बुलंदशहर: फरार बीजेपी युवा नगर अध्यक्ष शिखर ने वीडियो में SHO सुबोध को करप्ट बताया
शिखर ने आरोप लगाया है कि इंस्पेक्टर सुबोध ने मुस्लिमों से यारी करके हमारी माताओं (गाय) पर प्रहार करवाया...
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बाईं तरफ है शिखर अग्रवाल. शिखर बुलंदशहर के स्याना में बीजेपी युवा मोर्चा का लीडर है. नगर अध्यक्ष है. SHO सुबोध कुमार सिंह की मॉब लिंचिंग वाले केस में शिखर भी आरोपी है. घटना से बाद ही वो फरार है. 6 दिसंबर को अपने एक वीडियो मेसेज अपलोड किया.
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3 दिसंबर को बुलंदशहर में मॉब लिंचिंग हुई. स्याना थाना के प्रभारी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह भीड़ के हाथों मारे गए. इस मामले में पुलिस को जिन लोगों की तलाश है, उनमें एक नाम है शिखर अग्रवाल. घटना के मुख्य आरोपी योगेश राज की ही तरह शिखर भी घटना के बाद से फरार है. अब योगेश की तरह शिखर ने भी अपना वीडियो मेसेज दिया है. इसमें वो मारे गए SHO सुबोध को भ्रष्ट बता रहा है. उन पर 'मुसलमानों के साथ यारी' करने का इल्जाम लगा रहा है. उसका कहना है कि सुबोध कुमार सिंह ने मुसलमानों के साथ मिलकर माताओं पर प्रहार करवाया. चूंकि इस वीडियो के शुरुआती हिस्से में वो गाय को माता कह चुका है, तो इससे यही लगता है कि 'माताओं पर प्रहार करवाया' का मतलब 'गाय पर प्रहार करवाया' है. यानी शिखर अग्रवाल इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह पर 'मुस्लिमों के साथ मिलकर गोकशी करवाने' का इल्जाम लगा रहा है.
वीडियो में क्या कुछ कहा है शिखर ने?
इस वीडियो को 6 दिसंबर के दिन पोस्ट किया गया. इसमें शिखर ने जो कुछ कहा है, वो आप पूरा पढ़ लीजिए-
शिखर ने जो बातें कहीं, उसके कुछ हिस्से खासतौर पर बात किए जाने लायक हैं. सबसे जरूरी चीजें हैं-

ये गोकशी वाली उस FIR की कॉपी है, जो योगेश ने लिखवाई थी. योगेश ने FIR में कुछ दोस्तों का भी नाम लिखवाया था. उसका कहना था कि इनके साथ घुमते हुए ही उसने और उसके दोस्तों ने देखा कि कुछ लोग गाय काट रहे हैं. इसमें किसी शिखर कुमार का भी नाम लिखवाया है योगेश ने. हम नहीं जानते कि शिखर कुमार और शिखर अग्रवाल, दोनों एक ही इंसान है या अलग-अलग.
सुबोध कुमार घटना वाली जगह कैसे पहुंचे? सुबोध कुमार सिंह स्याना थाने के प्रभारी थे. इसी थाने के अंदर आती है चिंगरावठी पुलिस चौकी. जब खेत के अंदर गाय का ढांचा मिलने की बात पता चली, तो स्याना थाना को खबर भेजी गई. सबसे पहले चिंगरावठी चौकी के दो सिपाहियों को मौके पर भेजा गया. इनसे भी पहले स्याना के तहसीलदार राजकुमार भास्कर मौके पर पहुंचे थे. फिर सुबोध कुमार सिंह पुलिस की गाड़ी में कुछ और साथी पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुंचे. न केवल पुलिस ने ये घटनाक्रम बताया है. बल्कि चश्मदीदों ने भी यही कहा है. 3 दिसंबर को घटना के बाद से जितनी भी मीडिया रिपोर्ट्स हमें दिखी हैं, वो यही घटनाक्रम बताती हैं. लल्लनटॉप की तरफ से हमारे साथी अविनाश खुद इसकी रिपोर्टिंग के लिए घटना वाली जगह पर गए थे. उन्होंने भी जितने लोगों से बात की, सबने यही बताया.
करप्ट वाली बात? ये जांच का मामला है. हम क्या ही कह सकते हैं इस पर.
सुबोध कुमार सिंह ने मुस्लिमों के साथ मिलकर गोकशी करवाई? ये बेहद गंभीर आरोप है. SIT इस केस की जांच कर ही रही है. मगर जांच रिपोर्ट आने से पहले जो चीजें मौजूद हैं, वो शिखर अग्रवाल के इस आरोप को हल्का करती हैं. खुद गांव के लोग खेत में मिले ढांचों पर सवाल खड़े कर रहे हैं. उनका कहना है कि किसी के खेत में गाय कट जाए और लोगों को मालूम न चले, ये संभव नहीं. फिर इस बात पर भी सवाल है कि ढांचा सबसे पहले देखा किसने. योगेश राज, जिसने कि गोकशी की रिपोर्ट लिखवाई, खुद अलग-अलग कहानी सुना चुका है. FIR में उसने लिखवाया कि वो अपने दोस्तों के साथ सुबह 9 बजे घूमने के लिए महाव के खेतों की तरफ गया था, वहां उसने सात लोगों को गाय काटते देखा, जो उन लोगों को देखकर वहां से भाग गए.

ये इस घटना से जुड़े एक वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट है. भीड़ ट्रैक्टर में गाय के अवशेष रखकर चौकी के सामने पहुंची थी. शिखर ने अपने वीडियो मेसेज में कहा है कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह गोकशी की रिपोर्ट नहीं लिखना चाहते थे. ये बात चश्मदीदों के बताए घटनाक्रम से अलग है. उनका कहना है कि पुलिस टीम के FIR दर्ज करने के बाद भी भीड़ हंगामा करती रही. कि पुलिस बार-बार कार्रवाई का आश्वासन देती रही, मगर भीड़ फिर भी मानने को राज़ी नहीं थी.
ताज़े नहीं, पुराने थे खेतों में मिले गाय के अवशेष! बाद में योगेश के परिवार ने और खुद योगेश ने अपने वीडियो मेसेज में अलग किस्सा सुनाया. ये दोनों वर्जन कहते हैं कि गोकशी हुई है, ये बताने के लिए उसके पास फोन आया था. फिर जो अवशेष मिले हैं, उनको लेकर भी शंका है. लोगों का (गांव के लोगों का भी) कहना है कि ये पुराने थे. इनका खून सूख चुका था. देखने से लग रहा था कि उनको कहीं और से लाकर वहां फेंका गया है. उस खेत के पास रहने वाले शख्स का कहना है कि 2 दिसंबर तक वहां ऐसा कुछ नहीं था. एक ऐंगल ये भी है कि ये गांव जाट और ठाकुर प्रमुख हैं. यहां मुस्लिमों के इक्के-दुक्के घर हैं. ऐसे में ये मुस्लिम परिवार दिन-दहाड़े खेतों में गाय काटने का जोखिम क्यों लेंगे? वो भी उत्तर प्रदेश का माहौल जानते हुए? फिर गांववालों का और पुलिस का ये भी कहना है कि इस इलाके से गोकशी की बात सुनने में तो नहीं आई. चिंगरावठी और महाव के कई ग्रामीणों का कहना है कि 'कुछ लोगों' ने पूरा माहौल खराब किया और हिंसा भड़काई.

ये घटना के समय बनाए गए एक वीडियो का स्क्रीनशॉट है. बाईं तरफ इस केस का मुख्य आरोपी योगेश है और दाईं तरफ इंस्पेक्टर सुबोध हैं (फोटो: आज तक)
क्या अब सुबोध की हत्या को भी सांप्रदायिक ऐंगल देने की कोशिश हो रही है? जब कथित गोकशी और खेत में मिले उन अवशेष पर इतने सवाल हैं, तो शिखर का ये कहना है कि सुबोध कुमार सिंह ने मुस्लिमों के साथ मिलकर ये गायें कटवाईं, गले से नहीं उतरता. बुलंदशहर में बीजेपी के सांसद भोला सिंह इस मामले पर सांप्रदायिक बयान दे चुके हैं. तो क्या बीजेपी का स्थानीय नेतृत्व इस घटना को सांप्रदायिक ऐंगल देने पर तुला है? शिखर भी तो बीजेपी के युवा मोर्चा का नगर अध्यक्ष है. क्या सुबोध कुमार सिंह पर 'मुस्लिमों के साथ यारी करके माताओं पर प्रहार' करवाने का इल्जाम लगाना सुबोध की छवि खराब करने की कोशिश है? ताकि लोगों को उनकी हत्या पर जो गुस्सा आया, वो खत्म हो जाए? ताकि सुबोध की हत्या भी हिंदू-मुसलमान में बंट जाए? ये जो भी चीजें हैं, उनके जवाब जल्द मिलने चाहिए. इससे पहले कि माहौल और खराब हो. इससे पहले कि लोगों को और ज्यादा भड़काने की कोशिशें कामयाब हों.
बुलंदशहर में हुई इंस्पेक्टर सुबोध सिंह और सुमित की हत्या के बाद की ग्राउंड रिपोर्ट
बुलंदशहर के खेत में गाय का सिर, चमड़ी, बीफ टांगकर क्या बड़ा दंगा करने की साजिश थी?
वीडियो में क्या कुछ कहा है शिखर ने?
इस वीडियो को 6 दिसंबर के दिन पोस्ट किया गया. इसमें शिखर ने जो कुछ कहा है, वो आप पूरा पढ़ लीजिए-
मैं भी उन लोगों के साथ वहां पहुंचा. मैंने देखा गाय माता के मृत अवशेष वहां पड़े हुए थे. जिसे ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर हम लोग चिंगरावठी पुलिस चौकी पर आने लगे. तो बीच में कोतवाल इंस्पेक्टर शहीद श्रीमान सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि ये ट्रैक्टर नहीं जाएगा. हमने कहा कि साहब, ये ट्रैक्टर तो जनता के सामने आना ही चाहिए. इसकी सत्यतता का पता लगना ही चाहिए. उन्होंने कहा कि इन अवशेषों को यहीं दबाएंगे. हमसे उनकी बहुत देर वार्ता हुई. उसके बाद हम लोग ट्रैक्टर लेकर आ गए.इतने पर शिखर का वीडियो रेंडम खत्म हो जाता है.
उप जिलाधिकारी अविनाथ चंद्र मौर्य ने मुझसे बातें करीं. मैंने उनको बताया कि कोतवाल साहब ने डायरेक्ट मुझे जान से मारने की धमकी दी कि तुझे गोली मार दूंगा और जो भी तेरे साथ आएगा, सबको गोली मार दूंगा. मैंने अविनाश चंद्र मौर्य को बताया कि वो मुझे गोली मारने की कह रहे हैं. इस बात की वीडियो भी मौजूद है, जब मैं अविनाश चंद्र जी से कह रहा था. अविनाश चंद्र जी बोले कि कोई नहीं मारेगा, तुम बेफिक्र निकल जाओ यहां से. और मेरी जिम्मेदारी है कि FIR दर्ज होगी. मैं तहरीर अविनाश चंद्र मौर्य जी के हाथों में, योगेश द्वारा लिखी गई तहरीर पकड़ाकर खुद वहां से निकल गया था.
उसके बाद जो कोतवाल सुबोध कुमार सिंह हैं, इन्होंने जान-बूझकर वहां पर, केवल कि वो मुकदमा पंजीकृत न हो माहौल को उपद्रवी कर दिया और गुंडागर्दी का माहौल पैदा कर दिया. कोतवाल सुबोध कुमार सिंह शुरू से लेकर आखिर तक वो किसी सूचना पर नहीं आए थे. शुरू से लेकर आखिर तक पूरे मुकदमे में थे. ऐसा नहीं है, जो पुलिस ने बताया है कि कोतवाल सुबोध कुमार सिंह को फोन करके बुलाया गया और तब वो वहां पर आए. ऐसा कुछ भी नहीं है. सब कुछ, पूरा प्रकरण सुबोध कुमार सिंह की मौजूदगी में हुआ है.
और मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं कि स्याना का बच्चा-बच्चा जानता है कि सुबोध कुमार सिंह कितने ज्यादा करप्ट और कैसे इंसान थे. जिन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से यारी करके हमारी माताओं पर प्रहार करवाया. बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मुझे सरकार जांच कर ले. मुझे योगी जी की सरकार पर, उत्तर प्रदेश की सरकार पर, प्रदेश सरकार पर पूर्ण रूप से भरोसा है. कि ये सरकार चाहे तो मैं दोषी हूं, तो मुझे सूली पर लटका दे. और अगर मैं दोषी न होऊं, तो मेरे साथ कुछ भी न किया जाए. कल रात पुलिस ने मेरा बदला लेने के लिए मेरा पूरा घर तोड़-फोड़ दिया. तहस-नहस कर दिया. क्या अधिकार है पुलिस को मेरा घर तोड़ने का? कौन है पुलिस? इंसान को ये समझना चाहिए, पुलिस को ये समझना चाहिए कि ये शक्तियां जनता की सेवा के लिए निहित की गई हैं. ये गुंडागर्दी फैलाने के लिए निहित नहीं की गई हैं. मैं आपसे हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि सच्चाई को...
शिखर ने जो बातें कहीं, उसके कुछ हिस्से खासतौर पर बात किए जाने लायक हैं. सबसे जरूरी चीजें हैं-
- सुबोध कुमार सिंह ने मुसलमानों के साथ यारी करके हमारी 'माताओं' यानी गायों पर प्रहार करवाया. - ये झूठ है कि सुबोध कुमार सिंह वहां फोन करके बुलाए गए थे. - शुरू से लेकर आखिर तक सुबोध कुमार सिंह वहीं मौजूद थे. पूरा प्रकरण उनके सामने हुआ. - स्याना का बच्चा-बच्चा जानता है कि सुबोध कुमार सिंह कितने करप्ट थे.इन चीजों पर क्या जानकारी है अब तक, वो पॉइंट-पॉइंट करके बताते हैं आपको.

ये गोकशी वाली उस FIR की कॉपी है, जो योगेश ने लिखवाई थी. योगेश ने FIR में कुछ दोस्तों का भी नाम लिखवाया था. उसका कहना था कि इनके साथ घुमते हुए ही उसने और उसके दोस्तों ने देखा कि कुछ लोग गाय काट रहे हैं. इसमें किसी शिखर कुमार का भी नाम लिखवाया है योगेश ने. हम नहीं जानते कि शिखर कुमार और शिखर अग्रवाल, दोनों एक ही इंसान है या अलग-अलग.
सुबोध कुमार घटना वाली जगह कैसे पहुंचे? सुबोध कुमार सिंह स्याना थाने के प्रभारी थे. इसी थाने के अंदर आती है चिंगरावठी पुलिस चौकी. जब खेत के अंदर गाय का ढांचा मिलने की बात पता चली, तो स्याना थाना को खबर भेजी गई. सबसे पहले चिंगरावठी चौकी के दो सिपाहियों को मौके पर भेजा गया. इनसे भी पहले स्याना के तहसीलदार राजकुमार भास्कर मौके पर पहुंचे थे. फिर सुबोध कुमार सिंह पुलिस की गाड़ी में कुछ और साथी पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुंचे. न केवल पुलिस ने ये घटनाक्रम बताया है. बल्कि चश्मदीदों ने भी यही कहा है. 3 दिसंबर को घटना के बाद से जितनी भी मीडिया रिपोर्ट्स हमें दिखी हैं, वो यही घटनाक्रम बताती हैं. लल्लनटॉप की तरफ से हमारे साथी अविनाश खुद इसकी रिपोर्टिंग के लिए घटना वाली जगह पर गए थे. उन्होंने भी जितने लोगों से बात की, सबने यही बताया.
करप्ट वाली बात? ये जांच का मामला है. हम क्या ही कह सकते हैं इस पर.
सुबोध कुमार सिंह ने मुस्लिमों के साथ मिलकर गोकशी करवाई? ये बेहद गंभीर आरोप है. SIT इस केस की जांच कर ही रही है. मगर जांच रिपोर्ट आने से पहले जो चीजें मौजूद हैं, वो शिखर अग्रवाल के इस आरोप को हल्का करती हैं. खुद गांव के लोग खेत में मिले ढांचों पर सवाल खड़े कर रहे हैं. उनका कहना है कि किसी के खेत में गाय कट जाए और लोगों को मालूम न चले, ये संभव नहीं. फिर इस बात पर भी सवाल है कि ढांचा सबसे पहले देखा किसने. योगेश राज, जिसने कि गोकशी की रिपोर्ट लिखवाई, खुद अलग-अलग कहानी सुना चुका है. FIR में उसने लिखवाया कि वो अपने दोस्तों के साथ सुबह 9 बजे घूमने के लिए महाव के खेतों की तरफ गया था, वहां उसने सात लोगों को गाय काटते देखा, जो उन लोगों को देखकर वहां से भाग गए.

ये इस घटना से जुड़े एक वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट है. भीड़ ट्रैक्टर में गाय के अवशेष रखकर चौकी के सामने पहुंची थी. शिखर ने अपने वीडियो मेसेज में कहा है कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह गोकशी की रिपोर्ट नहीं लिखना चाहते थे. ये बात चश्मदीदों के बताए घटनाक्रम से अलग है. उनका कहना है कि पुलिस टीम के FIR दर्ज करने के बाद भी भीड़ हंगामा करती रही. कि पुलिस बार-बार कार्रवाई का आश्वासन देती रही, मगर भीड़ फिर भी मानने को राज़ी नहीं थी.
ताज़े नहीं, पुराने थे खेतों में मिले गाय के अवशेष! बाद में योगेश के परिवार ने और खुद योगेश ने अपने वीडियो मेसेज में अलग किस्सा सुनाया. ये दोनों वर्जन कहते हैं कि गोकशी हुई है, ये बताने के लिए उसके पास फोन आया था. फिर जो अवशेष मिले हैं, उनको लेकर भी शंका है. लोगों का (गांव के लोगों का भी) कहना है कि ये पुराने थे. इनका खून सूख चुका था. देखने से लग रहा था कि उनको कहीं और से लाकर वहां फेंका गया है. उस खेत के पास रहने वाले शख्स का कहना है कि 2 दिसंबर तक वहां ऐसा कुछ नहीं था. एक ऐंगल ये भी है कि ये गांव जाट और ठाकुर प्रमुख हैं. यहां मुस्लिमों के इक्के-दुक्के घर हैं. ऐसे में ये मुस्लिम परिवार दिन-दहाड़े खेतों में गाय काटने का जोखिम क्यों लेंगे? वो भी उत्तर प्रदेश का माहौल जानते हुए? फिर गांववालों का और पुलिस का ये भी कहना है कि इस इलाके से गोकशी की बात सुनने में तो नहीं आई. चिंगरावठी और महाव के कई ग्रामीणों का कहना है कि 'कुछ लोगों' ने पूरा माहौल खराब किया और हिंसा भड़काई.

ये घटना के समय बनाए गए एक वीडियो का स्क्रीनशॉट है. बाईं तरफ इस केस का मुख्य आरोपी योगेश है और दाईं तरफ इंस्पेक्टर सुबोध हैं (फोटो: आज तक)
क्या अब सुबोध की हत्या को भी सांप्रदायिक ऐंगल देने की कोशिश हो रही है? जब कथित गोकशी और खेत में मिले उन अवशेष पर इतने सवाल हैं, तो शिखर का ये कहना है कि सुबोध कुमार सिंह ने मुस्लिमों के साथ मिलकर ये गायें कटवाईं, गले से नहीं उतरता. बुलंदशहर में बीजेपी के सांसद भोला सिंह इस मामले पर सांप्रदायिक बयान दे चुके हैं. तो क्या बीजेपी का स्थानीय नेतृत्व इस घटना को सांप्रदायिक ऐंगल देने पर तुला है? शिखर भी तो बीजेपी के युवा मोर्चा का नगर अध्यक्ष है. क्या सुबोध कुमार सिंह पर 'मुस्लिमों के साथ यारी करके माताओं पर प्रहार' करवाने का इल्जाम लगाना सुबोध की छवि खराब करने की कोशिश है? ताकि लोगों को उनकी हत्या पर जो गुस्सा आया, वो खत्म हो जाए? ताकि सुबोध की हत्या भी हिंदू-मुसलमान में बंट जाए? ये जो भी चीजें हैं, उनके जवाब जल्द मिलने चाहिए. इससे पहले कि माहौल और खराब हो. इससे पहले कि लोगों को और ज्यादा भड़काने की कोशिशें कामयाब हों.
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