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अच्छा-अच्छा फील होगा, जब ये सब चीजें ट्रेन में होंगी

किसी ने अगर फुसफुसा के हवा छोड़ी तो नाक भी नहीं सिकोड़नी पड़ेगी. ऐसा इंतजाम होगा.

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इस तस्वीर पर न जाना ये तो प्रतीकात्मक है.
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पंडित असगर
2 नवंबर 2016 (Updated: 2 नवंबर 2016, 06:46 AM IST)
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छुक छुक छुक छुक छुक्क्क... भारतीय रेल. आज चली तो पता नहीं कब पहुंचे वाली कंडीशन में ही दिखाई देती है अब भी. वही चाय चाय चिल्लाने की आवाजें. स्टेशन पर भीड़. रेलों में धक्का मुक्की. और फेस्टिवल आ जाए तो बेचारी रेल ऐसे हो जाती है. जैसे सारे ज़माने का दर्द उसने ही अपने कलेजे में समेट रखा हो. प्रशासन की बदइंतजामी उसके लिए ऐसे हो जाती है जैसे नालायक बेटा खुद बैठा है और बाप से काम करा रहा है. खैर इतनी बुराई भी सही नहीं, दूर जाना है तो रेल से ही जाना पड़ता है. सबको लादकर ले जाने वाली इस भारतीय रेल को ज़माने के साथ चलाने की कवायद हो रही है. मतलब सजाया-संवारा जाएगा. खुशबू से महकाया जाएगा. ताकि आपको किसी की उलजलूल गैसों की बदबू से नाक बंद न करनी पड़े. और भी सहूलियतें दी जाएंगी रेल में. रेलवे अपनी ट्रेनों में ये बड़ा बदलाव करने जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इसी महीने एसी थ्री टियर डिब्बों में रेलवे कुछ छोटे-बड़े बदलाव करेगा. एसी थ्री टियर के डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे, चाय-कॉफी मशीन और जीपीएस सिस्टम लगाए जाने की प्लानिंग है. रेल से सफर करते हो, तो थ्री टियर को तो समझते ही होगे. AC वाला वो डिब्बा,  जिसमें ऊपर नीचे तीन-तीन सीटें होती हैं. हां तो ये सीसीटीवी कैमरे ट्रेन के गलियारे में लगे होंगे.

रेल मिनिस्ट्री के एक सीनियर अफसर के मुताबिक ये सब होगा

हर डिब्बे में जीपीएस लगा होगा. इसके अलावा फायर और स्मोक डिटेक्टर, ऑटोमेटिक रूम फ्रेशनर. यानी बदबू की होगी छुट्टी. कोई अब अगर फुसफुसा के हवा छोड़ दे तो उससे बचने के लिए पहले से ही खुशबू मौजूद होगी. एयरलाइन की तरह लाइट बार, बर्थ इंडिकेटर. टॉयलेट को साफ और शानदार बनाने के लिए टॉयलेट की दीवारों पर कार्टून बनाए जाएंगे. सभी बर्थ पर उसी तरह परदे होंगे, जैसे गलियारे में होते हैं. जिस तरफ ऊपर नीचे तीन-तीन सीटें होती थीं उनके लिए एक ही परदा होता था. वो एक दूसरे को देख सकते थे. अब सबकी प्राइवेसी का ख्याल रखा जाएगा. ये परदे अभी सिर्फ फर्स्ट एसी में होते थे. नए कोच शुरुआत में सिर्फ 'हमसफर सर्विस' के एसी थ्री टियर में लगाए जाएंगे. ये नए कोच रायबरेली की कोच फैक्ट्री में तैयार हो रहे हैं. अभी इन डिब्बों को चार नई ट्रेनों में जोड़ने की प्लानिंग है. दोनों नीचे की बर्थ के पीछे बैकरेस्ट को हटा दिया गया है. इसकी जगह हैंड रेस्ट लगाया जाएगा. लालू प्रसाद यादव जब रेल मिनिस्टर थे. तब एक ट्रेन चली थी गरीब रथ. उसमें साइड बर्थ में तीन सीट दी गईं. कोच में किए गए उस बदलाव को पैसेंजर ने खास पसंद नहीं किया. अब इन बदलाव का लोगों पर क्या फर्क पड़ता है, ये तो सब लागू होने के बाद ही पता चलेगा.

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