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  • Budget 2020: FM Nirmala Sitharaman announced insurance cover for bank deposits has been raised to Rs 5 lakh from Rs 1 lakh

अगर आपका बैंक डूब गया तो आपको कितने पैसे मिलेंगे? वित्त मंत्री ने बजट में बताया

वर्तमान में बैंक के डूबने पर हर ग्राहक को अधिकतम इंश्योरेंस का एक लाख रुपये ही मिलता है.

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1 फ़रवरी 2020 (अपडेटेड: 1 फ़रवरी 2020, 02:54 PM IST)
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बैंक के दिवालिया होने या डूबने पर ग्राहकों को थोड़ी और राहत मिलेगी.
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी 2020 को बजट पेश किया. बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक में जमा राशि पर इंश्योरेंस कवर एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाएगा. वर्तमान में बैंक के डूबने की स्थिति में हर ग्राहक को DICGC के माध्यम से अधिकतम एक लाख रुपये का बीमा मिलता है. अब इसे बढ़ाकर पांच लाख रुपए कर दिया गया है. अब तक क्या हैं नियम? अब तक के नियमों के मुताबिक, कोई भी बैंक अगर डूबता है, खुद को दिवालिया घोषित करता है तो ऐसे में बैंकों में जमा लोगों का पैसा फंस जाएगा. अभी बैंक जमा राशि पर हर ग्राहक को एक लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर देते हैं. इसका मतलब ये हुआ कि बैंकों के डूबने पर जमाकर्ता को इंश्योरेंस का एक लाख रुपए मिलता है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके खाते में कितने रुपए जमा हैं. हालांकि ऐसी कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आईं जिसमें ये कहा गया कि केंद्र सरकार चाहती है कि बैंकों में कस्टमर की जमाराशि की गारंटी बढ़े. एक फरवरी को बजट भाषण में वित्त मंत्री ने इसका ऐलान कर दिया. बैंकों पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा दरअसल बैंकों के घोटाले सामने आने के बाद लोगों का बैंकिंग सिस्टम से भरोसा उठता जा रहा है. पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक में जिस तरह से लोगों को खुद का पैसा निकालने से रोका गया था, उसने लोगों को इस बात पर सोचने के लिए मजबूर किया कि बैंकों में जमा उनका पैसा कितना सुरक्षित है. बैंक के कस्टमर्स परेशान हुए. दूसरे बैंक के खाताधारक भी सोचने के लिए मजबूर हुए कि भविष्य में अगर उनके साथ ऐसा हुआ तो वे क्या करेंगे. बैंक में जमाराशि की गारंटी बढ़ाने से बैंकिंग सिस्टम में लोगों का भरोसा बढ़ेगा. इससे बैंकों को भी फायदा मिलेगा. बैंकों के पास सेविंग बढ़ेगी. वे ज्यादा कर्ज दे सकेंगे. पिछले साल एक फोटो खूब वायरल हुई थी. HDFC के पासबुक पर एक मुहर लगी थी. इसमें लिखा था,
अगर बैंक किसी तरह के संकट में फंसता है तो जमाकर्ता को एक लाख रुपये ही मिलेंगे. बैंक में जमा पैसे का DICGC से इंश्योरेंस है. बैंक में किसी तरह का संकट आने पर DICGC बैंक खाताधारक को भुगतान करेगा.
तस्वीर वायरल होने के बाद HDFC ने सफाई थी दी. कहा था कि स्टैंप 22 जून, 2017 के रिजर्व बैंक के सर्कुलर के तहत लगा है. RBI के इस सर्कुलर के तहत सभी कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और पेमेंट बैंकों को यह जानकारी अपने ग्राहकों की पासबुक के पहले पेज पर देनी होगी. इसके बाद पता चला कि ये सिर्फ एक बैंक का मामला नहीं है. कोई भी बैंक अगर डूबता है, खुद को दिवालिया घोषित करता है तो ऐसे में इंश्योरेंस का सिर्फ एक लाख रुपए ही मिलेगा. हालांकि अब वित्त मंत्री ने इसे बढ़ाकर पांच लाख रुपए करने का ऐलान किया है. हालांकि भारत में अभी तक ऐसी स्थिति नहीं आई कि बैंक डूबा हो. अगर किसी बैंक को कोई परेशानी होती है तो उस बैंक को किसी दूसरे बैंक में मर्ज कर दिया जाता है. इस तरह उसे नई जिंदगी मिल जाती है. ग्राहक सुरक्षित रहता है, क्योंकि ऐसे में नया बैंक ग्राहकों के पैसे की जिम्मेदारी ले लेता है.
अर्थात: निर्मला सीतारमण के बजट के बाद केंद्र और राज्य में अर्थव्यवस्था का संघर्ष

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