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भरी अदालत में हाई कोर्ट के जज ने दिया इस्तीफा, स्पीच में बताई वजह

जज ने कहा कि वो अपने ‘आत्मसम्मान के खिलाफ’ जाकर काम नहीं कर सकते.

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Bombay High Court judge resigns in open court, says 'could not compromise on self-respect'
जस्टिस रोहित देव ने जीएन साईबाबा को रिहा करने का फैसला सुनाया था (साभार - आजतक)
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पुनीत त्रिपाठी
5 अगस्त 2023 (Updated: 5 अगस्त 2023, 11:31 AM IST)
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बॉम्बे हाई कोर्ट के एक जज ने केस की सुनवाई के दौरान ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया. जज साहब ने इस्तीफे की वजह व्यक्तिगत बताई. इस एलान के वक्त अदालत में कई वकील भी मौजूद थे. जज ने सभी वकीलों से माफी भी मांगी. उन्होंने अदालत में मौजूद बाकी लोगों को भी सॉरी कहा.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस रोहित देव ने शुक्रवार, 4 अगस्त को केस की सुनवाई के दौरान अचानक इस्तीफा दे दिया. जस्टिस देव ने बताया कि वो अपने ‘आत्मसम्मान के खिलाफ’ जाकर काम नहीं कर सकते. उन्होंने इस्तीफे की घोषणा करते हुए वकीलों से कहा,

“जो भी अदालत में मौजूद हैं, मैं आप सभी से माफी मांगता हूं. मैंने आपको डांटा क्योंकि मैं चाहता हूं कि आप सुधर जाओ. मैं आपमें से किसी को भी ठेस नहीं पहुंचाना चाहता था. आप सब मेरे लिए परिवार की तरह हैं. मुझे आपको ये बताते हुए दुख हो रहा है कि मैंने इस्तीफा दे दिया है. मैं अपने स्वाभिमान के खिलाफ काम नहीं कर सकता. आप लोग कड़ी मेहनत करें.”

जस्टिस रोहित देव के इस्तीफे के एलान के बाद उनके लिए सूचीबद्ध सभी मामलों को हटा दिया गया. कोर्ट से निकलकर जस्टिस देव मीडिया कर्मियों से कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया है.

जीएन साईबाबा को रिहा करने का आदेश दिया था

जस्टिस रोहित देव बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के उन जजों में थे, जिन्होंने 2022 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जीएन साईबाबा को माओवादी लिंक मामले में बरी किया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को निलंबित कर दिया था. इस मामले को दूसरी बेंच को सौंप दिया गया था.

हाल ही में उनका एक और फैसला विवादों में रहा. पिछले हफ्ते रोहित देव की अध्‍यक्षता में एक बेंच ने समृद्धि एक्सप्रेसवे परियोजना से जुड़ा हुआ एक फैसला सुनाया था. कोर्ट ने परियोजना पर काम करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ शुरू की गई दंडात्मक कार्रवाई को रद्द करने के महाराष्ट्र सरकार को अधिकार देने वाले एक सरकारी प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी.

जस्टिस देव को जून 2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट में जज के पद पर नियुक्त किया गया था. इससे पहले वे 2016 में महाराष्ट्र सरकार के एडवोकेट जनरल थे. हाई कोर्ट में उनका कार्यकाल दो साल बाद, दिसंबर 2025 में खत्म होने वाला था.

बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस देव की स्कूलिंग गोवा और कॉलेज की पढ़ाई नागपुर में हुई. उन्होंने 1986 में प्रैक्टिस करना शुरू किया था. फिलहाल महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस भी उनसे राय-सलाह लिया करते थे.

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