बुलंदशहर:वीडियो में दंगाइयों के साथ पुलिस पर पत्थर फेंक रहे शख्स को सुमित बताया जा रहा है
क्या बुलंदशहर में गोली लगने से पहले पुलिस पर पत्थर फेंक रहा शख्स सुमित ही है?

परिवार की धमकी: सुमित का नाम FIR से नहीं हटाया, तो... घटना के बाद जो शुरुआती कहानी आई, वो इससे अलग थी. सुमित के परिवार का कहना था कि वो अपने एक दोस्त को छोड़ने गया था. घटना के समय घटना वाली जगह से गुजर रहा था. उसे पुलिस की गोली लगी और वो मारा गया. इसी को आधार बनाकर सुमित का परिवार सरकार पर मुआवजे का दबाव बना रहा था. उधर UP पुलिस ने मॉब लिंचिंग वाले केस में जो FIR दर्ज की है, उसमें सुमित का नाम है. आगे की जांच SIT करेगी. मगर पुलिस की शुरुआती थिअरी यही कह रही है कि सुमित भीड़ के साथ था. सुमित का परिवार कह रहा है कि वो पिछले तीन दिन से खाना नहीं खा रहे. उन्होंने धमकी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वो बिना खाए जान दे देंगे. उनकी एक मांग ये भी है कि सुमित का नाम FIR से हटाया जाए.
क्या सुमित का नाम साफ हुए बिना उसे सरकारी मदद दी जानी चाहिए? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुमित के परिवार को 10 लाख रुपये की मदद देने का ऐलान कर चुके हैं. सही तो ये होता कि सरकारी मदद देने के लिए पहले जांच खत्म होने का इंतजार किया जाता. कम से कम ये तो साफ होना चाहिए था कि सुमित दोषियों में था या निर्दोष था. अगर वो निर्दोष न हुआ, तो?Father of Sumit, who died during protests over alleged cow slaughter in #Bulandshahr
— ANI UP (@ANINewsUP) December 5, 2018
on December 3: We have been going without food since 3 days. If our demands are not met and his name is not removed from the FIR then we will continue this, even if we die at the end. pic.twitter.com/2ljxmgwIRD

ये सुमित के बारे में दिया गया मेरठ ज़ोन के ADG प्रशांत कुमार का बयान पढ़िए. प्रदेश की पुलिस सुमित को क्लीन चिट नहीं दे रही. मगर प्रदेश के मुखिया उसके परिवार को सरकारी मुआवजा दे रहे हैं.
सुबोध कुमार सिंह की हत्या के ठीक पहले का वीडियो क्या बताता है? मगर जिस वीडियो की हमने ऊपर बात की, उससे एक अलग ही कहानी सामने आ रही है. 3 मिनट 17 सेकेंड लंबा वीडियो है. इसमें हमें 'मारो-मारो' चीखती भीड़ दिखती है. वो लड़का, जिसे सुमित बताया जा रहा है भीड़ के साथ है. वो भी पत्थर फेंक रहा है. उसे गोली लगते हुए तो नहीं दिखती, मगर हल्ला जरूर सुनाई देता है कि गोली मार दी, गोली मार दी. फिर ये सुमित बताया जा रहा लड़का नज़र आता है. उसके सीने से खून निकल रहा (सुमित को भी सीने में ही गोली लगी थी). एक दूसरा लड़का उसे पकड़कर चल रहा है. लोग गाड़ी लाने की बात कर रहे हैं.

इस फ्रेम में हमको सड़के के एक ओर से भीड़ दौड़कर चौकी की तरफ आती दिखती है. इसी भीड़ के साथ वो लड़का भी है, जिसे आगे चलकर गोली लगती है.

ये फ्रेम देखिए. ये सुमित कहे जा रहे लड़के को गोली लगने के पहले का है. पीछे धुआं दिख रहा है. यानी भीड़ ने आग लगा दी थी. गोल घेरे में पुलिस के लोग सड़क पर दौड़ रहे हैं. उनके पीछे फिर एक भीड़ दौड़ती हुई आती दिखती है. सड़क पर रोड़ी-पत्थर बिखरे दिखते हैं. देखकर लगता है कि ये पुलिसकर्मी शायद भीड़ से ही बचने के लिए भाग रहे हैं.
सुमित को गोली लगने से पहले चौकी फूंक दी गई थी? ये सब होने से पहले हमको पुलिस चौकी भी दिखती है. भीड़ सड़क से आई और चौकी क्रॉस करते हुए मोबाइल का फ्रेम चौकी के पीछे वाले खेतों में पहुंच गया. एक बात तो पक्की है कि सुमित कहे जा रहे लड़के को गोली लगने से पहले ही भीड़ आगजनी कर चुकी थी. पत्थरबाजी भी शुरू हो चुकी थी. ये सारा सीक्वेंस उस घटनाक्रम से मैच करता है, जो हमें अब तक पता है. सुमित को गोली लगने के बाद एक फ्रेम में खेत के किनारे पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स भी नजर आता है. शायद ये SHO सुबोध कुमार सिंह ही हैं. लोग उनसे उनकी पिस्तौल छीनने की बात कर रहे हैं. वीडियो हिलता रहता है, मगर जो आवाजें सुनाई देती हैं उनसे मालूम पड़ता है कि इसी समय सुबोध कुमार सिंह को भी गोली मारी गई होगी.

इस फ्रेम को देखिए. सुमित बताए जा रहे इस लड़के की हाथ में पत्थर है. पत्थर इतना साफ दिख रहा है कि शक की कोई गुंजाइश नहीं है.

ये भी उसी वायरल वीडियो का एक फ्रेम है.

ये फ्रेम देखिए. सफेद टी शर्ट और खाकी पैंट पहने इस लड़के को सीने पर गोली लग गई है. साथ के लड़के उसे पकड़कर ले जा रहे हैं. गाड़ी लाने की बात हो रही है.

सुमित को गोली लगने के बाद खेत में ये शख्स दिखता है. ये चौकी के पीछे की जगह लग रही है. वही जगह, जहां SHO सुबोध को मारा गया. ये आदमी पुलिस की वर्दी में है. चेहरा साफ नहीं दिख रहा, मगर आवाज सुनाई देती है. भीड़ के लोग पिस्टल छीन लेने की बात कर रहे हैं. हमें पता है कि इंस्पेक्टर सुबोध की पिस्तौल छीन ली गई थी. इसके ठीक बाद उनकी हत्या हुई.
सुमित बताए जा रहे लड़के को गोली लगने से पहले से ही भीड़ हिंसा कर रही थी जहां तक सुमित को गोली लगने के समय की स्थितियों की बात है, तो वीडियो काफी डिस्टर्ब करता है. आपको भीड़ ईंट-पत्थर लेकर दौड़ती दिखेगी. लोग हिंसा कर रहे हैं. हमें फिलहाल जो पता है, वो यही है कि जब भीड़ हिंसा करने लगी और बेकाबू हो गई, तब पुलिस ने हवाई फायरिंग की. और इसी फायरिंग में सुमित को गोली लगी. वीडियो में सुमित बताए जा रहे लड़के को गोली लगने के पहले ही हमें भीड़ उत्पात मचाती नजर आती है. ऐसे में पुलिस की कार्रवाई को गलत नहीं ठहराया जा सकता है.
पुलिस कुछ कह रही है, बीजेपी सांसद कुछ और कह रहे हैं बुलंदशहर में बीजेपी के सांसद भोला सिंह लगातार गैर-जिम्मेदार बयान दे रहे हैं. 4 दिसंबर को उन्होंने घटना का ठीकरा मुस्लिमों के इज्तिमा कार्यक्रम पर फोड़ने की कोशिश की थी. 6 दिसंबर को भी उनका एक बयान आया. न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए भोला सिंह ने कहा-Bhola Singh, #Bulandhshar
— ANI UP (@ANINewsUP) December 6, 2018
, BJP MP: I have come across a video where a policeman is saying that protesters became violent only after police resorted to lathicharge. Why such situation arose that general public was lathicharged, rather than being made to understand the situation? pic.twitter.com/MfXQXbgznt
मैंने एक ऐसा वीडियो देखा है, जिसमें एक पुलिसवाला कह रहा है कि जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया उसके बाद ही भीड़ हिंसक हुई. ऐसी स्थिति ही क्यों पैदा हुई कि आम लोगों को शांति से बात समझाने की कोशिश करने की जगह उनपर लाठीचार्ज कराया गया?बीजेपी की सरकार में बीजेपी के नेता को इतना कन्फ्यूजन क्यों है? भोला सिंह बीजेपी के हैं. उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है. केंद्र में बीजेपी की सरकार है. पुलिस सरकार के अधीन है. पुलिस कह रही है कि भीड़ हिंसक हो रही थी, इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी. और भोला सिंह अलग ही बात कर रहे हैं. अपनी ही सरकार के शासन में चीजों की मालूमात करना और कॉर्डिनेशन बनाना सांसद के लिए इतना मुश्किल तो नहीं होना चाहिए. फिर ये अलग-अलग बातें क्यों?
बिना पूरी जांच के सुमित का नाम FIR से क्यों हटाया जाए? इन्हीं भोला सिंह ने 4 दिसंबर को सुमित के बारे में भी बयान दिया था. कि प्रशासन ने FIR में से सुमित का नाम हटाने का आश्वासन दिया है. जिला प्रशासन ने उसके परिवार को पांच लाख रुपये देने की बात कही है. भोला सिंह ने ये भी कहा कि DM के मार्फत मुख्यमंत्री के पास अपील भेजी जाएगी कि सुमित के परिवार को नौकरी दी जाए. बिना पूरी जांच के किस आधार पर एक आरोपी को क्लीन चिट दे दी जाएगी? इसलिए कि उसकी मौत हो गई है? मगर मौत कैसे हुई, ये पता लगना भी तो जरूरी है. अगर वो भीड़ के साथ था, तो वो अपराधी था. अपराधी के परिवार को सरकारी मदद कतई नहीं मिलनी चाहिए.BJP MP from #Bulandshahr
— ANI UP (@ANINewsUP) December 4, 2018
Bhola Singh: Administration has assured that Sumit’s name will be removed from the FIR. District administration has announced financial aid of Rs.5 lakhs to his family. Request for a job for a family member will be sent to CM through District Magistrate. pic.twitter.com/aP3qw7ggI8
BJP MP from #Bulandshahr
— ANI UP (@ANINewsUP) December 4, 2018
Bhola Singh: Law and order is usually good here but the police were kept in dark about this Ijtema (Islamic congregation) that happened here, it caused chaos. This is the cause of this violence. pic.twitter.com/PQDbBlGH27
बुलंदशहर की वो पुलिस चौकी, जिसमें पुलिसवालों को जलाकर मारने की कोशिश की गई
बुलंदशहर में SHO सुबोध कुमार सिंह के मारे जाने की पूरी कहानी
सुनिए क्या कह रहे हैं सुमित के घर वाले
घर वालों का आरोप बुलंदशहर में पुलिस की गोली से हुई सुमित की मौत
बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध के मर्डर का मुख्य आरोपी योगेश राज बजरंग दल से जुड़ा है

