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न PM की नीयत साफ है, न उनके चेले-चाटों की: मायावती

रोहित सुसाइड केस पर मायावती और स्मृति ईरानी के बीच हुई तीखी बहस. यहीं देख, पढ़ लो.

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24 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 24 फ़रवरी 2016, 12:25 PM IST)
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बजट सेशन शुरू हो चुका है. मंगलवार को सेशन का पहला दिन रहा. पर बात बजट पर छोड़कर, सारे मुद्दों पर हुई. मुद्दों और सांसदों के अंदर बहस की जित्ती कुलबुलाहट दी. सबने जी भर उड़ेल दी. मायावती और स्मृति ईरानी के बीच तो सीधी बहस हो गई. बाद में अरुण जेटली, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अनुराग ठाकुर आए. और अपने हिस्से की बात कह गई. 'शेम, शेम. बैठ जाइए.' की आवाजें भी आती रहीं. खैर आप जानिए कौन क्या खास बोल गया.

मुद्दा: रोहित वेमुला सुसाइड केस

मायावती: सरकार मामले को दबाना चाह रही है. पूरे देश में दलितों का यौन उत्पीड़न हो रहा है. सरकार की वजह से रोहित को सुसाइड करने के लिए मजबूर होना पड़ा. इससे पहले भी हैदराबाद यूनिवर्सिटी में कई दलित छात्र सुसाइड कर चुके हैं. कांग्रेस के वक्त में भी हैदराबाद यूनिवर्सिटी में कई दलित छात्रों ने खुदकुशी की थी. रोहित अंबेडकरवादी था. इसलिए सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया.  पता नहीं कैसे डरे हुए हैं. इनको सिग्नल चाहिए. लगता है आज इनको सिग्नल नहीं मिला है प्रधानमंत्री से. यानी न प्रधानमंत्री की नीयत साफ है, न उनके चेले चाटों की. इसके बाद मायावती के बोलने का वक्त खत्म हुआ. लेकिन वो बोलती रहीं. रोहित के मुद्दे पर राज्यसभा में BJP-RSS मुर्दाबाद के नारे लगे. मायावती और BSP सांसदों ने रोहित के मुद्दे पर बहस की मांग की. सरकार से जवाब मांगा. फिर सरकार की तरफ से स्मृति ईरानी बोलीं. दोनों के बीच तीखी बहस रही. स्मृति ईरानी: बहस आपको करनी है. मैं आपको जवाब देने के लिए तैयार हूं. अगर आप मेरे जवाब से संतुष्ट न हों. तो मैं आपसे और BSP के एक-एक सांसद से कहती हूं, सर कलम करके आपके चरणों में छोड़ दूंगी, अगर आप मेरे जवाब से असंतुष्ट हुए तो. विपक्ष एक मरे हुए बच्चे को राजनीतिक हथियार और रणनीति के रूप में यूज कर रही है. मायावती: मैं बस इतना चाहती हूं कि रोहित मामले में जो न्यायिक कमेटी जांच के आदेश कर दिए गए हैं. उसमें दलित को रखना है या नहीं. इसमें आपको क्या तकलीफ हो रही है. स्मृति ईरानी: इस जांच कमेटी में दलित थे. जिनके फैसले को आप स्वीकार नहीं करते. आप ये कहना चाहती हैं मायवती जी. जो जांच कमेटी बनी थी, उसमें दलित प्रोफेसर को रखा गया था. जो चीफ वॉर्डन था, वो खुद दलित है. अगर आप ये कहना चाह रही है कि एक सिटीजन, जिसको सिर्फ मायावती सर्टिफाई करेंगी, वही दलित है. फिर जोर जोर से दोनों तरफ से बोला जाने लगा. जिसे टीवी न्यूज की लेंगुएज में हंगामा कहते हैं. इससे पहले अरुण जेटली ने भी मायावती के सवालों का जवाब दिया. अरुण जेटली: बहन मायावती, हर सब्जेक्ट का जो न्याय कर सकें. वो कमेटी है. आप सरकार की ओर से जवाब सुन लें. पर फिर भी आप संतुष्ट नहीं हों तो फिर इस पर चर्चा कर लेंगे. पर पहले जवाब तो सुन लीजिए. सरकार का पक्ष भी सुन लीजिए. https://twitter.com/ANI_news/status/702412444472381440 मायावती और स्मृति की सीधी बहस यहां देखो https://www.youtube.com/watch?v=Ga-TZZbim8Y&feature=youtu.be

मुद्दा: देशद्रोह, JNU और पॉलिटिक्स

सीताराम येचुरी: सरकार देशद्रोह कानून का गलत इस्तेमाल कर रही है. अनुराग ठाकुर: राहुल गांधी ऐसी यूनिवर्सिटी जाते हैं, जिसका नाम उनके परनाना के नाम पर है. कांग्रेस वाले देशद्रोहियों का साथ देने के लिए जेएनयू तो गए. लेकिन पंपोर मुठभेड़ में शहीद हुए जवानों के घर नहीं गए. कांग्रेस सफाई दे कि वो संसद पर हमला करने वालों के साथ हैं या संसद बचाने वालों के साथ. सोनिया गांधी बताएं, अफजल गुरु आतंकी था या नहीं? क्या सोनिया ने राहुल से पूछा कि वो जेएनयू क्यों गए थे. देश विरोधी नारे लगाने वालों के साथ वो क्यों खड़े हुए थे. हम देश के टुकड़े नहीं होने देंगे. आप अफजल गुरु, संसद और लोकतंत्र किसके साथ हो? कांग्रेस की विचारधारा गांधीवादी है या माओवादी? ज्योतिरादित्य सिंधिया: एक स्टिंग ऑपरेशन में वकीलों ने ये बात कबूली थी कि पुलिस की मौजूदगी में उन्होंने कन्हैया कुमार को पीटा था. सिर्फ नारे लगाना देशद्रोह नहीं, अलग-अलग विचारधाराओं को दबाने की कोशिश की जा रही है. सरकार के मंत्री और कई बड़े नेता जेएनयू से पढ़े हुए हैं. एक तरफ सरकार बाबा साहेब का प्रचार कर रही है और दूसरी तरफ दलितों पर अत्याचार कर रही है. हमारा देश एक गुलदस्ता है, जिसमें हर धर्म और हर जाति के फूल अपनी खुशबू बिखेरते हैं. देश में इंटॉलरेंस के माहौल के हम साक्षी हैं.

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