनी सोरी!
उस AAP नेता की कहानी, जिसकी वजाइना में पुलिस वालों ने कथित तौर पर कंकड़ डाल दिए थे.
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फोटो - thelallantop
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आम आदमी पार्टी की लीडर और आदिवासी एक्टिविस्ट सोनी सोरी की आंखें बंद हैं और चेहरा काला पड़ गया है. उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है. पूरी कहानी जानने के बाद शायद यह कालिख आपके चेहरे पर भी नमूदार होती लगे.
सोनी सोरी पर शनिवार शाम कुछ लोगों ने हमला कर दिया. छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा जिले में सोनी अपने घर लौट रही थीं, तभी दो लोगों ने उनके मुंह पर कुछ फेंका, जिससे उनका चेहरा और आंखें झुलस गए.
सोनी के भतीजे लिंगराम कोदोपी के मुताबिक, उन्हें पहले लगा कि ऐसिड फेंका गया है, पर असल में वो जली हुई ग्रीस थी. सोनी को फौरन हॉस्पिटल ले जाया गया. अब उन्हें इलाज के लिए दिल्ली शिफ्ट किया गया है.
अस्पताल में भर्ती सोनी कह रही हैं कि वो कुछ देख नहीं पा रही हैं. लेकिन पुलिस भी कुछ नहीं देख पा रही है. पुलिस IG कल्लूरी का कहना है कि सोनी सोरी पर कोई हमला हुआ ही नहीं. उनका कहना है, 'घटना के लिए गलत शब्दों क इस्तेमाल हो रहा है. यहां सब झूठ बोल रहे हैं.'
दरअसल सोनी सोरी की बस्तर पुलिस से पुरानी अदावत है. इसका बैकग्राउंड जानने के लिए आपको सोनी के बारे में जानना होगा.
कहानी शुरू होती है मई 2010 से. जब अपने पति और भतीजे के साथ मिलकर उन पर कॉन्ग्रेस नेता अवदेश गौतम पर हमला करने का आरोप लगा. हमले में अवदेश को कुछ नहीं हुआ, पर उनके बेटे को चोट आ गई, ऐसा कहा गया. उसी साल अगस्त में दांतेवाड़ा जिले में नक्सलवादियों ने '15 अगस्त' का बॉयकॉट करते हुए 6 ट्रक फूंक दिए. कहा गया कि फसाद कर भागने वाले इन 60 नक्सलियों में सोनी भी शामिल थीं. कुअकोंदा पुलिस स्टेशन में दंगा करने के लिए सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया था. सोनी को तीन साल बाद जमानत पर छोड़ा गया.
उसके बाद सामने आया एसार विवाद. छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया कि लोहा और स्टील बनाने वाली कंपनी एसार ने माओवादियों को एरिया में उपद्रव रोकने के लिए पैसे दिए थे. छत्तीसगढ़ पुलिस के मुताबिक सोनी सोरी ने एसार कंपनी से शांत रहने के लिए 15 लाख रुपये लिए थे. 2011 में सोनी ने एसार केस में गलत तरीके से फंसाए जाने के लिए भूख हड़ताल शुरू की.
कौन है सोनी सोरी?
पॉलिटिक्स के मैदान में उतरने के पहले सोनी स्कूल टीचर हुआ करती थी. माओवादियों से रिश्ते होने का आरोप लगा था. बस्तर पुलिस से लगातार इनकी तनातनी चलती रही है.
कहानी शुरू होती है मई 2010 से. जब अपने पति और भतीजे के साथ मिलकर उन पर कॉन्ग्रेस नेता अवदेश गौतम पर हमला करने का आरोप लगा. हमले में अवदेश को कुछ नहीं हुआ, पर उनके बेटे को चोट आ गई, ऐसा कहा गया. उसी साल अगस्त में दांतेवाड़ा जिले में नक्सलवादियों ने '15 अगस्त' का बॉयकॉट करते हुए 6 ट्रक फूंक दिए. कहा गया कि फसाद कर भागने वाले इन 60 नक्सलियों में सोनी भी शामिल थीं. कुअकोंदा पुलिस स्टेशन में दंगा करने के लिए सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया था. सोनी को तीन साल बाद जमानत पर छोड़ा गया.
उसके बाद सामने आया एसार विवाद. छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया कि लोहा और स्टील बनाने वाली कंपनी एसार ने माओवादियों को एरिया में उपद्रव रोकने के लिए पैसे दिए थे. छत्तीसगढ़ पुलिस के मुताबिक सोनी सोरी ने एसार कंपनी से शांत रहने के लिए 15 लाख रुपये लिए थे. 2011 में सोनी ने एसार केस में गलत तरीके से फंसाए जाने के लिए भूख हड़ताल शुरू की.
जेल में हुआ था भयानक रेप
2010 से 2013 के बीच कैद के दौरान सोनी को दिल्ली से दांतेवाड़ा शिफ्ट किया गया. उन्होंने कहा कि वह दंतेवाड़ा की जेल में नहीं रहना चाहती हैं, क्योंकि वहां उन्हें सुरक्षा का खतरा है. फिर भी उन्हें शिफ्ट कर दिया. आरोप है कि दंतेवाड़ा में पूछताछ के बहाने जेल में सोनी का रेप किया गया. सोनी ने अपने बयान में कहा कि उनके कपड़े फाड़ कर उन्हें इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया. ये सब वहां के एसपी अंकित गर्ग के आदेश पर हुआ. सोनी ने ये भी बताया जब उनके कपड़े फाड़े जा रहे थे, एसपी अंकित गर्ग अपनी कुर्सी पर बैठे उन्हें घूर रहे थे, उन्हें भद्दी गालियां दे रहे थे, अश्लील बातें कर रहे थे. फिर तीन मर्दों ने मिल कर सोनी से सेक्शुअल असॉल्ट किया और उनकी वजाइना में कंकड़ ठूस दिए. सोनी को अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में सोनी की हालत इतनी बिगड़ गई थी कि लगा उनकी जान नहीं बच पाएगी.
आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ा, हारीं
सोनी 2014 में जमानत पर बाहर आ गईं. तब तक वह अपने इलाके में मशहूर हो गई थीं और कुछ एनजीओ ने उनका नाम दिल्ली तक भी पहुंचा दिया था. आम आदमी पार्टी भारी उम्मीदों के साथ पूरे देश में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रही थी. सोनी भी आदिवासियों के हित के लिए लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती थी. पर क्रिमिनल रिकॉर्ड होने की वजह से AAP ने बहुत दिनों तक उनको टिकट देने से बचती रही. लेकिन आम आदमी पार्टी की छठी लिस्ट में सोनी को बस्तर से कैंडिडेट घोषित किया गया. लेकिन बीजेपी के दिनेश कश्यप से चुनाव हार गईं.

