वेश्यावृत्ति और राजनीति इस दुनिया के सबसे पुराने धंधे हैं. और दुनिया के सभीधंधों में राजनीति से घटिया धंधा कोई और नहीं. धरम, ईमान, गैरत और सलीके जैसीबेहूदा चीजें एक पोटली में बंद करके किसी नाले में विसर्जित कर दीजिए और फिर मजेलीजिए. आइए, आपको इसका उदाहरण दिखाते हैं.29 सितंबर को हुए इंडियन आर्मी के सर्जिकल स्ट्राइक का फायदा उठाने में न तो केंद्रसरकार और बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी और न कांग्रेस और 'आप' जैसे दूसरे दलों ने.देशप्रेमियों के बीच से देशद्रोहियों को छांटने और यूपी चुनाव में माइलेज लेने मेंबीजेपी उतनी ही गर्म दिखी, जितना गाय का गोबर. जवानों के खून की कीमत पर हुए इसएक्शन पर जितनी नंगई की जा सकती थी, की गई. और अब उसी सेना के कुछ 'बेहद खास'सैनिकों की पेंशन पर गोबर रख दिया गया है.केंद्र सरकार ने युद्ध में घायल होकर या ट्रेनिंग के दौरान घायल होकर रिटायर हुएविकलांग सैनिकों की पेंशन में कटौती कर दी है. रक्षा मंत्रालय की ओर से ये आदेशसर्जिकल स्ट्राइक के ठीक अगले दिन 30 सितंबर को जारी हुआ, जब नेता और जनता, सभीऑपरेशन के नशे में भंड थे.रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकरयुद्ध में घायल होकर 100 फीसदी विकलांग हो चुके कमांडोज को अब तक 45,200 रुपए कीपेंशन मिलती थी. अब इसमें 18 हजार रुपए की कटौती करके इसे 27,200 रुपए कर दिया गयाहै. 10 साल तक सेना में रहने वाले जो मेजर 100 फीसदी विकलांग होकर सेना से बाहरहोते हैं, उनकी पेंशन में 70 हजार की कटौती की गई है. 26 साल तक सेना में रहकर 100फीसदी विकलांग होने वाले नायब सूबेदारों की पेंशन में 40 हजार रुपए की कटौती की गईहै.--------------------------------------------------------------------------------सरकार के इस फैसले पर सेना के एक टॉप जनरल ने बिजनस स्टैंडर्ड से कहा, 'शॉक होना एकबहुत ही छोटा शब्द है. हम नहीं बता सकते कि हम क्या महसूस कर रहे हैं. सर्जिकलस्ट्राइक के जश्न में हमें शामिल करने के बजाय रक्षा मंत्रालय ने हमारी पीठ मेंछुरा भोंका है.'--------------------------------------------------------------------------------सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से बीजेपी लगातार इसके नाम पर वोट इकट्ठा करने की कोशिश कररही है. तहसील स्तर पर होर्डिंग लगाकर सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न मनाया गया औरबधाइयां दी गईं. छुटभैये नेताओं ने पाकिस्तान को लेकर ओछी बयानबाजी करने में कोईकसर नहीं छोड़ी. शिवराज सिंह चौहान से लेकर गिरिराज सिंह तक ने सेना के बहाने सरकारकी पीठ ठोंकी. और हद तो तब हो गई जब खुद राजनाथ सिंह और मनोहर पर्रिकर ऐसेकार्यक्रमों का हिस्सा बने, जहां खुले मंच से सर्जिकल स्ट्राइक को ग्लैमराइज कियागया और इस्लामाबाद तक तिरंगा फहराने के नारे बुलंद किए गए.कुछ तकनीकी बातेंपेंशन को लेकर सरकार के इस फैसले से 2006 से चला आ रहा, वो सिस्टम खत्म हो गया, जोछठे वेतन आयोग ने बनाया था. उस सिस्टम के हिसाब से विकलांग सैनिकों को मिलने वालीपेंशन उनको मिले आखिरी वेतन के आधार पर तय की जाती थी. इसे पर्सेंटेज सिस्टम कहाजाता है. अब ये पेंशन स्लैब सिस्टम से तय की जाएगी, जबकि इसकी कोई वजह नहीं है.स्लैब सिस्टम का प्रस्ताव सातवें वेतन आयोग ने रखा था, जिसे केंद्र सरकार नेस्वीकार कर लिया.30 सितंबर को जारी हुए इस नोटिफिकेशन से पहले युद्ध में 100 फीसदी विकलांग हो चुकेसैनिकों को उतनी ही पेंशन मिलती थी, जितना आखिरी बार उन्हें वेतन मिला था. इसकेअलावा उन्हें एक 'सर्विस कंपोनेंट' भी दिया जाता था जो उनकी आखिरी तनख्वाह का 50फीसदी होता है. 1 जनवरी, 2016 से लागू होने वाले नए सिस्टम में सर्विस कंपोनेंट तोरहेगा, लेकिन पेंशन स्लैब सिस्टम से मिलेगी. इसके हिसाब से अफसरों के खाते में 27हजार रुपए, जूनियर कमीशन्ड अफसरों के खाते में 17 हजार रुपए और बाकी सभी रैंकों केजवानों के हिस्से में 12 हजार रुपए आएंगे.एक और खास बातये नया सिस्टम सिर्फ सैनिकों पर लागू होगा. सिविलियन्स को अब भी पर्सेंटेज सिस्टमके हिसाब से ही पेंशन मिलेगी. ये फैसला उसी सरकार ने लिया है, जिसने सेना को हमेशादूसरे मुद्दों से ज्यादा तरजीह दी है. ऐसे में पूर्व सैनिकों की आर्थिक स्थिति परऐसे 'सर्जिकल स्ट्राइक' का क्या मतलब निकलता है. सेना के समर्थन में नारे लगाकरचीजों को भावनात्मक मोड़ देना एक किस्म की राजनीति है, लेकिन सैनिकों की आर्थिकस्थिति कमजोर करना कौन सी राजनीति है? क्या हमारी 'राष्ट्रवादी और देशभक्त' सरकारपूर्व सैनिकों को इसी लायक समझती है?--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:ये रहा सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो, लो देख लोविधायक ने कहा, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब मेरे इलाके में वीडियो शूट कर रही हैआर्मीलीजिए पढ़िए, आर्मी के सर्जिकल स्ट्राइक का एक-एक मिनट का खुलासा हो गया हैपाकिस्तान पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक