शादी की छुट्टी पर जाने से 2 दिन पहले पाकिस्तान की गोली से शहीद हो गए BSF के विजय
शादी के कार्ड बंट चुके थे. फोन सुनकर मां बात सुनने से पहले ही बेहोश हो गईं.
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बाईं तरफ कॉन्स्टेबल विजय पाण्डेय की तस्वीर है. दाहिनी तरफ उनके तिलक का कार्ड.
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1997 में जे. पी. दत्ता की फिल्म आई थी. बॉर्डर. उसमें अक्षय खन्ना का कैरेक्टर सेना में होता है. सेकेंड लेफ्टिनेंट धर्मवीर भान. उनकी शादी तय होती है. पंजाब के एक पिंड (गांव) में रहने वाली कमला (पूजा भट्ट) के साथ. दोनों साथ में आम खाते हैं. गाना गाते हैं. प्यार की बातें करते हैं. और फिर एक दिन रेडियो बजता है. कि लड़ाई छिड़ गई है. छुट्टी पर गए सारे सैनिक वापस आकर ड्यूटी जॉइन करें. अक्षय खन्ना भी लौट आते हैं. और फिर एक रात जंग में उनकी जान चली जाती है. घर पर कम्मो धर्मवीर का रास्ता देखती रह जाती है. BSF के जवान विजय पाण्डेय के साथ ऐसा ही हुआ.
5 जून को छुट्टी पर जाने वाले थे, 3जून को शहीद हो गए
3 जून, 2018. जम्मू से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार से पाकिस्तान ने गोलीबारी शुरू की. ये रात के तकरीबन ढाई बजे की बात होगी. BSF के दो जवान इसकी चपेट में आकर शहीद हो गए. एक हैं असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सत्य नारायण यादव. दूसरे, कॉन्स्टेबल विजय कुमार पाण्डेय. विजय पाण्डेय की शादी होने वाली थी. 20 जून की तारीख पक्की थी. शादी के कार्ड बंट चुके थे. 5 जून से उनको छुट्टी पर जाना था. लेकिन इसके दो दिन पहले ही वो शहीद हो गए.

ये BSF के शहीद कॉन्स्टेबल की शादी का कार्ड है. 16 जून को तिलक था. 20 जून को शादी थी.
भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम को राजी हुए थे उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक सठिगवां नाम का गांव है. यहीं के रहने वाले थे विजय पाण्डेय. घर पर प्यार से लोग उनको मोनू कहा करते थे. 1992 की पैदाइश थी उनकी. 2012 में वो BSF में गए. जम्मू के अखनूर सेक्टर में परगवाल नाम का इलाका है. पाकिस्तान से लगी सीमा से सटा हुआ. इन दिनों यहीं पर पोस्टेड थे वो. 3 जून की देर रात को एकाएक जब पाकिस्तान ने संघर्षविराम तोड़ा, तो गोली विजय पाण्डेय को भी लगी. वो घायल हो गए. इलाज के लिए उन्हें अस्पताल भेजा गया. मगर रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. अभी एक हफ्ते पहले ही भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिटरी ऑपरेशन्स में समझौता हुआ था. दोनों पक्ष 2003 में हुए संघर्षविराम समझौते को मानने पर राजी हुए थे. खबर आई थी कि सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने ही अपील की थी.

ये शहीद विजय पाण्डेय की अंत्येष्टि की तस्वीरें हैं (फोटो: ANI)
उनके पिता की हालत वैसी ही है, जैसी जवान बेटे की लाश देखने वाले किसी भी पिता की होती है. हजारों पुरानी यादें. इतना बड़ा था, तो ये करता था. जैसे ये एक याद. जो उनके पिता ने बताई-
ये हैं असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सत्य नारायण यादव. 1969 में पैदा हुए. 1987 में BSF जॉइन किया. उत्तर प्रदेश में देवरिया जिला है. यहीं के रहने वाले थे.
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ये BSF के शहीद कॉन्स्टेबल की शादी का कार्ड है. 16 जून को तिलक था. 20 जून को शादी थी.
भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम को राजी हुए थे उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक सठिगवां नाम का गांव है. यहीं के रहने वाले थे विजय पाण्डेय. घर पर प्यार से लोग उनको मोनू कहा करते थे. 1992 की पैदाइश थी उनकी. 2012 में वो BSF में गए. जम्मू के अखनूर सेक्टर में परगवाल नाम का इलाका है. पाकिस्तान से लगी सीमा से सटा हुआ. इन दिनों यहीं पर पोस्टेड थे वो. 3 जून की देर रात को एकाएक जब पाकिस्तान ने संघर्षविराम तोड़ा, तो गोली विजय पाण्डेय को भी लगी. वो घायल हो गए. इलाज के लिए उन्हें अस्पताल भेजा गया. मगर रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. अभी एक हफ्ते पहले ही भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिटरी ऑपरेशन्स में समझौता हुआ था. दोनों पक्ष 2003 में हुए संघर्षविराम समझौते को मानने पर राजी हुए थे. खबर आई थी कि सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने ही अपील की थी.
जब घर पर फोन गया, तब मां सफाई कर रही थीं BSF ने जब विजय पाण्डेय के घर उनकी शहादत की खबर देने के लिए फोन किया, तब विजय की मां घर की सफाई में लगी थीं. फोन वहीं पास की अलमारी में रखा था. मां ने फोन उठाया. पूरी बात सुनने से पहले ही वो समझ गईं. कि बेटे की खबर आई है. वो बेहोश हो गईं. फोन के दूसरी तरफ BSF के अधिकारी बड़ी देर तक हेलो-हेलो कहते रहे.Fatehpur: Last rites ceremony of BSF jawan Vijay Pandey who lost his life yesterday in ceasefire violation in Jammu & Kashmir's Akhnoor sector pic.twitter.com/tWNRl3Wg2q
— ANI UP (@ANINewsUP) June 4, 2018

ये शहीद विजय पाण्डेय की अंत्येष्टि की तस्वीरें हैं (फोटो: ANI)
उनके पिता की हालत वैसी ही है, जैसी जवान बेटे की लाश देखने वाले किसी भी पिता की होती है. हजारों पुरानी यादें. इतना बड़ा था, तो ये करता था. जैसे ये एक याद. जो उनके पिता ने बताई-
विजय 10 साल का था. जैसा आम का मौसम इन दिनों है, वैसे मौसम में रोज दोपहर घर से भाग जाता. लौटता था किसी के बाग से आम तोड़कर. मां जैसे ही उसको देखती, उसके पीछे दौड़ती. नीम के पेड़ के पास मैं बैठा रहता था. वो दौड़कर आता और मेरे पीछे छुप जाता.

ये हैं असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सत्य नारायण यादव. 1969 में पैदा हुए. 1987 में BSF जॉइन किया. उत्तर प्रदेश में देवरिया जिला है. यहीं के रहने वाले थे.
Deoria: Family of BSF's Satnarayan Yadav mourns his death as his mortal remains were brought to his native village. He lost his life y'day in ceasefire violation,in Akhnoor sector. Family says, "local MLA has not visited us, request govt to arrange for education of his children." pic.twitter.com/OSrEo9ZSmN
— ANI UP (@ANINewsUP) June 4, 2018
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