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'300 करोड़ के बदले दो फाइल' केस में CBI ने सत्यपाल मलिक से पूछताछ की, गवर्नर रहते लगाए थे आरोप

सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जब वह जम्मू-कश्मीर के गवर्नर थे तब दो फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए उन्हें 300 करोड़ रुपये ऑफर किए गए थे.

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9 अक्तूबर 2022 (अपडेटेड: 9 अक्तूबर 2022, 04:06 PM IST)
Satya Pal Malik CBI case
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक. (फाइल फोटो: पीटीआई)
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केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने शनिवार 8 अक्टूबर को मेघालय के पूर्व गवर्नर सत्यापल मलिक से जम्मू-कश्मीर में हुईं कथित अनियमितताओं को लेकर पूछताछ की. मलिक ने आरोप लगाया था कि 2018-19 के दौरान जब वह जम्मू और कश्मीर के गवर्नर थे तो उन्हें रिश्वसत देकर दो फाइलें पास करने का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मलिक ने कहा, 

'मुझे जांच एजेंसी ने बुलाया था और उन्होंने मामले के संबंध में मेरा बयान दर्ज किया. मुझे आगे की पूछताछ से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी गई.'

CBI के मुताबिक दो दिन पहले भी मलिक से पूछताछ की गई थी. और फिर शनिवार को उनसे सवाल-जवाब किया गया. राज्यपाल के रूप में मलिक का पांच साल का कार्यकाल 4 अक्टूबर को समाप्त होने के बाद ये पूछताछ शुरु की गई है. मेघालय और कश्मीर के अलावा वह गोवा और बिहार के भी राज्यपाल रह चुके हैं.

सत्यपाल मलिक के आरोपों के आधार पर CBI ने अप्रैल महीने में दो FIR दर्ज की थीं. पूर्व राज्यपाल ने कहा था कि जब वह जम्मू और कश्मीर के गवर्नर थे तो दो फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए उन्हें 300 करोड़ रुपये के रिश्वत की पेशकश की गई थी. मलिक के मुताबिक इसमें से एक फाइल RSS के नेता और एक अनिल अंबानी की बीमा कंपनी से जुड़ी हुई थी.

17 अक्टूबर 2021 को राजस्थान में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, 

'कश्मीर जाने के बाद मेरे सामने दो फाइलें (मंजूरी के लिए) लाई गईं. एक अंबानी और दूसरी RSS से जुड़े व्यक्ति की थी, जो महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली तत्कालीन पीडीपी-भाजपा सरकार में मंत्री थे और प्रधानमंत्री के बहुत करीबी थे.'

उन्होंने कहा था, 

‘दोनों विभागों के सचिवों ने मुझे बताया था कि यह अनैतिक कामकाज जुड़ा हुआ है, लिहाजा दोनों सौदे रद्द कर दिए गए. सचिवों ने मुझसे कहा था कि आपको प्रत्येक फाइल को मंजूरी देने के लिए 150-150 करोड़ रुपये मिलेंगे, लेकिन मैंने उनसे कहा कि मैं पांच जोड़ी कुर्ता-पायजामा लेकर आया था और केवल उन्हें ही वापस लेकर जाऊंगा.’

इसी आधार पर CBI ने दो FIR दर्ज किया, जिसमें अनिल अंबानी की रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी (आरजीआईसी), ट्रिनिटी री-इंश्योरेंस ब्रोकर लिमिटेड और चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (सीवीपीपीपीएल) के अधिकारियों के नाम शामिल किए गए.

इसके बाद CBI ने जम्मू, श्रीनगर, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, केरल में त्रिवेंद्रम और बिहार में दरभंगा में 14 स्थानों पर आरोपियों के परिसर पर तलाशी भी की थी.

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