'PM को सदन में आने का निर्देश नहीं दे सकता, दूंगा भी नहीं', जगदीप धनखड़ ने ऐसा क्यों कहा?
मणिपुर हिंसा पर विपक्ष लगातार पीएम मोदी के बयान की मांग कर रहा है.
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मणिपुर में चल रही हिंसा पर संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हंगामा हो रहा है. विपक्ष की मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद आएं और मणिपुर पर बयान दें. इसके लिए विपक्षी दल अविश्वास प्रस्ताव तक ले आए. इस हफ्ते इस पर चर्चा हो सकती है. लेकिन उससे पहले 2 अगस्त को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वो पीएम को सदन में आने का निर्देश नहीं दे सकते. धनखड़ ने कहा कि वो ऐसा करेंगे भी नहीं, क्योंकि किसी भी अन्य सांसद की तरह सदन में आना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है. उनकी ये बात सुनकर विपक्षी नेताओं ने सदन से वॉक आउट कर दिया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्हें नियम 267 के तहत 58 नोटिस मिले. ये सभी नोटिस (लोकसभा) अध्यक्ष की सहमति से मणिपुर हिंसा पर चर्चा की अनुमति के लिए थे. धनखड़ ने कहा कि नोटिस स्वीकार नहीं किए गए क्योंकि लोकसभा अध्यक्ष ने 20 जुलाई को ही नियम 167 के तहत इस मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा स्वीकार कर ली थी. उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था कि नियम 167 के तहत चर्चा ढाई घंटे तक सीमित रहेगी, पर ये गलत धारणा थी.
धनखड़ के मुताबिक उस चर्चा पर वक्त की कोई पाबंदी नहीं थी. उन्होंने कहा,
खड़गे ने दिया था नोटिस'मैंने स्पष्ट शब्दों में और उचित संवैधानिक आधार पर संकेत दिया था कि इस चेयर से, अगर मैं प्रधानमंत्री को उपस्थित होने का निर्देश देता हूं तो मैं अपनी शपथ का उल्लंघन करूंगा. ऐसा कभी नहीं किया गया… मैं (विपक्ष की) कानून और संविधान की अज्ञानता पर कार्रवाई नहीं कर सकता. अगर प्रधानमंत्री आना चाहते हैं, तो बाकी सभी की तरह, यह उनका विशेषाधिकार है. इस कुर्सी से, इस तरह का निर्देश कभी जारी नहीं किया गया, ना ही जारी किया जाएगा.'
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन को बताया था कि उन्होंने नियम 267 के तहत सभापति को एक नोटिस भेजा था. इसमें उन्होंने 8 पॉइंट्स में स्पष्ट किया था, क्यों मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए और क्यों प्रधानमंत्री मोदी को सदन में आकर बयान देना चाहिए. इसके बाद ही धनखड़ ने ये जवाब दिया था.
सभापति ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे को इस विषय पर सही सलाह नहीं दी गई. धनखड़ ने खड़गे को सलाह दी कि उनके पास कई कानूनी दिग्गज हैं, तो उनसे इस मामले पर सलाह मशविरा करना चाहिए. सभापति बोले,
'आपके पक्ष में कई कानूनी विशेषज्ञ हैं, उनसे राय लें. वो आपकी मदद करेंगे. संविधान के तहत, मैं ये निर्देश नहीं दे सकता.'
विपक्ष के हंगामे के बीच सभापति ने शून्यकाल शुरू कर दिया. जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया.
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