गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ धोखा हो गया. नहीं दिल्ली हाईकमान नेउन्हें सीएम पद से हटने के लिए नहीं कहा है. बात कुछ और है. दरअसल मुख्यमंत्रीभूपेंद्र पटेल गुजरात के कच्छ पहुंचे थे. एक प्रोग्राम में शामिल होने. वहां उन्हेंतौला जाना था. कमलम से. मतलब ड्रैगन फ्रूट. तो सीएम साहब को उनके वजन के बराबर कमलमकी पेटियों के साथ तौला गया. बस इसके बाद धोखा हो गया. तौल के बाद जब ड्रैगन फ़्रूटके बॉक्स खोले गए तो उसमें पाए गए केले ही केले.डिब्बे से ड्रैगन फ्रूट की जगह निकले केले.इंडिया टुडे से जुड़ीं गोपी मनियार के मुताबिक ये कार्यक्रम गुजराती नववर्ष केमौक़े पर आयोजित किया गया था. इसी में हिस्सा लेने सीएम भूपेंद्र पटेल भी पहुंचे.सीएम आए तो उनके सम्मान में कमलम ही कमलम तराजू में रख दिए गए. तराजू केदूसरे पलड़े में सीएम साहब को बिठाया गया. इस दौरान वे लोगों से मिल रहे सम्मान कोहाथ जोड़कर स्वीकारते रहे. फोटू खींचे गए. लेकिन कमलम के डिब्बों में मिले केलों नेसारा मजा खराब कर दिया. सिर्फ़ एक डिब्बा ऐसा था जिसमें ड्रैगन फ़्रूट थे.लोगों ने क्या कहा?सीएम भूपेंद्र पटेल के लिए तौले गए कमलम के डिब्बों में केले क्या निकले लोगों नेराय देना शुरू कर दिया. किसी ने मजाक उड़ाया तो किसी ने चिंता जताई. धैर्य नामके ट्विटर यूज़र ने लिखा, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सम्मान में ड्रैगन फ्रूट'कमलम' से किए गए तुला के बॉक्स में केले भरे हुए थे. हाय रे कलयुग.अंगत सूत्रों से मिल रही माहिती मुताबिक मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सम्मान केतौर पे ड्रेगन फ्रूट 'कमलम' से किए गए तुला के बॉक्स में केला भरी हुई थी। हाय रेकलयुग। pic.twitter.com/0GElbzbcnn— Dhairya Gajara (@dhairyagajara) November 10, 2021वहीं नक़ाब नाम के ट्विटर हैंडल से कहा गया,जब मुख्यमंत्री के साथ ऐसा धोखा हो सकता है तो आम आदमी का गुजरात में क्या हालहोगा? जब मुख्यमंत्री के साथ ऐसा धोखा हो सकता है तो आम आदमी का गुजरात में क्या हालहोगा? https://t.co/uEygmIbbV0— NaQab (@TheNaQab) November 11, 2021वैसे मामला सीएम की सुरक्षा से भी जुड़ा है. गोपी मनियार की रिपोर्ट के मुताबिकमुख्यमंत्री को डिब्बों के साथ तौलने से पहले किसी भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जांचनहीं की कि जिन बॉक्सेज में ड्रैगन फ्रूट होने की बात कही गई, उनमें वो है भी यानहीं.पिछले कुछ सालों से गुजरात के कच्छ और दक्षिण गुजरात के नवसारी के आसपास के इलाकोंमें किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं. कच्छ में इन दिनों बड़ी तादाद मेंड्रैगन फ्रूट की फसल पैदा होती है. देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों में भीकच्छ के ड्रैगन फ्रूट भेजे जाते हैं. क्या है कमलम फ्रूट की कहानी? इसी साल जनवरीमें ड्रैगन फ्रूट के बाहरी आकार को देखते हुए गुजरात सरकार ने इसका नाम बदलकर कमलमकर दिया था. तत्कालीन सीएम विजय रुपाणी ने कहा था, किसी फल के नाम में ड्रैगन अच्छानहीं लगा रहा है. इस फल का बाहरी आकार कमल जैसा होता है, इसलिए ड्रैगन फ्रूट का नामकमलम रखा जाएगा. हमने चीन के साथ जुड़े फल ड्रैगन फ्रूट का नाम बदल दिया है. कमलमएक संस्कृत शब्द है. इस फल का आकार भी कमल की तरह है इसलिए इसे कमलम नाम देने काफैसला किया गया है. इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है. ड्रैगन फ्रूट इम्यून सिस्टम कोबेहतर बनाता है. वजन घटाने में मदद करता है. ड्रैगन फ्रूट में आमतौर पर विटामिन ए,विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम, फाइबर और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. एकड्रैगन फ्रूट में आमतौर पर 60 कैलोरी, 2.9 ग्राम फाइबर होता है. और किसी भी तरह काहानिकारक फैट इसमें नहीं पाया जाता.अमेरिकी मूल का ये फल 19वीं शताब्दी के शुरू में दक्षिण पूर्वी एशिया में लायागया. यहां ये चीन और पड़ोसी देशों में खूब पसंद किया गया. चीन में भी इसका बड़ेपैमाने पर खेती होती है. इस फल को सलाद, जेली या फिर मुरब्बे के रूप में खाया जाताहै. एक फल का वजन औसतन 100 से 300 ग्राम तक होता है.(इस खबर को करने में हमारे साथी साजिद का भी योगदान है.)