दीपिका की फिल्म 'छपाक' से आई इस पहली तस्वीर में बेहद खास क्या है?
दीपिका की हिम्मत की दाद देनी होगी. उनसे भी ज्यादा उनकी हिम्मत सराही जानी चाहिए, जिन पर ये फिल्म है.
Advertisement

ये दीपिका पादुकोण हैं. मेघना गुलजार की फिल्म 'छपाक' में उनका ये लुक है. फिल्म 2020 में आएगी, अभी इसका फर्स्ट लुक जारी हुआ है. इस फिल्म में दीपिका एसिड अटैक सर्वाइवर बनी हैं (फोटो: ट्विटर)
Quick AI Highlights
Click here to view more
छपाक. ये मेघना गुलजार की अगली फिल्म का नाम है. इसमें दीपिका पादुकोण हैं. फिल्म में दीपिका कैसी दिखेंगी? आप पूछेंगे, उनके लुक में क्या खास है कि आपको ये खबर बताई जाए. हम कहेंगे, बेहद खास है. इसमें दीपिका दीपिका जैसी नहीं दिखेंगी.
इस थीम पर शायद पहली फिल्म बनी है ये चेहरे पर तेज़ाब फेंक दे कोई, तो क्या होता है? क्या बस चेहरा झुलसता है? क्या बस चेहरे की खूबसूरती खत्म हो जाती है? या सर्वाइवर की पूरी ज़िंदगी बदल जाती है? क्या इसके बाद उसकी ज़िंदगी कभी नॉर्मल नहीं हो पाती? क्या डिस्फिगर हो चुके चेहरे से हौसला इतना टूट जाता है कि जीना भारी लगने लगता है? अब तक किसी फिल्म ने हमें ऐसी कोई कहानी, ऐसा कोई करेक्टर नहीं दिखाया शायद. मगर ये जो छपाक आ रही है, वो इसी थीम पर बनी है. इसमें दीपिका पादुकोण एसिड अटैक सर्वाइवर बनी हैं. नाम है- मालती. इस फिल्म का पहला लुक आया है. मालती का किरदार असल ज़िंदगी में एसिड अटैक का शिकार हुई लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी सुनाएगा.
लक्ष्मी 16 साल की थीं, जब उनके तेज़ाब फेंककर उनका चेहरा झुलसा दिया गया. बस इसलिए कि उन्होंने किसी के शादी के प्रपोजल को ठुकरा दिया था.

ये 2018 के विमिन्स डे की फोटो है. ठाणे में हुए एक फैशन-शो की. इसमें एसिड अटैक सर्वाइवर्स ने शिरकत की थी. हरी साड़ी में जो दिख रही हैं, वो हैं लक्ष्मी (फोटो: रॉयटर्स)
अधिकतर मामलों में शिकार महिलाएं/लड़कियां होती हैं 2017 में छपी USA Today की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल 250 से 300 एसिड अटैक होते हैं. ज्यादातर में शिकार लड़कियां और महिलाएं होती हैं. 2016 में 300 ऐसी घटनाएं रिपोर्ट हुई थीं. आशंका है कि कई ऐसे मामले भी होंगे जो कभी रिपोर्ट नहीं हुए. एसिड सर्वाइवर्स ट्रस्ट इंटरनैशनल के मुताबिक, भारत में ऐसी घटनाओं की सालाना संख्या 1,000 से ज्यादा हो सकती है. 2016 में राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसैबिलिटिज़ ऐक्ट में संशोधन करके एसिड अटैक सर्वाइवर्स को भी विकलांगों की श्रेणी में रखने का नियम बनाया गया. ताकि उन्हें मुआवजा मिल सके. उनके लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का भी सिस्टम बना.
बस टॉइलेट नहीं साफ करता है तेज़ाब, ज़िस्म का मांस भी गला देता है 2013 से पहले सीधे-सीधे इस अपराध की कोई सज़ा नहीं थी. उसके बाद इस पर काम हुआ. अब इस क्राइम की सज़ा 10 साल कैद तक हो सकती है. मगर इसमें अभी और सुधार होने हैं. जितना काम हुआ है, वो नाकाफ़ी है. इस तरह के अपराध रेगुलर हो रहे हैं. तेज़ाब खुले में बिकना जारी है. तेज़ाब खरीदने वाला अपना टॉइलेट साफ करेगा कि किसी के चेहरे पर फेंकेगा, आप कैसे बता सकते हैं.
आखिर में- दीपिका को बहुत सारा प्यार. इस लुक को कैरी करना. ये किरदार करना. इसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए थी. हमारे यहां सुंदरता की परिभाषा बहुत छिछली और स्वार्थी है. खासकर फिल्मों में. उससे आगे बढ़कर ये करेक्टर निभाना, ऐसे सर्वाइवर्स की कहानी सुनाना, ये वाकई बहुत खूबसूरत है. तस्वीर में उनके आंखों की जो चमक है, वो काश हर सर्वाइवर की आंखों में उतरे. सब उठें, लड़ें, जीयें. खुश रहें. कोई विक्टिम न बने.
तमिलनाडु: फर्ज़ी फेसबुक आईडी से 50 लड़कियों को मोलेस्ट किया गया
इस थीम पर शायद पहली फिल्म बनी है ये चेहरे पर तेज़ाब फेंक दे कोई, तो क्या होता है? क्या बस चेहरा झुलसता है? क्या बस चेहरे की खूबसूरती खत्म हो जाती है? या सर्वाइवर की पूरी ज़िंदगी बदल जाती है? क्या इसके बाद उसकी ज़िंदगी कभी नॉर्मल नहीं हो पाती? क्या डिस्फिगर हो चुके चेहरे से हौसला इतना टूट जाता है कि जीना भारी लगने लगता है? अब तक किसी फिल्म ने हमें ऐसी कोई कहानी, ऐसा कोई करेक्टर नहीं दिखाया शायद. मगर ये जो छपाक आ रही है, वो इसी थीम पर बनी है. इसमें दीपिका पादुकोण एसिड अटैक सर्वाइवर बनी हैं. नाम है- मालती. इस फिल्म का पहला लुक आया है. मालती का किरदार असल ज़िंदगी में एसिड अटैक का शिकार हुई लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी सुनाएगा.
लक्ष्मी 16 साल की थीं, जब उनके तेज़ाब फेंककर उनका चेहरा झुलसा दिया गया. बस इसलिए कि उन्होंने किसी के शादी के प्रपोजल को ठुकरा दिया था.
आप दीपिका को पहचान नहीं सकेंगे अगर आपको कोई न बताए कि ये दीपिका हैं, तो आप उन्हें पहचान नहीं सकेंगे. इस लुक में बस एक फ्रेम है. दीपिका एक ओर से झांक रही हैं. शीशे में उनकी परछाईं दिख रही है. चेहरे पर झुर्रियां हैं. वैसा ही फेस, जैसा एसिड अटैक के बाद हो जाता है. मगर आंखें चमक रही हैं. होंठ मुस्कुरा रहे हैं. वो मुस्कुराहट प्यारी है. इस तस्वीर में एक मेसेज है. कि चाहे हालात कितने भी खराब क्यों न हो, कुछ लोग अपना हौसला बनाए रखते हैं. उनके अंदर ज़िंदगी से मुहब्बत बनी रहती है.First look of @deepikapadukone
— Anushka Arora (@Anushka_Arora) March 24, 2019
as #Malti
in #Chhapaak
- INCREDIBLE! This movie celebrates the undying human spirit that doesn’t give up despite adversities at every step. Scheduled to release on January 10, 2020. Goosebumps! @meghnagulzar
@leenayadav
@foxstarhindi
pic.twitter.com/Dnn3DHhKat
ज़्यादातर एसिड अटैक्स के पीछे एक सी कहानी होती है छपाक 10 जनवरी, 2020 को रिलीज होगी. जिन लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी पर ये फिल्म बेस्ड बताई जा रही है, वो ऐक्टिविस्ट हैं. जो उनपर बीती, वैसी जिन-जिन पर बीती उनके हक़ के लिए काम करती हैं. 2005 में जिसने लक्ष्मी पर हमला किया, वो महीनों से उनका पीछा करता था. शादी करना चाहता था लक्ष्मी से. इनकार मिलने पर उसने तेज़ाब फेंककर अपना बदला लिया. ज्य़ादातर एसिड अटैक्स के पीछे ऐसी ही कहानियां होती हैं. तेज़ाब फेंकने वाला सोचता है कि वो सामने वाली की पहचान खत्म कर रहा है. उसका चेहरा झुलसाकर उसका वज़ूद मिटा रहा है. हमले का शिकार हुआ इंसान शीशे में अपना चेहरा देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाता. उसका आत्मविश्वास मर जाता है जैसे. उन्हें आस-पास के लोगों से बर्ताव भी ऐसा मिलता है. उसमें दया होती है, नाउम्मीदी होती है. ऐसे में लक्ष्मी और उन जैसी सर्वाइवर्स की कहानी सुनाई जानी चाहिए. कि कैसे उन्होंने खुद को संभाला. आगे बढ़ीं. अपने लिए लड़ने के साथ-साथ औरों के लिए भी खड़ी हुईं. और अपने अटैकर के मंसूबों पर पानी फेरते हुए खुशहाल ज़िंदगी बिताती हैं.She is courage. She is hope. She is @deepikapadukone
— Meghna Gulzar (@meghnagulzar) March 25, 2019
as #Malti
in #Chhapaak
. Shoot begins today. Releasing on 10th January, 2020.@masseysahib
@foxstarhindi
pic.twitter.com/WszEOoL3L7

ये 2018 के विमिन्स डे की फोटो है. ठाणे में हुए एक फैशन-शो की. इसमें एसिड अटैक सर्वाइवर्स ने शिरकत की थी. हरी साड़ी में जो दिख रही हैं, वो हैं लक्ष्मी (फोटो: रॉयटर्स)
अधिकतर मामलों में शिकार महिलाएं/लड़कियां होती हैं 2017 में छपी USA Today की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल 250 से 300 एसिड अटैक होते हैं. ज्यादातर में शिकार लड़कियां और महिलाएं होती हैं. 2016 में 300 ऐसी घटनाएं रिपोर्ट हुई थीं. आशंका है कि कई ऐसे मामले भी होंगे जो कभी रिपोर्ट नहीं हुए. एसिड सर्वाइवर्स ट्रस्ट इंटरनैशनल के मुताबिक, भारत में ऐसी घटनाओं की सालाना संख्या 1,000 से ज्यादा हो सकती है. 2016 में राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसैबिलिटिज़ ऐक्ट में संशोधन करके एसिड अटैक सर्वाइवर्स को भी विकलांगों की श्रेणी में रखने का नियम बनाया गया. ताकि उन्हें मुआवजा मिल सके. उनके लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का भी सिस्टम बना.
बस टॉइलेट नहीं साफ करता है तेज़ाब, ज़िस्म का मांस भी गला देता है 2013 से पहले सीधे-सीधे इस अपराध की कोई सज़ा नहीं थी. उसके बाद इस पर काम हुआ. अब इस क्राइम की सज़ा 10 साल कैद तक हो सकती है. मगर इसमें अभी और सुधार होने हैं. जितना काम हुआ है, वो नाकाफ़ी है. इस तरह के अपराध रेगुलर हो रहे हैं. तेज़ाब खुले में बिकना जारी है. तेज़ाब खरीदने वाला अपना टॉइलेट साफ करेगा कि किसी के चेहरे पर फेंकेगा, आप कैसे बता सकते हैं.
आखिर में- दीपिका को बहुत सारा प्यार. इस लुक को कैरी करना. ये किरदार करना. इसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए थी. हमारे यहां सुंदरता की परिभाषा बहुत छिछली और स्वार्थी है. खासकर फिल्मों में. उससे आगे बढ़कर ये करेक्टर निभाना, ऐसे सर्वाइवर्स की कहानी सुनाना, ये वाकई बहुत खूबसूरत है. तस्वीर में उनके आंखों की जो चमक है, वो काश हर सर्वाइवर की आंखों में उतरे. सब उठें, लड़ें, जीयें. खुश रहें. कोई विक्टिम न बने.
तमिलनाडु: फर्ज़ी फेसबुक आईडी से 50 लड़कियों को मोलेस्ट किया गया

