नरेंद्र मोदी के अब तक किए गए तमाम फैसलों में ‘हाथी के पांव’ जैसा भारी-भरकम जोफैसला था वो था नोटबंदी. इस इकलौते फैसले ने समूचे भारत को हकबका के रख दिया. पूरीजनता दो हिस्से में बंट गई. समर्थन करने वाले और विरोध करने वाले समान मात्रा मेंनज़र आने लगे. कई बार तो ये भी हुआ कि जिनसे समर्थन की उम्मीद थी वो विरोधी ख़ेमे मेंनज़र आए और जिनके मुंह की तरफ इस उम्मीद से ताका कि ये गरियाएंगे वो कसीदे पढ़ने लगे.कुल मिलाकर ढेर सारी उथल-पुथल और शंका-आशंकाओं का माहौल रहा भारत में. अब भी है.नोटबंदी के बाद से पहले चुनाव आ गए हैं. जनता का रुख भांपने का पहला मौका. और वो भीयूपी-पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के चुनाव. तमाम सर्वे में नोटबंदी के बारे मेंरायशुमारी होने के बाद और दुनियाभर के विद्वानों की पक्ष-विपक्ष में राय आने के बादये पहला मौका होगा जब असल में पता चलेगा कि क्या इसे जनता ने पसंद किया? ऐसे मेंमोदी सरकार का सीना धुक-धुक करता हो तो कोई बड़ी बात नहीं. एग्जाम में लंबी सी आंसरशीट लिखकर उन्होंने सबमिट कर दी है. अब बस परीक्षकों की मुहर का इंतज़ार है. नोटबंदीजलता अंगारा हो गई है. भाजपा के अपने लोग भी इसे छूते डर रहे हैं. एक ऐसा हीदिलचस्प किस्सा पंजाब से आया है. पंजाब के अमृतसर नॉर्थ विधानसभा से भाजपा मेंमंत्री रह चुके और फिर से चुनाव लड़ रहे अनिल जोशी ने एक जनसभा में कहा कि, “जनतामुझे नोटबंदी की सज़ा न दे. इसकी प्लानिंग प्रधानमंत्री मोदी की थी.” यहां महावीरएन्क्लेव में एक सभा में अनिल जोशी ने अपना ये डर बयान किया कि नोटबंदी के फैसले काखामियाज़ा उनको भुगतना पड़ सकता है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक जोशी नेअपने कार्यकर्ताओं से कहा, "मेरा कार्यकाल पूरा हो गया है. अब ये अगला एक महीनातुम्हारा है. बाहर जाओ और लोगों को कंवीन्स करो कि वो मुझे वोट दें. कुछ लोग आपसेकहेंगे कि वो नोटबंदी की वजह से गुस्से में हैं. उनसे कहना अनिल जोशी का इसमें कोईरोल नहीं है." सूत्रों की अगर माने तो पंजाब विधानसभा चुनावों में भारतीय जनतापार्टी की हालत खस्ता बताई जा रही है. ऐसे में भाजपा मंत्री का यूं डरना एक तरह सेइस बात को मोहरबंद ही करता है कि पंजाब में भाजपा का सीन कुछ बन नहीं रहा. तभी तोमंत्री रह चुका शख्स भी घबराया हुआ है. भाजपा प्रत्याशी इस बात को भांप रहे हैं भलेही नोटबंदी का कितना ही गुणगान सरकार कर लें, उस पर जनादेश अभी कहीं से भी आया नहींहै. ये पहली बार होगा जब तमाम स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ ये मुद्दा भी केंद्र मेंरहेगा. अगर एटीएम की लाइनों से परेशान और काले धन की गैर-बरामदगी से हैरान जनता सबकसिखाने पर उतारू हो गई तो परिणाम नेगेटिव ही आएगा इसका एहसास और किसी को हो न होनेता-बिरादरी को ज़रूर है. दिलचस्प हो रहा है ये वाला महासंग्राम. क्या होगा येजानने के लिए 11 मार्च तक इंतज़ार करते हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िएपंजाब का ये सर्वे केजरीवाल के बारे में अनोखी बात बता रहा हैपंजाब चुनाव: इन लोगों के हाथ में है बीजेपी की नैय्यादिल्ली के अपने विधायक को पंजाब में चुनाव लड़ाने ले जा रहे केजरीवाल