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पर्यावरण स्पेशलिस्ट तो कह रहे कि बेकार है ऑड-ईवेन प्लान!

सुनीता नारायण दिल्ली में ही काम करने वाली पर्यावरणविद हैं. उनका कहना है कि अप्रैल में ऑड-ईवेन लाने का कोई तुक नहीं बनता.

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आशुतोष चचा
14 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 14 अप्रैल 2016, 12:30 PM IST)
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दिल्ली सरकार कमर कस लिहिस है. ऑड-ईवेन फिर से तैयार है रोड पर आने को. इसे लागू करने की एक वजह तो ट्रैफिक जाम की छुट्टी करना है. लेकिन प्रायोरिटी थी पॉल्यूशन कंट्रोल करना. ताकि हवा में घुलता जो गाड़ियों का धुआं है. वह थोड़ा कम हो जाए. अब मामला ये है कि पर्यावरण के जानकारों का सुर अलग है. वो कह रहे हैं ये वाला प्लान पर्यावरण के लिए बेकार है. ऐसे लागू करने का भी कोई तुक नहीं है.
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Source: PTI

सुनीता नारायण मशहूर पर्यावरणविद हैं. Centre for Science and Environment की डायरेक्टर जनरल हैं. दिल्ली में बहुत समय से काम कर रही हैं. अब जो अप्रैल में ऑड-ईवेन लागू हो रहा है उसको लेकर उन्होंने सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि सरकार की कोई तैयारी तो है नहीं. पॉल्यूशन या जाम कम होगा, कि गर्मी में लोग हलकान होंगे ये देखना है. ऐसे ऑड-ईवेन नहीं लागू करना चाहिए.
कहा कि अप्रैल का महीना है. हवा का दबाव एकदम दुरुस्त है. सभी गैसों का अनुपात ठीक है. हवा साफ है और पॉल्यूशन का असर न के बराबर है. ये ऑड-ईवेन इमरजेंसी स्टेप है. फिलहाल दिल्ली को इसकी जरूरत नहीं. और आपके पास लॉन्ग टर्म स्टेप्स का प्लान ही नहीं है.
ये माना कि जनवरी में इसकी जरूरत थी. लेकिन अप्रैल में. न न. सड़कों की हालत दुरुस्त करो पहले. मेट्रो और बसें बढ़ाओ. न बस लाए, न पैदल और साइकिल से चलने की जगह है आपके पास. ऐसे कैसे काम होगा भैया.
इतनी तो उनकी बात है. काम ये होगा कि ऑड-ईवेन लागू होने के पहले और बाद में हवा की जांच होगी. जिससे ये फैसला करेंगी कि पॉल्यूशन पर कुछ फर्क पड़ा कि नहीं.
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