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"इंडिया सिर्फ़ हिन्दुओं के लिए है क्या?" : बॉम्बे हाई कोर्ट

नागपुर में एक एड्स जागरुकता के प्रोग्राम में हनुमान चालीसा का पाठ होने वाला था. कोर्ट ने हड़का दिया. पूछा और कोई धर्म का पाठ क्यूं नहीं?

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केतन बुकरैत
7 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 6 अप्रैल 2016, 04:31 AM IST)
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने नागपुर के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से पूछा है कि "इंडिया सिर्फ़ हिन्दुओं के लिए है क्या?" हुआ ये कि 7 अप्रैल को नागपुर में एक एड्स जागरुकता अभियान होना है. नागपुर की म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का प्लान ये था कि उस अभियान में हनुमान चालीसा का पाठ करवाया जाएगा. इसके खिलाफ़ एक PIL डाल दी गयी थी. 5 अप्रैल को बॉम्बे हाई कोर्ट उसकी सुनवाई कर रहा था. वहां बीजेपी के राज में चल रही म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को लताड़ा गया. इस जागरुकता अभियान को पोद्दारेश्वर राम मंदिर ट्रस्ट के साथ ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा "क्यूं सिर्फ हनुमान चालीसा? क़ुरान, बाइबल या कोई और धार्मिक ग्रन्थ का पाठ क्यूं नहीं? एड्स जागरुकता का हनुमान चालीसा से क्या सम्बन्ध हो सकता है? क्या हनुमान चालीसा के पाठ से ऐसी भयानक बीमारियां सही की जा सकती हैं?" बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में जस्टिस भूषण गवई और स्वप्ना जोशी ने ये फैसला दिया. जजों ने केस को तब बंद किया जब नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और आयोजन करने वाले दयाशंकर तिवारी एड्स जागरुकता कार्यक्रम और हनुमान चालीसा का पाठ अलग अलग जगहों पर करवाने को राज़ी हुए. इस पीआईएल को दायर करने वाले थे जनार्दन मून. साथ ही कोर्ट ने साफ़ तरीके से कहा है कि दोनों प्रोग्रामों में कम से कम एक घंटे का गैप होना चाहिए. साथ ही दोनों प्रोग्रामों के अलग-अलग बैनर होंगे जिनपर आयोजन करने वालों के नाम साफ़ साफ़ लिखे होंगे. और एड्स जागरुकता अभियान के प्रोग्राम के विज्ञापन में किसी भी सूरत में हनुमान चालीसा का नाम नहीं आना चाहिए.

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