500 और 1000 के नोट बंद हुए. कहा जाने लगा कि ये मोदी का मास्टरस्ट्रोक है. जोउन्हें आने वाले इलेक्शन में फायदा पहुंचाएगा. इसलिए पीएम मोदी ने पंजाब और यूपीमें विधानसभा इलेक्शन से पहले आनन-फानन में ये फैसला लिया है. अभी इन दोनों स्टेटमें इलेक्शन होने में वक्त है. उससे पहले सात स्टेट में उपचुनाव हुए हैं, और कुछसीटों पर नतीजे आ गए हैं, तो कुछ के आने बाकी हैं. मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसलेके बाद आ रहे इन नतीजों पर सबकी नजर है. ताकि एक पक्ष ये कह सके कि पीएम मोदी कीलहर अब भी है. क्योंकि वो ऐसे फैसले ले रहे हैं. तो दूसरा पक्ष इस फ़िराक में हैदेखो बीजेपी हार गई. मोदी का नोटबंदी का फैसला गलत है. उनका जादू ख़त्म हो गया है.तो बात ऐसी है कि अगर उपचुनाव के नतीजों को देखा जाए तो नोटबंदी का असर कहीं नहींदिखता. 4 लोकसभा और 8 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में सभी पार्टियां अपना-अपनाकिला बचाने में कामयाब नजर आईं. अगर कोई फैक्टर रहा है, तो वो मरने के बाद खाली हुईसीट पर सहानुभूति है या फिर अपना गढ़.मध्य प्रदेशयहां नेपानगर सीट पर विधानसभा और शहडोल सीट पर लोकसभा उपचुनाव हुआ. नेपानगर सीट परबीजेपी की मंजू दादू जीती हैं. शहडोल सीट पर कांग्रेस के हिमांद्री सिंह को भाजपाके ज्ञान सिंह ने हरा दिया. नेपानगर में मंजू दादू ने कांग्रेस के अंतरसिंह बर्डेको करीब 40,200 वोटों से हराया है. मंजू दादू भाजपा विधायक राजेंद्र दादू की बेटीहैं. इसी साल जून में एक कार एक्सीडेंट हुआ. और उसमें राजेंद्र दादू की मौत हो गईथी. बेटी को टिकट मिला. और जीत गईं. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, सांसद नंदकुमार सिंहचौहान ने टिकट देने पर मुहर लगाते हुए कहा था, ' मंजू बेटी को जिताना और विधायकबनाना राजेंद्र दादू को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी.' 2014 के लोकसभा चुनाव मेंशाहडोल सीट से भाजपा के दलपत सिंह परस्ते ने कांग्रेस की राजेश नंदनी सिंह कोपरास्त किया था. दलपत सिंह की मौत हो गई थी. दोनों सीटें मरने के बाद खाली हुईं.दोनों पहले से ही भाजपा के पास थीं. यहां जीत का फैक्टर काफी हद तक सहानुभूति रहा.असमयहां लखीमपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी आगे है. कांग्रेस उससे काफी पीछे है. बैथालांगसोविधानसभा सीट से भाजपा के मानसिंह रोंगपी आगे हैं. लखीमपुर लोकसभा सीट भाजपा केसर्वानंद सोनोवाल के सीएम बनने के बाद खाली हुई थी. बैथालांगसो विधानसभा सेकांग्रेस के टिकट पर पिछला चुनाव जीतने वाले डॉ. मानसिंह रोंगपी ने इस्तीफा दे दियाथा. इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए थे. यहां एक इलाका मुख्यमंत्री का है, तो दूसरापहले जो विधायक रहें, उनका है.पश्चिम बंगालतृणमूल कांग्रेस के दिब्येंदु अधिकारी, तामलुक लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में 4 लाखसे ज्यादा वोटों से जीत गए हैं. मोन्तेश्वर विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस केकैंडिडेट सैकत पांजा ने सीपीआई (एम) के मोहम्मद उस्मान गनी सरकार को हरा दिया. इसकेअलावा कूचबिहार लोकसभा सीट पर भी तृणमूल ने बढ़त बना रखी है. कूच बिहार लोकसभा सीटतृणमूल की रेणुका सिन्हा के मरने के बाद खाली हुई थी, जबकि तामलुक से सांसद सुवेंदूअधिकारी के सीएम ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में शामिल होने से सीट खाली हुई. तृणमूलके विधायक सजल पांजा के मरने पर मोंटेश्वर विधानसभा सीट खली हुई थी. तीनों सीटों परतृणमूल कांग्रेस के आगे रहने की वजह वही है जो असम और मध्य प्रदेश में बीजेपी की.यानी मरने के बाद पनपी सहानुभूति और अपना गढ़.तमिलनाडुतिरूपरंकुंदरम, तंजौर और अर्वाकुरिचि विधानसभा सीटों पर उप चुनाव हुआ. तंजौर सीट परएआईएडीएमके प्रत्याशी ने 26,483 वोटों से जीत हासिल कर ली है. अर्वाकुरिचि सीट परभी सत्ताधारी एआईएडीएमके ही आगे चल रही है. मुख्य मुकाबला एआईएडीएमके और डीएमके केबीच है.पुडुचेरीनेल्लीतोपे विधानसभा सीट से कांग्रेस कैंडिडेट और मुख्यमंत्री नारायणसामी ने जीतदर्ज कर ली है. उन्होंने एआईएडीएमके कैंडिडेट ओमशक्ति सेकार को 11 हजार 114 वोटोंसे शिकस्त दी है. कांग्रेस विधायक ए जॉन कुमार ने नारायणसामी के लिए यह सीट छोड़ीथी. नारायणसामी ने अप्रैल में चुनाव नहीं लड़ा था. कांग्रेस ने बहुमत हासिल करने केबाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था. अब अगर सीएम साहब इलेक्शन लड़ेंगे तो कौन सी जनताहोगी, जो अपने सीएम को हरा देगी. और जाहिर सी बात है पार्टी ने वही सीट खाली कराईहोगी, जिस पर ज्यादा पकड़ हो.त्रिपुराबरजाला और खोवई सीट विधानसभा उपचुनाव हुआ था. दोनों ही सीटों पर सीपीआई (एम) ने जीतदर्ज कर ली है. यहां टीएमसी ने सीपीआई (एम) के खिलाफ जबरदस्त प्रचार किया था. फिरभी टीएमसी जनता का भरोसा जीतने में नाकामयाब रही. सीपीआई (एम) की सरकार है. माकपाके उम्मीदवार झुमू सरकार ने भाजपा के शिष्टमोहन दास को बरजाला सीट पर हराया, तोखोवई में माकपा के ही बिस्वजीत दत्ता ने तृणमूल के मनोज दास को हराया. बरजाला(अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) और खोवई सीट पर कांग्रेस और तृणमूल के उम्मीदवारोंको हार का मुंह देखना पड़ा. बरजाला सीट पहले कांग्रेस के पास थी.अरुणाचल प्रदेशहायुलिआंग विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ. यहां से पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल कीपत्नी देसिंगु पुल ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा. और जीत गईं. वो कलिखो पुल कीतीसरी पत्नी हैं. कलिखो पुल ने कांग्रेस को तोड़ कर भाजपा के समर्थन से राज्य मेंसरकार बनाई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनको हटना पड़ा था.अगस्त में कमरे में मरे हुए पाए गए थे. खबर थी कि कलिखो पुल ने सुसाइड किया है.यानी यहां भी सहानुभूति फैक्टर रहा. और उसको बीजेपी ने भुनाया. कांग्रेस से नाराजगीकी वजह से ये सीट बीजेपी के खाते में आ गई.