बजट 2026 में चाबहार प्रोजेक्ट के लिए एक भी रुपया नहीं, वजह अमेरिका है?
चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान की संयुक्त परियोजना है. माना जा रहा है कि यह फैसला ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों को देखते हुए सावधानी बरतने के तौर पर लिया गया है.
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केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत ने अपनी विदेशी सहायता (ओवरसीज़ डेवलपमेंट असिस्टेंस) की नीति में बड़ा बदलाव किया है. पहली बार चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए एक भी रुपया आवंटित नहीं किया गया है. माना जा रहा है कि यह फैसला ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों को देखते हुए सावधानी बरतने के तौर पर लिया गया है.
चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान की संयुक्त परियोजना है. इसका मकसद क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार को मजबूत करना है. दोनों देश चाहते थे कि इसे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में भी शामिल किया जाए.
INSTC लगभग 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टीमोड (समुद्र, रेल और सड़क) परिवहन नेटवर्क है जो भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई को आसान बनाने के लिए बनाया जा रहा है.
इस प्रोजेक्ट के लिए भारत की भागीदारी अहम है. चाबहार ईरान के सिस्तान-बालूचिस्तान प्रांत में स्थित है और वहां भारत एक प्रमुख विकास भागीदार रहा है. लेकिन इस बार के बजट में सरकार की उदासीनता देखकर फिलहाल, चाबहार पोर्ट के विकास पर अल्प विराम लगता दिख सकता है.
पिछले कुछ वर्षों में भारत हर साल इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये अलग रखता था. हालांकि, विदेश मंत्रालय के दस्तावेज बताते हैं कि सरकार ने इस परियोजना के लिए ग्रांट रिवाइज़ करते हुए 400 करोड़ रुपये कर दी थी. लेकिन इस बार एक भी रुपया अलॉट नहीं किया गया.
पिछले सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. हालांकि भारत को चाबहार परियोजना में भागीदारी के लिए छह महीने की छूट दी गई थी. यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है. पिछले महीने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि चाबहार से जुड़े मुद्दों पर भारत अमेरिका के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है.
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि, अमेरिका की ओर से ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद भारत इस परियोजना को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है.
वीडियो: दुनियादारी: चाबहार पोर्ट को लेकर अमेरिका ने भारत को दिया बड़ा झटका, क्या-क्या नुकसान होंगे?

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