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चंद्रयान 3 ने इतने दिनों बाद खोला राज, कैसे बना हमारा चांद इस बात का पता चल गया!

Chandrayaan 3 का रोवर पहले कभी ना एक्सप्लोर की गई चांद की सतह से जानकारी जुटा रहा था. इसमें लगे APXS यंत्र की मदद से बताया गया है कि वहां चांद की मिट्टी मुख्य रूप से दो तरह के पत्थरों से मिलकर बनी हो सकती है.

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22 अगस्त 2024 (अपडेटेड: 22 अगस्त 2024, 02:49 PM IST)
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450 करोड़ साल पहले कुछ हुआ था! (Image: PTI)
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चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) मिशन में भेजे गए रोवर ने नए सबूत पेश किए हैं. जो चांद के विकास की एक हाइपोथिसिस का समर्थन करते हैं. हाइपोथिसिस या परिकल्पना यानी ऐसा विचार जिससे कोई शुरुआती अनुमान लगाया जाता है. कहा जाता है कि चांद अपने शुरुआती दिनों में पिघली हुई चट्टानों या मैग्मा से ढका था. 

कैसे लगाया गया अनुमान? 

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, रोवर में लगे अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS) ने चांद के साउथ से मिट्टी के कंपोजिशन की जानकारी दी है. APXS एक्स-रे की मदद से बताता है कि कोई चीज कैसे से बनी हो सकती है.

रोवर पहले कभी ना एक्सप्लोर की गई चांद की सतह से जानकारी जुटा रहा था. इसमें लगे APXS यंत्र की मदद से बताया गया है कि वहां चांद की मिट्टी मुख्य रूप से दो तरह के पत्थरों से मिलकर बनी हो सकती है.

एक तो मैग्मा या पिघली हुई चट्टानें. वहीं दूसरा चांद की सतह के भीतर की चट्टानें. बताया जा रहा है कि इस जानकारी से चांद के विकास को लेकर नए साक्ष्य मिले हैं. कि शुरुआती दिनों में चांद की सतह कैसी रही होगी.
ये भी पढ़ें: आज रात नजर आएगा 'अलग तरह का चांद', पूरा साइंस हमसे समझ लीजिए!

कैसे बना था चांद?

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक, चांद के बनने को लेकर कई थ्योरी दी जाती हैं. बताया जाता है कि करीब 450 करोड़ साल पहले मंगल ग्रह के आकार का कोई पिंड या फिर कई पिंड धरती से टकराए रहे होंगे. जिससे तब नई बनी धरती से पिघली हुई चट्टानें और भाप वगैरा, छिटकर एक जगह इकट्ठा हो गई होंगी. जिसकी वजह से हमारा चांद बना होगा.

बताया जाता है शुरुआती सोलर सिस्टम बहुत ही उथल-पुथल वाली जगह रही होगी. भयंकर गर्म ग्रहों में लावा तैर रहा होगा. पिंड़ों का मलबा यहां-वहां फैला रहा होगा. वहीं ये मलबा गुरुत्वाकर्षण की वजह से एक जगह इकट्ठा होकर नए पिंडों या ग्रहों में बदल गया होगा.

फिर उथल-पुथल वाले इस सिस्टम में कोई पिंड हमारी धरती से टकराया होगा. जिसके बाद मलबा छिटकर नए चांद में बदला होगा. ऐसी थ्योरी दी जाती हैं. अब इसी थ्योरी को टेस्ट करने के लिए ही चांद की मिट्टी के सैंपल वगैरा लिए जाते हैं. ताकि सहत की चट्टानों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है.

वीडियो: चंद्रयान 3 का रोवर अचानक कांपने क्यों लगा? चांद से क्या नई जानकारी भेजी?

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