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CJI बोबड़े बोले- देश मुश्किल दौर से गुज़र रहा, याचिकाओं से मदद नहीं मिलेगी

CAA से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.

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9 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 9 जनवरी 2020, 09:29 AM IST)
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सीएए के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिकाओं पर सुनवाई से कोर्ट ने इंकार कर दिया है.
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नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन चल रहा है. इस बीच 9 जनवरी यानी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई हुई. इस याचिका में CAA को संवैधानिक करार देने की मांग की गई. वकील विनीत ढांडा ने अपनी याचिका में  कहा कि CAA को लेकर 'अफवाहें' फैलाने वाले एक्टिविस्ट, छात्रों, मीडिया संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने की. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा,
देश अभी संकट के दौर से गुजर रहा है. ऐसे में हर किसी का लक्ष्य शांति स्थापित करना होना चाहिए. इस तरह की याचिकाओं से कोई मदद नहीं मिलेगी.
चीफ जस्टिस ने इस दौरान ये भी कहा कि हम कैसे घोषित कर सकते हैं कि संसद द्वारा पारित एक अधिनियम संवैधानिक है? हमेशा संवैधानिकता का अनुमान ही लगाया जाता है. यदि आप किसी समय कानून के छात्र रहे हैं तो आपको पता होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून CAA के खिलाफ जो भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं, उनकी सुनवाई तभी शुरू होगी जब हिंसा पूरी तरह रुक जाएगी. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, लेकिन अभी किसी भी याचिका पर सुनवाई नहीं हुई है. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई नेताओं, संगठनों ने सुप्रीम में CAA को गैर-संवैधानिक करार देने की अपील की थी. इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा था. सरकार का पक्ष मांगा था. CAA के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए बीजेपी घर-घर कैंपेन चला रही है. वहीं सीएए के समर्थन के लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया था. इसके अलावा बीजेपी के नेता रैलियां कर लोगों को सीएए के बार में बता रहे हैं. उन्हें जानकारी दे रहे हैं. वहीं दूसरी ओर सीएए के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहे हैं. नागरिकता संशोधन कानून के मुताबिक, बांग्लादेश-पाकिस्तान-अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. इस लिस्ट में मुस्लिमों का नाम नहीं है. विपक्ष समेत कई संगठन इस कानून को संविधान विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी बता रहे हैं.
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