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पांच राज्य गंवाने के बाद भाजपा के लिए अच्छी ख़बर आई है

हरियाणा में हुए चुनावों में बीजेपी ने क्लीन स्वीप कर दिया है.

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20 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 20 दिसंबर 2018, 09:06 AM IST)
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बीजेपी के पांचों मेयर कैंडिडेट्स जीतने पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खुश दिखे.
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5 राज्यों में चुनाव हारने के बाद बीजेपी के लिए हरियाणा से एक खुशखबरी आई है. हरियाणा में हुए 5 नगर निगमों के चुनाव में मेयर के पद बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की है. पानीपत, करनाल, हिसार, यमुनानगर और रोहतक नगर निगमों में बीजेपी ने कांग्रेस समर्थित और इनेलो-भाजपा गठबंधन के उम्मीद्वारों को हराया है.  इसके अलावा पार्षद की 110 सीटों में से 63 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की. हालांकि इन चुनावों में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे. कांग्रेस ने उम्मीदवारों का बाहर से समर्थन किया था. इंडियन नेशनल लोकदल और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन कर ये चुनाव लड़ी थी. आइए देखते हैं किस नगर निगम में कौन बना मेयर.   पानीपत:                                                                        वोट मिले विजेता- अवनीत कौर (बीजेपी)                                     1,26,321 विरोधी- अंशु पाहवा (कांग्रेस समर्थित निर्दलीय)                    51,381 जीत का अंतर-  74940 करनाल: विजेता- रेणू बाला (बीजेपी)                                              69,960 विरोधी-आशा वधवा(इनेलो समर्थित)                                   60,612 जीत का अंतर- 9348 रोहतक: विजेता- मनमोहन गोयल (बीजेपी)                                  65,822 विरोधी- सीताराम सचदेवा (कांग्रेस समर्थित)                     51,046 जीत का अंतर- 14,776 यमुनानगर: विजेता- मदन चौहान (बीजेपी)                                        91,642 विरोधी- राकेश काका (कांग्रेस समर्थित)                            50, 964 जीत का अंतर- 40, 678 हिसार: गौतम सरदाना (बीजेपी)                                                68, 196 विरोधी- रेखा एरन (कांग्रेस समर्थित)                                40, 105 जीत का अंतर- 28, 091 ये खबर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के लिए राहत लाई है. क्योंकि विरोधी लगातार उन पर कमजोर सीएम होने का आरोप लगाते रहे हैं. बार-बार ये बात कही जा रही थी कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की ही तरह हरियाणा की जनता भी खट्टर के कामकाज से खुश नहीं है. सरकारी कर्मचारी भी इस दौरान रह-रहकर प्रदर्शन करते रहे. ऐसे में पांच के पांच बड़े शहरों के नगर निगम में एकतरफा जीत बीजेपी के लिए उम्मीद लेकर आई है.

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