The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • CAA protest: Uttar Pradesh police send notice to Firozabad banne khan who died six years before

गज़ब! CAA प्रोटेस्ट को लेकर UP पुलिस ने छह साल पहले मर चुके आदमी को नोटिस भेज दिया

पुलिस ने 90 और 93 साल के बुजुर्गों को भी नोटिस जारी किया है.

Advertisement
pic
2 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 2 जनवरी 2020, 11:40 AM IST)
Img The Lallantop
बन्ने खां (बाएं) अब इस दुनिया में नहीं हैं. फिरोजाबाद पुलिस ने उनके खिलाफ शांतिभंग करने के मामले में नोटिस जारी किया है. (तस्वीर-सोशल मीडिया)
Quick AI Highlights
Click here to view more
नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन भी हुए. इस तरह के प्रदर्शनों पर लगाम लगाने के लिए फिरोजाबाद पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ नोटिस जारी किया है जिनसे शांति भंग का खतरा है. लेकिन पुलिस ने कुछ ऐसे लोगों को नोटिस भेजा है जो इस दुनिया में नहीं है. वहीं कुछ बुजुर्गों को भी नोटिस जारी किया गया है, जिनकी उम्र 90 के पार है. अब पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं. क्या है मामला ? 20 दिसंबर, 2019 को फिरोजाबाद में जुमे की नमाज के बाद उपद्रवियों ने आगजनी और पथराव किया था. सरकारी और कई प्राइवेट वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था. पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई थी. हिंसक प्रदर्शन में कई लोगों की मौत भी हो गई थी. पुलिस ने इस मामले में 49 मुकदमे दर्ज किए हैं. 29 नामजद और 2,500 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. इनमें से 14 को जेल भेज दिया गया है. इस बवाल के बाद पुलिस ने ऐसे लोगों को नोटिस जारी किया जिनसे शांतिभंग का खतरा हो सकता है. पुलिस ने बन्ने खां नाम के एक शख्स के लिए भी नोटिस जारी किया है. बन्ने खां इस दुनिया में नहीं हैं, छह साल पहले ही उनकी मौत हो चुकी है. अगर ज़िंदा होते तो वो 100 साल के होते. बन्ने खां के बेटे मोहम्मद सरफराज ने बताया,
मेरे पिता का 6 साल पहले इंतकाल हो चुका है. पुलिस ने उनके खिलाफ नोटिस भेजा है. अखबार में भी छपा है. नोटिस देने से पहले पुलिस को जांच करनी चाहिए थी कि जिन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है वो इस दुनिया में हैं भी या नहीं. हमारे पास मृत्यु प्रमाण पत्र भी है.
इसके अलावा पुलिस ने 90 वर्षीय सूफी अंसार हुसैन और 93 वर्षीय फसाहत मीर खां को भी नोटिस जारी किया है. पुलिस को इनसे शांति भंग होने का अंदेशा है. सूफी अंसार हुसैन फिरोजाबाद के जामा मस्जिद के सचिव और समाजसेवी हैं. पिछले 58 वर्ष से जामा मस्जिद की सेवा कर रहे हैं. 90 साल के हो चुके हैं. अब बीमार रहते हैं. सूफी अंसार हुसैन ने कहा,
मैं 25 दिसंबर को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में चेकअप के लिए गया था. एक जनवरी को वापस आया हूं. अखबारों से पता चला कि पुलिस ने नोटिस जारी किया है. समझ में नहीं आ रहा है कि पुलिस ने ऐसा क्यों किया. मैंने अपना पूरा जीवन शहर में अमन के लिए समर्पित कर दिया. 90 की उम्र में मेरे साथ ऐसा हो रहा है. 20 दिसंबर को जो हुआ उस समय यहां उर्स था. मैंने सब अधिकारियों को इनवाइट भी किया था, लेकिन जाने क्यों मुझे पाबंद कर दिया गया.
93 साल के फसाहत मीर खां को भी नोटिस मिला है. वो बीमार हैं. बिस्तर से उठ नहीं पाते. समाजसेवी रहे हैं. मौलाना आजाद निस्वन गर्ल्स इंटर कॉलेज के संस्थापक हैं. मीर खां के बेटे मोहम्मद ताहिर ने बताया,
दो पुलिसवाले घर आए. उन्होंने पूछा, फसाहत मीर खां यहीं रहते हैं? मैंने उन्हें बिस्तर पर पड़े पिताजी को दिखाया. पुलिसवाले कहने लगे ये तो बहुत बुजुर्ग हैं. लेकिन तीसरे दिन एक नोटिस चस्पा कर दिया. मेरे वालिद समाजसेवी हैं. उन्हें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने का मौका मिला था. समझ में नहीं आ रहा है कि पुलिस ऐसा क्यों कर रही है.
इस मामले में सिटी मैजिस्ट्रेट कुंवर पंकज सिंह का कहना है,
20 दिसंबर, 2019 को शहर में बवाल हुआ था. शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने का दबाव था. शहर के जो तमाम थाने हैं उनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई. लेकिन इस लिस्ट में कई बुजुर्गों के नाम हैं जो 90 साल के हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी. कोई गलत नाम पाए जाने पर उसे हटाने का भी प्रवाधान है.
मीडिया में खबरें आने के बाद प्रशासन लिस्ट में सुधार की बात कर रहा है. नोटिस जारी करने से पहले पुलिस ने ध्यान दिया होता तो इस तरह की छीछालेदर से बचा जा सकता था.
सद्गुरु वाले ईशा फाउंडेशन ने भी चलाया था CAA पोल, लोगों ने स्क्रीन शॉट ले लिए, अब छीछालेदर

Advertisement

Advertisement

()