'पद्मावती' 'पद्मावत' पर पिछले कई महीनों के घमासान के बावजूद अगर आप प्रसून जोशीको नहीं जानते हैं, तो तत्काल प्रभाव से पीछे जाने वाली बटन दबा दीजिए. जानते हैंया जानना चाहते हैं, तो बहुत-बहुत स्वागत है. प्रसून गीतकार हैं. बड़े वाले...अच्छे वाले. कभी किसी की चांद से सिफारिश करवाते हैं, तो कहीं मस्ती की पाठशाला खोलदेते हैं. ऐसे उड़ने वाले कई और रेफरेंस भी दिए जा सकते हैं, पर यहां इतने से कामचला लीजिए. बाकी प्लेलिस्ट के लिए गूगल है.तो प्रसून भाईजी जोशी अभी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष हैं. सेंसर बोर्ड याने वो संस्था,जो फिल्मों को सर्टिफिकेट देने का काम करती है. इस संस्था में कई बुद्धिजीवी लोगहोते हैं, जो फिल्म देखकर ये डिसाइड करते हैं कि कौन सी फिल्म किस उम्र के लोगों केदेखने लायक है. प्रसून जोशी से पहले पहलाज निहलानी इस पद की शोभा बढ़ा रहे थे, परफिल्म इंडस्ट्री से उनका ताप सहा नहीं गया. तो निहलानी विदा हुए और प्रसून आए.पहलाज निहलानी (बाएं) और प्रसून जोशीप्रसून को लाने वाली है केंद्र सरकार, क्योंकि सेंसर बोर्ड केंद्र सरकार के सूचनाऔर प्रसारण मंत्रालय के अंडर आता है. केंद्र में अभी सरकार है भारतीय जनता पार्टीकी. वही पार्टी, जिसकी राजस्थान में सरकार है. वही राजस्थान, जहां 'पद्मावत' कोलेकर सबसे जोरदार विरोध हो रहा था. और इसी राजस्थान की राजधानी है जयपुर, जहां अभीजयपुर लिटरेचर फेस्टिवल चल रहा है.ये भी बड़ा लिटरेचर फेस्टिवल है. इसमें कलम के बड़ेब्बड़े खिलाड़ी बुलाए जाते हैं.लेकिन इस साल प्रसून इस कार्यक्रम में नहीं जा रहे हैं. उन्हें आमंत्रित किया गयाथा, लेकिन वो नहीं जा रहे हैं. क्यों नहीं जा रहे हैं, इसका कारण बताते हुएउन्होंने कहा है,Will not be attending #JLFthis year&must say will miss sharing great moments with literature and poetrylovers. I am doing this so that the dignity of the event does not getcompromised or discomfort caused either to the organisers, fellow writers or theattendees: Prasoon Joshi pic.twitter.com/TRR3eNbm5R— ANI (@ANI) January 27, 2018'मैं इस साल जयपुर लिटरेचल फेस्टिवल में हिस्सा नहीं लूंगा और कहना ही पड़ेगा किमैं साहित्य और कविता प्रेमियों के साथ शानदार वक्त नहीं बिता पाऊंगा. मैं ऐसाइसलिए कर रहा हूं ताकि इवेंट की गरिमा के साथ कोई समझौता या असुविधा न हो. न हीआयोजकों को, न लेखकों और न इसमें आने वाले लोगों को. मैंने अपना काम गंभीरता सेकिया है और एक संवेदनशील और संतुलित कदम उठाया है. सर्टिफिकेट देने का कामप्रक्रिया के तहत और सुझावों को मानते हुए किया गया, जिसमें समाज और सिनेमा केसरोकारों का ध्यान रखा गया. ये दुखद है कि हम शांतिपूर्ण बातचीत पर भरोसा नहीं कररहे हैं.'एक साहित्यिक इवेंट में गुलज़ार (दाएं) और जावेद अख्तर (बाएं) के साथ प्रसून जोशीसमझ रहे हैं भाई साहब या नहीं. इतने तगड़े बहुमत के साथ समर्थन में आई सरकार ने जिसआदमी को सेंसर बोर्ड चीफ की कुर्सी पर बिठाया है, उसे पूरा भरोसा है कि उसने अपनाकाम सही से किया है, फिर भी उसे खुद को एक इवेंट में जाने से रोकना पड़ रहा है. वोआदमी, जो कलाकार है, ऐसे इवेंट्स में चार चांद लगाता है, लोग उसे पसंद करते हैं...लेकिन आज वो इस सोच में डूबा है कि उसके जाने से किसी इवेंट में बात न बिगड़ जाए.दिल्ली में दी लल्लनटॉप के अड्डे पर प्रसून जोशीप्रसून का ये फैसला राजस्थान सरकार के मुंह पर तमाचा है. कहने वाले ये भी कह सकतेहैं कि प्रसून जोशी करणी सेना के आगे झुक गए. इसका संदर्भ ये है कि 'पद्मावत' कोसर्टिफिकेट मिलने के बाद करणी सेना ने धमकी दी थी कि वो प्रसून को राजस्थान मेंघुसने नहीं देंगे. आज प्रसून खुद पीछे हो गए. विवाद की नौबत ही नहीं आने दी. लेकिनक्या ये राजस्थान सरकार के लिए शर्म की बात नहीं है.'पद्मावती' का विरोध करते करणी सेना के लोगजिन्हें लाइनों के बीच लिखी बातें पढ़नी नहीं आतीं, उन्हें साफ-साफ बताया जानाचाहिए कि यहां 'पद्मावत' फिल्म पर मचे बवाल की बात हो रही है. और कमाल देखिए,प्रसून जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में जाने पर इतनी माथापच्ची कर रहे हैं, वहीं उन्हेंइस पद पर बिठाने वालों की तरफ से किसी ने चूं तक नहीं की है. न तो राजस्थान सरकारकी तरफ से कोई बयान आया, न सूचना-प्रसारण मंत्रालय की तरफ से और न केंद्र सरकार कीतरफ से.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधियामुबारक हो. जब आप जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में मलाई ढूंढ रहे होंगे, तब प्रसून जोशीअपने घर में बैठे होंगे. वो तो 'पद्मावत' देख चुके हैं, अब आप देख आइए. केतन बतारहे थे कि बड़ी अच्छी फिल्म है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:पद्मावत फ़िल्म रिव्यूबच्चों की बस पर पत्थर चलाने वालों को मैं राजपूत नहीं तालिबानी कहूंगामुंबई के इंजीनियरों ने रजनीकांत को टेंशन देने वाला काम कर दिया है