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चुम्मी और गालियों के बाद पहलाज अब 'हिंदू', 'गुजरात' और 'गाय' पर बीप लगवा रहे हैं

कुछ दिनों में फ़िल्में ही बननी बंद हो जाएंगी मितरों.

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13 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 13 जुलाई 2017, 05:59 AM IST)
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सेंसर बोर्ड. सेंसर बोर्ड. सेंसर बोर्ड. एक मराठी कहावत है. ‘जली, स्थळी, काष्ठी, पाषाणी.’ जिसका सिंपल भावार्थ हुआ कि हर जगह. वाकई हर जगह सेंसर बोर्ड की टांग फंसी नज़र आ रही है. जब देखो तब किसी न किसी चीज़ पर ऐतराज़ उठा देता है. फिल्ममेकर्स को अब अपनी फिल्म हिट होगी या फ्लॉप, इसकी चिंता कम रहती है. ज़्यादा फ़िक्र इस बात की रहती है कि पहलाज निहलानी और उनका बाड़ा न जाने फिल्म की किस बात पर सवाल खड़ा कर दे. इम्तियाज़ अली, अलंकृता श्रीवास्तव जैसे लोग फिल्मकार हाथ जला बैठे हैं. ‘उड़ता पंजाब’, फिल्लौरी’ जैसी फ़िल्में बोर्ड की दीवारों से माथा फुडवा चुकी है. अब इस लिस्ट में नया इज़ाफ़ा हुआ है. फिल्ममेकर सुमन घोष और उनकी डॉक्यूमेंट्री का. मशहूर अर्थशास्त्री डॉ अमर्त्य सेन की ज़िंदगी पर बनी इस डॉक्यूमेंट्री पर CBFC की टेढ़ी नज़र पड़ गई है. इस डॉक्यूमेंट्री का नाम है 'दी आर्गुमेंटेटिव इंडियन' (The Argumentative Indian). CBFC ने सुमन घोष से कहा है कि वो अपनी डॉक्यूमेंट्री में कुछ शब्दों को ‘बीप’ कर दे. वो शब्द हैं,

‘गुजरात’,

‘गाय’,

‘हिंदू इंडिया’

और..

‘हिंदुत्व’.

“मैं इस डॉक्यूमेंट्री से एक भी शब्द बीप नहीं करूंगा. इसके लिए एक पूरी प्रक्रिया है और हम उसे फॉलो करेंगे. देखते हैं मामला कहां तक जाता है.”
“विपक्ष की हर आवाज़ को दबाया जा रहा है. अगर अमर्त्य सेन जैसी शख्सियत को बोलने की आज़ादी नहीं है, तो आम आदमी का क्या हाल होगा?”

न, न, सर न पकड़िये. ये सच है. ये डॉक्यूमेंट्री दो हिस्सों में शूट हुई है. पहला पार्ट 2002 में शूट हुआ था. दूसरा अब हुआ है. नोबेल प्राइज विजेता अमर्त्य सेन ने पहले पार्ट में एक जगह ‘गुजरात’ कहा है. जब वो गुजरात दंगों की बात कर रहे हैं. CBFC ने डायरेक्टर से कहा कि वो इस शब्द को बीप कर दे. अगला शब्द जिसपर उन्हें ऐतराज़ हुआ वो ‘गाय’ था. सुमन घोष कहते हैं कि उन्हें इसपर हंसी आ गई. हिंदू और हिंदुत्व जैसे शब्दों को भी म्यूट करने को कहा गया. सुमन घोष ने ऐसे किसी भी बदलाव को मानने से इंकार कर दिया है. वो कहते हैं, इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार, CBFC के एग्जामिनर ने कोलकाता से मुंबई एक लिखित रिपोर्ट भेजी है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन शब्दों के इस्तेमाल से गुजरात राज्य की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. और ‘हिंदू इंडिया’ कहने से किसी ख़ास समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं. पहलाज निहलानी, हर बार की तरह प्रेस के लिए ‘मिस्टर इंडिया’ हो गए हैं. किसी स्टेटमेंट के लिए हाथ ही नहीं आ रहे हैं. उधर अमर्त्य सेन ने कहा है कि वो इस डॉक्यूमेंट्री के सब्जेक्ट हैं, डायरेक्टर नहीं. वो इसपर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. अगर बोर्ड को कोई दिक्कत है तो वो साझा करे, जिसपर औरों की भी राय ली जाए. CBFC की इस हरकत से ममता बैनर्जी गुस्सा हो गई हैं. उनका कहना है, CBFC के मनमाने फैसलों से कई फिल्मकार खफा हैं. सेंसर बोर्ड की प्रासंगिकता पर सवाल उठने लगे हैं. भारत में फिल्में बन रही हैं, प्रगतिशील फिल्में बन रही हैं, नारीवाद और समलैंगिकता पर फिल्में बन रही हैं. पूरी दुनिया भारत को बड़े सम्मान की नजर से देख रही है. लेकिन निहलानी जी पहरा दे रहे हैं कि कहीं कुछ फिल्मों में ऐसा न रह जाए जिससे समाज करप्ट हो जाए, सांस्कृतिक रूप से ‘बीमार’ हो जाए. दुआ यही है कि ‘गाय’ पर ऑब्जेक्शन को गौ-रक्षक दल उल्टा न ले जाए. उनका कुछ भरोसा नहीं.
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