मोदी सरकार ने वैक्सीन की कीमतों को लेकर कंपनियों से क्या कहा है?
विपक्ष मुनाफाखोरी का आरोप लगा रहा है
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कोरोना वैक्सीन के बूस्टर डोज़ को लेकर नई स्टडी में बताया गया है कि फिलहाल इसकी जरूरत नहीं है. प्राथमिकता सबको जल्दी वैक्सीन उपलब्ध कराने की होनी चाहिए. (फोटो- PTI)
एक तरफ सरकार कोरोना (Coronavirus) के संकट जूझ रही है, दूसरी तरफ 1 मई से शुरू होने वाले वैक्सीनेशन के अगले चरण में कई तरह की रुकावटें आ रही हैं. गैर बीजेपी सरकार वाले राज्यों ने वैक्सीन की उपलब्धता के चलते 1 मई से वैक्सीनेशन शुरू करने को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं. बता दें कि 1 मई से 18 साल से ऊपर के सभी के लोगों के लिए वैक्सीनेशन शुरू करना है. लेकिन कई प्रदेश सरकारें कोवैक्सीन (Covaxin) और कोविशील्ड (Covishield) की महंगी कीमतों को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं. इस सबके बीच केंद्र की मोदी सरकार ने वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) और भारत बायोटेक (Bharat Biotech) से वैक्सीन के दाम कम करने को कहा है.
कैबिनेट सचिव की मीटिंग में उठा मामला
केंद्र सरकार ने सोमवार (26 अप्रैल) को कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और कोवैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक को कोरोना की वैक्सीन के दाम करने को कहा. द इंडियन एक्सप्रेस अखबार की खबर के मुताबिक वैक्सीन की कीमत का मामला कैबिनेट सचिव राजीव गौबा (Rajiv Gauba) की अध्यक्षता वाली एक मीटिंग में उठा. अब उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही ये दोनों कंपनियां वैक्सीन के नए दाम घोषित करेंगी.
'मेड इन इंडिया' वैक्सीन सबसे महंगी
इससे पहले भारत में इस्तेमाल हो रही वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनियों ने राज्यों और खुले बाजार के लिए अपनी कीमतों का खुलासा किया था. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने राज्यों के लिए कोविशील्ड की एक डोज़ की कीमत 400 रुपए और प्राइवेट अस्पतालों के लिए प्रति डोज़ की कीमत 600 रुपए रखी थी. इसके बाद देसी वैक्सीन कोवैक्सीन की कीमत का खुलासा भारत बायोटेक ने किया. राज्यों के लिए कोवैक्सीन की कीमत 600 रुपए और प्राइवेट अस्पतालों के लिए 1200 रुपए रखी गई. हालांकि ये दोनों ही वैक्सीन केंद्र सरकार को 150 रुपए प्रति डोज़ पर उपलब्ध कराई जाएंगी.
'ये मुनाफा कमाने का वक्त नहीं है'
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने वैक्सीन की इन कीमतों का मुखर होकर विरोध किया है. उन्होंने कहा कि
कांग्रेस पार्टी ने भी इन दोनों कंपनियों द्वारा वैक्सीन की अलग-अलग कीमत निर्धारित करने के कदम को 'असंवेदनशील और भेदभावपूर्ण' करार दिया है. कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वो कंपनियों को 1.11 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा कमाने का मौका दे रही है.
कंपनियों का क्या कहना है?
सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड की बढ़ी हुई कीमतों को सही बताते हुए उसका बचाव किया है. उनका कहना है कि शुरुआती कीमत अडवांस फंडिंग के तौर पर रखी गई थी. अब कंपनी वैक्सीन बनाने की अपनी क्षमता को बढ़ाना चाहती है, जिसके लिए उसे भारी निवेश की जरूरत होगी. वहीं भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एम एल्ला के अनुसार किसी भी इनोवेशन की कीमत को वसूलना भी बहुत जरूरी है.

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