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क्या 100 रुपये कमाने के लिए रेलवे ने 114 रुपये खर्च किए?

CAG की रिपोर्ट से परिचालन खर्च को लेकर रेलवे पर सवाल खड़े हो गए हैं.

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22 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 22 दिसंबर 2021, 01:26 PM IST)
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खबर रेलवे से. भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट से रेलवे परिचालन के खर्च को लेकर सवाल उठ गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-2020 में भारतीय रेलवे का 98.36 प्रतिशत परिचालन अनुपात का दावा उसकी वास्तविक वित्तीय स्थिति को नहीं दिखाता. CAG ने अपनी एक रिपोर्ट में ये भी कहा कि अगर पेंशन पर होने वाले खर्च को ध्यान में रखा जाए तो ये अनुपात 114.35 प्रतिशत होना चाहिए. कहने का मतलब है कि 100 रुपये कमाने में रेलवे 114.35 रुपये खर्च कर रहा था. वहीं रेलवे की अकाउंटेंसी का दावा है कि ऑपरेटिंग रेशो 98.36 फीसदी रहा. परिचालन अनुपात (OR) का मतलब है कि 100 रुपये जुटाने के लिए कितना खर्च किया गया. इसके जरिए किसी संगठन या संस्था की  ऑपरेशनल क्षमता का पता चलता है. परिचालन अनुपात जितना अधिक होगा, विस्तार और विकास के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधन उतने कम होंगे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कैग ने ये भी नोट किया कि नेशनल कैरियर को यात्रियों और अन्य कोचिंग टैरिफ पर फिर से सोचने की जरूरत है ताकि चरणबद्ध तरीके से संचालन की लागत यानी ऑपरेशन कॉस्ट वसूल की जा सके. साथ ही कोर एरिया में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2019 में भारतीय रेलवे का ऑपरेटिंग रेशो पिछले 10 साल में सबसे खराब रहा और रेवेन्यु सरप्लस में 66 प्रतिशत की गिरावट आई. ये 2016-17 के 4913 करोड़ रुपये की अपेक्षा 2017-18 में 1665.61 करोड़ ही रहा. अखबार के मुताबिक कैग ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि बजट में ऑपरेटिंग रेशो 95 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन ये 2019-20 में 98.36 प्रतिशत रहा. इससे पहले 2018-19 में रेलवे का परिचालन अनुपात 97.29 प्रतिशत से गिरकर 2019-20 में 98.36 प्रतिशत हो गया था. इसके अलावा अगर पेंशन भुगतान पर वास्तविक व्यय को ध्यान में रखा जाता तो रेलवे का OR 98.36 प्रतिशत के बजाय 114.35 प्रतिशत होता. इस आधार पर कहा गया है कि रेलवे द्वारा दिखाया गया परिचालन अनुपात इसके वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन को नहीं दर्शाता है. रिपोर्ट कहती है कि 2019-20 के दौरान भारतीय रेलवे ने 2 लाख 16 हजार 935 करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले कुल 1 लाख 74 हजार 694 करोड़ रुपये की प्राप्ति की. ये भी कहा गया है कि रेलवे 2 लाख 6 हजार 269 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमानित लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर पाया. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वर्ष की तुलना में 2019-20 के दौरान कुल प्राप्तियों में 8.30 प्रतिशत की कमी आई है. हालांकि कैग के मुताबिक पिछले साल भारतीय रेलवे अपने खर्च को कम करने में सफल रहा था. साथ ही माल ढुलाई से जो राजस्व मिला, उसकी मदद से वो यातायात में आई कमी को पूरा करने में भी सक्षम रहा. इसके अलावा पेंशन देनदारियों में गिरावट से भी मदद मिली. जब से रेल बजट का केंद्रीय बजट में विलय हुआ है, रेल मंत्रालय अपनी पेंशन देनदारी को पूरा करने के लिए वित्त मंत्रालय की मदद मांग रहा है. हालांकि वित्त मंत्रालय ने अब तक इस मांग को पूरा नहीं किया है.

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