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BJP जल्दी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव चाहती है, लेकिन ऐसा हो क्यों नहीं पा रहा?

बीजेपी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने की दिशा में आगे बढ़ रही है, मगर अब तक 12 राज्यों में ही पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति हो पाई है. इस स्थिति में जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के चयन में वक्त लगता दिख रहा है.

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BJP President
2024 में जेपी नड्डा के कार्यकाल को एक्सटेंशन दिया गया था. (फाइल फोटो- PTI)
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सौरभ
7 मार्च 2025 (पब्लिश्ड: 05:55 PM IST)
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बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने में फिलहाल वक्त लगता दिख रहा है. 2025 की शुरुआत से ऐसा कहा जा रहा था कि मार्च महीने तक जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी का चयन हो सकता है, मगर अब इसकी संभावना ना के बराबर है. माना जा रहा है कि यह देरी बीजेपी के संगठनात्मक चुनावों के टलने की वजह से हो रही है. राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले कम से कम आधे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव पूरा होना जरूरी है. लेकिन अभी तक ऐसा संभव नहीं हो पाया है.

बीजेपी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने की दिशा में आगे बढ़ रही है, मगर अब तक 12 राज्यों में ही पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति हो पाई है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने लल्लनटॉप से बात करते हुए बताया,

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केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा फिलहाल पार्टी अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने 2019 में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में यह जिम्मेदारी संभाली थी और जनवरी 2020 में सर्वसम्मति से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुने गए थे. उन्होंने अमित शाह से यह पदभार ग्रहण किया था.

बीजेपी के संविधान के अनुसार, पार्टी को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने से पहले कम से कम आधे राज्यों में अध्यक्ष नियुक्त करने होते हैं, यानी कुल 18 प्रदेश अध्यक्ष होने जरूरी हैं. लेकिन इससे भी पहले, बूथ, मंडल और जिला स्तर पर चुनाव कराए जाते हैं. पार्टी के सूत्रों का कहना है कि निचले स्तर पर नियुक्तियां लगभग कर ली गई हैं. लेकिन कई बड़े राज्यों में जिला स्तर पर अध्यक्षों को लेकर माथापच्ची चल रही है. और प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सहमति नहीं बन पाई है.

बीजेपी ने 12 छोटे-बड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी संगठनात्मक चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली है. इनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, चंडीगढ़, गोवा, जम्मू-कश्मीर, लक्षद्वीप, लद्दाख, मेघालय और नागालैंड शामिल हैं. लेकिन यूपी, एमपी, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा में अभी खींचतान चल रही है.

ताज़ा अपडेट की बात करें तो मध्य प्रदेश में वीडी शर्मा ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है, लेकिन जिला अध्यक्ष के चुने जाने के बावजूद पार्टी अब तक उनके उत्तराधिकारी पर निर्णय नहीं ले पाई है. वहीं उत्तर प्रदेश में अभी जिलाध्यक्षों के चुनाव के नतीजे घोषित नहीं हुए हैं. उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने लल्लनटॉप को बताया,

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झारखंड में संगठनात्मक चुनाव पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हो गए थे और मार्च के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. द प्रिंट की खबर के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने हाल ही में दिल्ली में जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है.

पश्चिम बंगाल में सुकांत मजूमदार के केंद्र सरकार में शामिल होने के बाद वहां भी नए अध्यक्ष के लिए चुनाव होना है. लेकिन पार्टी की खेमेबाजी की वजह से केंद्रीय नेतृत्व निर्णय नहीं ले पा रहा है. प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पुराने नेताओं और टीएमसी से बीजेपी में आए सुवेंदु अधिकारी के बीच तनातनी एक और बड़ी चुनौती बनी हुई है. पश्चिम बीजेपी और RSS के पदाधिकारियों के बीच भी इस विषय पर वार्ता हुई है. लेकिन अभी तक सहमति नहीं बन पाई है.

इन चुनावों में देरी का एक कारण दिल्ली चुनाव भी बताया जा रहा है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी ने पूरी ताकत दिल्ली में झोंक दी थी जिसकी वजह से कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई.

हिंदी पट्टी का एक मात्र राज्य जहां प्रदेश अध्यक्ष प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वह राजस्थान है. वर्तमान अध्यक्ष मदन राठौड़ को दोबारा अध्यक्ष चुना गया है. दक्षिण की बात करें तो केरल और तमिलनाडु में अगले साल प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव होने हैं. तेलंगाना में जिला स्तर पर चुनाव हो चुके हैं लेकिन प्रदेश अध्यक्ष अभी तक नहीं चुना गया है. और कर्नाटक में कुछ वैसा ही हाल है जैसा पश्चिम बंगाल में है.

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