राजनाथ सिंह बोले, 'कोई भारत के मुसलमान को चिमटे से भी नहीं छू सकता'
CAA के समर्थन में BJP अभियान चला रही है.
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पड़ोस के तीन देशों में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का हमारी सरकार ने पिछले कार्यकाल में ही वादा किया था. फोटो: Twitter@rajnathsingh
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देश में कई जगहों पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं. दूसरी ओर BJP इस कानून के समर्थन में जगह-जगह सभाएं कर रही है. इन सबके बीच रक्षामंत्री राजनाथ सिंह 22 जनवरी, बुधवार को यूपी के मेरठ में थे. वहां उन्होंने कहा, 'जो मुसलमान भारत का नागरिक है, उसे कोई चिमटे से भी नहीं छू सकता. अगर किसी को कोई शिकायत है, तो हमारे पास आ सकता है.'
पिछले दिनों इस कानून के विरोध में पश्चिमी यूपी में काफ़ी हिंसा हुई थी. राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी सूरत में जाति, पंथ और मजहब के आधार पर तनाव न पैदा होने दें. उन्होंने कहा कि कुछ ताक़तें चाहती हैं कि तनाव पैदा करके निहित स्वार्थ को पूरा कर लें, हमें ये नहीं होने देना है. हमें सबको साथ लेकर चलना है.
NPR, NRC और मुसलमान पर
राजनाथ सिंह ने कहा,
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क्या देश की जनसंख्या का रजिस्टर नहीं होना चाहिए? मैं आपसे पूछता हूं. ये हम लोगों ने नहीं बनाया. कांग्रेस ने 2010 में इसके बारे में फैसला किया था. ये कहते हैं कि आप नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर बना रहे हैं. फिर आप NRC लाएंगे और मुसलमानों को भारत से निकाल देंगे. मैं यहां मौजूद मुसलमानों से कहना चाहता हूं कि जो मुसलमान भारत का नागरिक है, कोई मां का लाल चिमटे से भी उसको छू नहीं पाएगा. अगर किसी को कोई शिकायत है, तो वो हमारे पास आ सकता है. हम उस मुसलमान के साथ खड़े होंगे. हम इंसानियत को लेकर राजनीति नहीं करते हैं.
'सांप्रदायिक तनाव नहीं पैदा होना चाहिए' उन्होंने कहा,There are certain forces who want to create a divide between Hindus and Muslims on the issue of CAA. These forces have vested interests in creating a rift between the communities. I appeal to everyone that communal tension on religious lines should not be created.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) January 22, 2020
जो लोग जलालत की ज़िंदगी जी रहे थे, CAA लाकर मोदी सरकार ने उन्हें नागरिकता देने का वादा पूरा किया है. हमने कोई अपराध नहीं किया, लेकिन इसे हिंदू और मुसलमान के नजरिये से देखा जा रहा है. हमारे प्रधानमंत्री धर्म के आधार पर नहीं, इंसानियत के आधार पर सोचते हैं. कुछ ताकते हैं, जो हिंदू और मुसलमानों के बीच खाई पैदा करना चाहती हैं. इनके अपने हित हैं. मैं सबसे अपील करता हूं कि सांप्रदायिक तनाव नहीं पैदा होना चाहिए.
'महात्मा गांधी ने जो कहा था वो किया' रक्षा मंत्री ने कहा,संसद के दोनो सदन पारित होने के बाद क़ानून बना करा कर प्रधानमंत्री ने दिया हुआ वादा पूरा किया है। लेकिन इसे हिंदू और मुसलमान के नज़रिए से देखा जा रहा है।
हमारा प्रधानमंत्री कभी जाति पंथ या मजहब के आधार पर नहीं सोचता है। हमारा प्रधानमंत्री इंसाफ़ और इंसानियत के आधार पर सोचता है। pic.twitter.com/uyFv58H0Nu — Rajnath Singh (@rajnathsingh) January 22, 2020
महात्मा गांधी ने कहा था कि अगर अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होता है, तो उसके प्रति भारत को संवेदनशील होना होगा. महात्मा गांधी ने जो कहा था, उसे BJP ने कर दिखाया है. कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 18 दिसंबर 2003 को कहा था- पाकिस्तान, बांग्लादेश में जिन हिंदू-सिखों का उत्पीड़न हुआ है, सरकार को उन्हें नागरिकता देनी चाहिए. जो उन्होंने कहा था, वह हमने पूरा किया. आज जगह-जगह 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' नारे लग रहे हैं. ये अधिकार किसने दिया?
'सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम में NRC हुआ' राजनाथ सिंह ने कहा,महात्मा गांधी ने भी यह कहा था कि धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं होना चाहिए। लेकिन विभाजन हो गया है तो हमें इस बात की चिंता करनी होगी कि यदि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर कोई जुल्म ढाया जाता है तो उनके प्रति हमें सम्वेदनशील रहना होगा।जो गांधीजी ने कहा था हमने उसे कर दिखाया है। pic.twitter.com/hwkgTYFq8L
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) January 22, 2020
विपक्षी दल दुष्प्रचार कर रहे हैं कि NRC लाकर देश के मुसलमानों को बाहर कर दिया जाएगा, जबकि NRC पर कहीं चर्चा भी नहीं हुई. NPR में यदि आपसे कोई नाम, जन्मतिथि पूछता है, तो जो आप देंगे, वही लिख लिया जाएगा. कोई किसी पर दबाव नहीं डाला जाएगा. NRC हमलोग भारत में लेकर नहीं आए हैं. NRC की चर्चा आजादी के समय आ गई थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से उस समय बात की थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम में NRC लागू हुआ. जो ताकतें भ्रम फैला रही हैं, उन पर ध्यान न दें.इसके अलावा उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 में चुनावी सभाओं की शुरुआत मेरठ से ही हुई थी. ये क्रांतिकारियों की धरती है और बीजेपी इसका महत्व समझती है.
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