हत्यारी भीड़ के हाथों मारे गए SHO सुबोध के बेटे की बात सुनने के लिए हिम्मत चाहिए
हर मां बाप की तरह सुबोध कुमार सिंह का भी सपना था.
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फोटो - thelallantop
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3 दिसंबर बुलंदशहर के लिए बहुत बुरा रहा. न सिर्फ शहर के लिए, पूरे देश के लिए. वहां हत्यारी भीड़ ने एक दारोगा की जान ले ली. पहले गोली मारी. फिर पीटा और गोली मारी. स्याना थाना के SHO थे सुबोध कुमार सिंह. अब वो नहीं हैं, पीछे सिर्फ परिवार बचा है. सुबोध के बेटे अभिषेक की बातें सुनिए. फिर अपने को उसके साथ खड़ा कीजिए. बदन में झुरझुरी दौड़ जाएगी.
कल से ही खबरों और खबरों के भेस में अफवाहों का दौर जारी है. कुछ जहरीले लोग पुलिस के खंडन करने के बावजूद बेशर्मी से अफवाह फैला रहे हैं. अभिषेक को उसके पिता ने ऐसा नागरिक बनाने की सोची जो धर्म के नाम पर हिंसा में न लिप्त हो. हर मां बाप की तरह वो भी उसको अच्छा इंसान बनाना चाहते थे. उसे पिता की सीख जिंदगी भर याद रह जाएगी.

पत्नी के साथ सुबोध
अभिषेक का एक और भाई है. श्रेय सिंह नाम है उसका. पूरे परिवार का बुरा हाल है. सुबोध कुमार की बहन का बयान भी सामने आया है. उन्होंने उल्टा पुलिस पर ही कॉन्स्पिरेसी का आरोप लगाया है. उनका कहना है- मेरा भाई अखलाक केस की जांच में था, इसलिए उनको मारा गया. ये पुलिस के द्वारा की गई साजिश है. उनको शहीद घोषित करना चाहिए और मेमोरियल बनना चाहिए. हमको पैसे नहीं चाहिए. सीएम सिर्फ गाय गाय करते रहते हैं.
याद कर लीजिए कि तीन साल पहले बिसाहड़ा में भी गाय को लेकर लिंचिंग हुई थी. अखलाक नाम के आदमी को भीड़ ने मार डाला था. अखलाक केस में सुबोध कुमार सिंह जांच अधिकारी थे. शुरुआती तीन महीनों तक. 28 सितंबर से 9 नवंबर 2015 तक. उन्होंने काफी सुबूत जुटा लिए थे. अखलाक के फ्रिज में गोमांस था या नहीं, इस दिशा में जांच महत्वपूर्ण मोड़ पर थी. उसी दौरान उनका तबादला वाराणसी कर दिया गया था. जांच में पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाकर. वो चार्जशीट में गवाह नंबर 7 थे. बुलंदशहर में हिंसा और SHO के मर्डर से संबंधित पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक
कीजिए.
Abhishek, son of deceased policeman Subodh Kumar Singh: My father wanted me to be a good citizen who doesn't incite violence in society in the name of religion. Today my father lost his life in this Hindu-Muslim dispute, tomorrow whose father will lose his life? #Bulandshahr
— ANI UP (@ANINewsUP) December 4, 2018
pic.twitter.com/zpFJoI4O2R
"मेरे पिता चाहते थे कि मैं देश का अच्छा नागरिक बनूं. ऐसा इंसान, जो धर्म के नाम पर समाज में हिंसा न भड़काए. आज हिंदू-मुस्लिम विवाद में मेरे पिता की जान गई. कल किसके पिता को अपनी जान गंवानी पड़ेगी?"
कल से ही खबरों और खबरों के भेस में अफवाहों का दौर जारी है. कुछ जहरीले लोग पुलिस के खंडन करने के बावजूद बेशर्मी से अफवाह फैला रहे हैं. अभिषेक को उसके पिता ने ऐसा नागरिक बनाने की सोची जो धर्म के नाम पर हिंसा में न लिप्त हो. हर मां बाप की तरह वो भी उसको अच्छा इंसान बनाना चाहते थे. उसे पिता की सीख जिंदगी भर याद रह जाएगी.

पत्नी के साथ सुबोध
अभिषेक का एक और भाई है. श्रेय सिंह नाम है उसका. पूरे परिवार का बुरा हाल है. सुबोध कुमार की बहन का बयान भी सामने आया है. उन्होंने उल्टा पुलिस पर ही कॉन्स्पिरेसी का आरोप लगाया है. उनका कहना है- मेरा भाई अखलाक केस की जांच में था, इसलिए उनको मारा गया. ये पुलिस के द्वारा की गई साजिश है. उनको शहीद घोषित करना चाहिए और मेमोरियल बनना चाहिए. हमको पैसे नहीं चाहिए. सीएम सिर्फ गाय गाय करते रहते हैं.
Sister of Policeman Subodh Singh:My brother was investigating Akhlaq case&that is why he was killed,its a conspiracy by Police.He should be declared martyr and memorial should be built. We do not want money. CM only keeps saying cow cow cow. #Bulandshahr
pic.twitter.com/ohILXKCj3w
— ANI UP (@ANINewsUP) December 4, 2018
याद कर लीजिए कि तीन साल पहले बिसाहड़ा में भी गाय को लेकर लिंचिंग हुई थी. अखलाक नाम के आदमी को भीड़ ने मार डाला था. अखलाक केस में सुबोध कुमार सिंह जांच अधिकारी थे. शुरुआती तीन महीनों तक. 28 सितंबर से 9 नवंबर 2015 तक. उन्होंने काफी सुबूत जुटा लिए थे. अखलाक के फ्रिज में गोमांस था या नहीं, इस दिशा में जांच महत्वपूर्ण मोड़ पर थी. उसी दौरान उनका तबादला वाराणसी कर दिया गया था. जांच में पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाकर. वो चार्जशीट में गवाह नंबर 7 थे. बुलंदशहर में हिंसा और SHO के मर्डर से संबंधित पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक
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