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चंद्रयान-3 ने चांद पर रिकॉर्ड किए सैकड़ों झटके, कइयों की वजह पता नहीं, फिर वैज्ञानिकों ने क्या बताया?

Chandrayaan 3 News: विक्रम लैंडर (Vikran Lander) से जुड़ा उपकरण जिसे Instrument For Lunar Seismic Activity (ILSA) कहा जाता है, उसने 24 अगस्त, 2023 से 4 सितंबर तक चांद पर 250 बार (Earthquake on Moon) झटके महसूस किए हैं.

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9 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 04:12 PM IST)
chandrayaan 3 recorded moonquakes seismic waves on moon vikram lander
चांद पर मौजूद विक्रम लैंडर (Photo- India Today/ISRO)
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भारत के चंद्रयान-3 ने लगभग एक साल बाद फिर लोगों के मन में कौतूहल शुरू कर दिया है. वजह है इतने समय बाद एक जानकारी का आना. दरअसल चंद्रयान-3 ने चांद पर कुछ उपकरण छोड़े थे. अब इन्हीं उपकरणों ने चांद पर कुछ झटके (Earthquake on Moon) दर्ज किए हैं.

द इंस्ट्रूमेंट फॉर लूनर सिस्मिक एक्टिविटी (ILSA) ने विक्रम लैंडर से निकलने के बाद 24 अगस्त से 4 सितंबर 2023 के बीच 250 बार झटके महसूस किए. इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (ISRO) ने 2023 में कहा था कि चंद्रयान 3 लैंडर पर लगे ILSA पेलोड ने रोवर और बाकी पेलोड्स की मूवमेंट को भी ट्रैक किया है.

250 झटके

इसरो के मुताबिक, ILSA द्वारा रिकॉर्ड किए गए 250 झटकों में लगभग 200 को प्रज्ञान रोवर और चंद्रयान के ही अल्फा पार्टिकल एक्स रे स्पेक्ट्रोमीटर के हो सकते हैं. लेकिन लगभग 50 झटके ऐसे थे जिनके पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है. वैज्ञानिकों का अंदाज़ा है कि ये 'चांद पर भूकंप' यानी मूनक्वेक्स (Moonquakes) हो सकते हैं. इन अज्ञात झटकों में कई सारे अलग-अलग रेंज के थे. इनकी फ्रीक्वेंसी 1 हर्ट्ज़ से 50 हर्ट्ज़ के बीच थी. कुछ झटके 94 हर्ट्ज़ की फ्रीक्वेंसी तक भी थे. वैज्ञानिक इन फ्रीक्वेंसीज़ की जांच कर रहे हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार एक संभावना ये है कि चांद की सतह पर कुछ टकराना इन झटकों का कारण हो सकता है.

वैज्ञानिकों का ये भी मानना है चांद पर तापमान का बहुत ज्यादा होना या बहुत कम होना भी इसका कारण हो सकता है. चांद पर तापमान माइनस 20 डिग्री से 60 डिग्री सेल्सियस तक जाता है. ऐसे में तापमान की वजह से चांद की सतह का फैलना या सिकुड़ना इसका कारण हो सकता है. 

चंद्रयान का ILSA उपकरण माइक्रो इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल सिस्टम्स पर काम करता है. ये आपने आप में एक अलग तरह की टेक्नोलॉजी है जो अपोलो के बाद पहली बार चांद पर इस तरह से काम कर रही है. फिलहाल ये चांद के साउथ पोल में है जिसे लूनर साउथ कहा जाता है. इसरो के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि चंद्रयान-3 के जो उपकरण चांद पर मौजूद हैं, उनके द्वारा रिकॉर्ड किए गए झटकों से चांद को समझने में और मदद मिलेगी.

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