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दाभोलकर मर्डर केस: 'देसी साहित्य का मतलब देसी कट्टा'

हिंदू राष्ट्र की चाहत रखने वालों ने की थी दाभोलकर की हत्या. मास्टरमाइंड तावड़े गिरफ्तार हुआ है. जानिए पूरा मामला.

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अविनाश जानू
14 जून 2016 (Updated: 14 जून 2016, 11:21 AM IST)
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महाराष्ट्र के एक लेखक थे, नरेंद्र अच्युत दाभोलकर. धार्मिक पाखंड करने वाले लोगों के खिलाफ खुलकर बोलते. 2013 में पुणे में दो लोग बाइक से आकर गोली मारकर दाभोलकर की जान ले लेते हैं. मर्डर की जांच अब भी सीबीआई कर रही है. दाभोलकर की हत्या में शामिल डॉ. विकास तावड़े को पुलिस ने बीते शुक्रवार को अरेस्ट कर लिया गया. अब तावड़े के ई-मेल अकाउंट की जांच करने पर नए खुलासे हुए हैं. खुलासे के मुताबिक, इस मर्डर में शामिल एक शूटर सारंग अकोलकर की पहचान हो चुकी है. हालांकि सांरग समेत दूसरा शूटर अब भी फरार है. सीबीआई की मानें, तो दोनों शूटर सनातन संस्था के मेंबर हैं. दोनों 2009 में हुए गोवा ब्लास्ट के भी वांटेड रहे हैं. बता दें कि नरेंद्र अच्युत दाभोलकर महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के फाउंडर और प्रेसिडेंट थे. अपनी समिति के जरिए वो समाज में फैले अंधविश्वास के खिलाफ काम करते थे.
तावड़े के मेल से हुआ खुलासा सीबीआई ने स्केच और ई-मेल की जांच के बाद नई जानकारी मिलने की बात कही. ये जानकारी आरोपी डॉ. विकास तावड़े के ईमेल अकाउंट से मिली हैं. तावड़े भी सनातन संस्था की हिंदू जनजागृति समिति का सदस्य रहा है. सीबीआई का मानना है कि हत्या की साजिश में चार लोग शामिल थे. तावड़े इनमें से दूसरे नंबर पर था. सीबीआई को जांच के दौरान पता चला कि तावड़े के पास ऊपर से मेल आते थे. जिसमें आगे का प्लान होता था और वो इसे अकोलकर और संस्था के बाकी सदस्यों को भेजता था.
तावड़े, अकोलकर थे मास्टरमाइंड सीबीआई के हिसाब से मर्डर में इनका ही हाथ है. तावड़े, अकोलकर ही मास्टमाइंड है. ये सारी बातें जांच से जुड़े एक बड़े ऑफिसर ने कहीं. सीबीआई ने बताया कि तावड़े ने अकोलकर को 2010 में एक ईमेल किया था. जिसमें उसने दाभोलकर को अपना टारगेट बताया था. ये काम हिंदू जनजागृति समिति के किसी मेन मेंबर ने उन्हें सौंपा था और दाभोलकर को मारने के लिए अकोलकर को सेट किया गया था.
कोड लैंग्वेज में करते थे बात 2008 से 2013 के बीच तावड़े और अकोलकर ने बहुत से मेल एक-दूसरे को किए हैं. 1 जून से सीबीआई तावड़े से अपने नवी मुंबई वाले ऑफिस में पूछताछ कर रही है. एक ईमेल के मुताबिक,
'देसी और विदेशी साहित्य के लिए कारखाना बनाना पड़ेगा.' तावड़े ने पूछताछ में बताया कि देसी साहित्य का मतलब देसी कट्टा और विदेशी साहित्य का मतलब विदेशी हथियार हैं.'

हिंदू राष्ट्र के लिए सेना बना रहे थे तावड़े ने पूछताछ में बताया कि हमारा प्लान 15 हजार लोगों की एक सेना बनाने का था, जो कि हिंदू राष्ट्र के लिए लड़ सके. तावड़े हिंदू जनजागृति समिति का पश्चिमी कमांडर है. और उसकी मेल से संस्था के लिए एक आर्मी बनाने की कोशिश का पता चला है. हालांकि तावड़े ने अभी पूछताछ के दौरान सीधे इसे मानने से इंकार किया कि वो दाभोलकर की हत्या में शामिल रहा है.
2 महीने पहले से ही प्लान था मर्डर सीबीआई ने संस्था के पनवेल ऑफिस पर छापा मारा है और एक हार्ड डिस्क जब्त की है. जिसे फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है. सीबीआई का मानना है. इस जांच से ये भी निकलकर सामने आ सकता है कि दाभोलकर ही उनका एकमात्र निशाना नहीं था. सीबीआई का मानना है कि उनकी हत्या का प्लान जून, 2013 से ही बनाया जा रहा था.
सीबीआई कराना चाहती है तावड़े की ब्रेन मैपिंग 16 जून तक सीबीआई की हिरासत में है. सीबीआई इसके ब्रेन मैपिंग और नार्को एनालिसिस जैसे कुछ टेस्ट करवाना चाहती है. पर आरोपी की सहमति भी इसमें जरूरी होती है. इसीलिए ये काम फंसा हुआ है. वरना ऐसे टेस्ट से सारा सीन साफ़ हो जाने की उम्मीद है.
सनातन संस्था ने बीजेपी को लताड़ा, कहा- हम प्लान कर रहे आगे का प्रोग्राम वीरेंद्र तावड़े की गिरफ़्तारी के दो दिन बाद सनातन संस्था और इसको चलने वाले हिंदू जनजागृति समिति ने सोमवार को बीजेपी सरकार की आलोचना की है. उन्होंने कहा, हिन्दुत्ववादी सरकार के पॉवर में होते हुए भी हिंदुओं को लगातार दबाया जा रहा है. संस्था और हिंदू जनजागृति समिति एक अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन करवाने वाले हैं. 19 से 25 जून तक सारे हिंदुत्ववादी ग्रुप्स का एक राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया जायेगा. जो 19 से 25 जून तक चलेगा.
'बीजेपी रही है हर फील्ड में नाकाम' सोमवार को पुणे में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान हिंदू जनजागृति समिति के राज्य संयोजक सुनील घंवत ने कहा, हम मानते हैं कि बीजेपी हिंदुत्व की समर्थक है. पर पॉवर में आने के बाद, बीजेपी ने हिन्दुओं की आशा के हिसाब से काम नहीं किया है. इसके लिए उन्होंने बीजेपी पर ये आरोप लगाए-
  1. जबसे बीजेपी पॉवर में आई है तबसे बीफ का एक्सपोर्ट 15 परसेंट बढ़ा है.
  2. कश्मीरी पंडितों की घरवापसी के लिए भी बीजेपी ने ठोस कदम नहीं उठाए हैं.
  3. राम मंदिर का मुद्दा भी नहीं सॉल्व हुआ है.
  4. बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है.
  5. निर्दोष हिंदुओं को झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया जा रहा है.
  6. बहुत से मुद्दे जो हिंदुओं से जुड़े हुए हैं. उनपर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है.

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