CAA प्रोटेस्ट: प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR में सारी जानकारी, मर्डर मामले में खानापूर्ति
FIR में पुलिस को पूरी तरह से क्लीन चिट!

नागरिकता संशोधन कानून, यानी CAA. देश के कई हिस्सों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा भी हुई. इस दौरान कई अजीब चीजें सामने आ रही हैं.
19 दिसंबर के दिन यूपी के संभल ज़िले में भी विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी. इसमें दो लोगों की मौत हुई थी. हिंसा और मौत के मामले में पुलिस के पास FIR दर्ज हुई, लेकिन दोनों FIR के बीच जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक FIR 17 लोगों के खिलाफ है. इन लोगों पर दंगा करने का आरोप लगा है. इस FIR में सारी जानकारी बड़ी बारीकी के साथ दी गई है. वहीं जो दूसरी FIR है, वो 23 साल के मोहम्मद शिरोज़ की मौत के मामले में है. इसमें ज्यादा कोई जानकारी नहीं है, केवल एक छोटे-से पैरा में ही ये FIR खत्म हो जा रही है.
अब जरा बारीकी से अंतर देखते हैं
शिरोज़ को एक सरकारी अस्पताल ने 20 दिसंबर के दिन मृत घोषित किया था. उसकी मौत के मामले में उसके अंकल मोहम्मद तसलीम ने शुरुआती शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत के आधार पर जो FIR दर्ज हुई है, उसमें लिखा है,
'मेरा भतीजा शिरोज़ जो ट्रक ड्राइवर था, वो काम पर गया हुआ था. चंदौसी चौराहे पर वो गंभीर रूप से घायल मिला. उसे हसीन बेगम अस्पताल ले जाया गया. वहां से उसे सरकारी अस्पताल में रेफर किया गया. सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.'
इस FIR में उस डॉक्टर का भी नाम नहीं है, जिसने शिरोज़ को मृत घोषित किया. न तो उसकी मौत का वक्त लिखा है, न ही मौत का कारण लिखा है, जो कि मर्डर से जुड़ी हुई किसी भी FIR में होना जरूरी होता है.
FIR में किसी गवाह का कोई जिक्र नहीं है, न ही चंदौसी चौराहे पर तैनात किसी पुलिसकर्मी के बारे में कुछ लिखा गया है. वो भी तब, जब 19 दिसंबर के दंगे के बाद चौराहे पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. अभी तक शिरोज़ के परिवार वालों को पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी नहीं मिली है. किसी भी आरोपी की पहचान नहीं हुई है.
FIR में IPC की धारा 304 (हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर इरादतन हत्या के लिए सजा) को मेंशन किया गया है, न कि 302 (हत्या) को.

संभल में प्रदर्शन के दौरान सरकारी बस में आग लगाई गई.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिरोज़ के शरीर पर गोली लगी थी. स्क्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिरोज़ के पिता का कहना है कि उनके बेटे की मौत गोली लगने से ही हुई है. शिरोज़ के अलावा 20 दिसंबर को संभल में 27 साल के मोहम्मद बिलाल की भी मौत हुई थी. वो दिहाड़ी मजदूर था.
अब बात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई FIR की
17 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई FIR में घटनाक्रम बताया गया है. सभी आरोपियों के बाकायदा नाम लिखे हुए हैं. सबके खिलाफ IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुए हैं. दंगे करने के आरोप लगे हैं. इसमें पुलिस ने ये माना है कि फायरिंग की गई थी, लेकिन ये भी लिखा कि प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल करने के लिए और अपनी रक्षा के लिए गोली चलाई गई थी. इस FIR में पुलिस ने खुद को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी.
FIR में लिखा है कि डॉक्टर शफीकुर रहमान, जो कि समाजवादी पार्टी के सांसद हैं, वो अपने समर्थकों के साथ CAA के विरोध में नारे लगा रहे थे. वो भी तब, जब धारा 144 लागू थी. प्रदर्शनकारियों ने जाम लगा दिया था. दोपहर करीब 1 बजे के आसपास वो उग्र हो गए और पत्थरबाजी करने लगे. सरकार की गाड़ियों पर पत्थर फेंका. बाकी जो नागरिक उस वक्त वहां मौजूद थे, उन्हें दिक्कत होने लगी थी. वो डर गए थे. दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने लगे थे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने और समझाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने. उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने फायरिंग की.सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला. यहां प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई. पत्थरबाजी हुई और पुलिस ने फायरिंग भी की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग शहरों में अब तक करीब 19 लोगों की मौत हो चुकी है.
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