The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • CAG pulls up army and airforce of India for irregularities in food procurement for jawans

लो जी, CAG ने कहा - भारतीय सेना के 'जवान' सड़ी सब्जियां खाते हैं

नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमन्त्री बनने से पहले कहा था कि न खाऊंगा, ना खाने दूंगा. इसका यही मतलब है क्या?

Advertisement
pic
28 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 28 जुलाई 2016, 12:36 PM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
CAG ने अपनी एक ऑडिट रिपोर्ट में आर्मी को बहुत जोर से डांट दिया है. ये प्यार भरी डांट नहीं है. आर्मी अपने जवानों को बासी फल और सब्जियां खिलाती है. ये पाया गया है कि आर्मी की सप्लाई चेन मैनेजमेंट, जो राशन खरीदने का काम करती है, घाल-मेल से भरी हुई है. ये दिक्कत जवानों के साथ है. अफसरों के साथ नहीं. आर्मी की पश्चिमी और पूर्वी कमांड में ये चीजें सामने आई हैं: 1. जब जवानों से इस बारे में पूछा गया तो एक सुर में ज्यादातर ने पूरी पोल-पट्टी खोल दी. उनके मुताबिक मीट से लेकर सब्जी हर चीज 'लो क्वॉलिटी' की है. 2. आगे ये भी देखा गया कि बहुत सारी चीजें मार्किट से भी ज्यादा रेट से खरीदी गई हैं. 3. 2006 में जरूरत से ज्यादा रेडियो सेट खरीद लिए गए थे. उनका इस्तेमाल नहीं हुआ. अब इनको अपडेट करने की जरूरत है. 22 करोड़ में खरीदी चीज पर 11 करोड़ अपडेट का खर्च आएगा. 4. ब्रिज बनाने से पहले मिट्टी भी नहीं चेक करते. इससे खर्चा बढ़ जाता है. कई बार जहां नहीं बनना चाहिए, वहां भी ब्रिज बना लेते हैं. इसके अलावा कई ऐसे सामान खरीद लिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ही नहीं होता है. जैसे 7 करोड़ की एक क्रेन. फिर एयरफोर्स ने भी 19 हज़ार करोड़ में 10 C17 ग्लोबमास्टर प्लेन खरीद लिए और कभी इस्तेमाल नहीं किया.
2011 में पार्लियामेंट की 'पब्लिक एकाउंट्स कमिटी' ने सप्लाई चेन मैनेजमेंट की बेहतरी के लिए 12 सुझाव दिए. आर्मी ने अब तक मात्र दो लागू किए हैं. नतीजा ये हुआ कि आर्मी बिना किसी नियम के कहीं से सामान खरीद लेती है. इसीलिए रेट और क्वॉलिटी दोनों का कोई हिसाब नहीं होता. लगभग 11.5 लाख सैनिक हैं सेना में. इनके राशन का कुल खर्च 15 सौ करोड़ रुपये सालाना है. पर सैनिकों को ढंग का खाना भी नहीं मिलता. कई सामान 'एक्सपायरी डेट' बीत जाने पर भी इस्तेमाल किए जाते हैं.
जिनके घर के लोग सेना में हैं, वो इस बात को अच्छे से जानते होंगे. एक तरफ राष्ट्रवादी लोग हर बात के लिए आतंक मचाये हुए हैं. इस बात पर लोग चुप हैं. नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमन्त्री बनने से पहले कहा था कि न खाऊंगा, ना खाने दूंगा. इसका यही मतलब है क्या?

Advertisement

Advertisement

()