गुरुवार के दिन मध्य प्रदेश में एक गमी हो गई. विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सत्यदेवकटारे गुजर गए. तो बीजेपी के नेशनल चीफ सेक्रेटरी और मध्य प्रदेश के बड़े नेताकैलाश विजयवर्गीय ने ये तस्वीर ट्वीट की है, जो सबसे ऊपर दिख आए हो. मानेविधानसभा की बिल्डिंग और फेंगशुई माने उसके वास्तुदोष पर इल्जाम लगाए हैं. उसकेपीछे लॉजिक भी है न. 14वीं विधानसभा सन 2013 से चली. जब शिवराज चौहान तीसरी बारसीएम बनकर आए. तब से 6 विधायक मर चुके हैं. प्रभात पांडे, राजेश यादव, सज्जन सिंह,तुकोजीराव पवार, राजेंद्र सिंह दादू और अब सत्यदेव कटारे. सन 96 में इस बिल्डिंगमें विधानसभा लगनी शुरू हुई. तब से इन 6 के अलावा 23 विधायक मर चुके हैं. है नसीरियस बात. इसके पहले मिंटो हॉल में विधानसभा लगती था. ये बिल्डिंग आर्किटेक्टचार्ल्स कोरिया ने डिजाइन किया था. ये तो हुई खबर. अब इस बुद्धिदोष के बारे में बातहो जाए, जो वास्तुदोष के ऊपर दोष मढ़ रहा है इन मौतों का. एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदीडिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और टापम टाप टेक्नॉलजी की बात करते जा रहे हैं. सारायुद्ध तकनीक के सहारे लड़ा जा रहा है. फेसबुक और ट्विटर पर. और उसी ट्विटर पर उनकीही पार्टी के नेता ढपोरशंखी अंधविश्वास वाली बातें पोस्ट कर रहे हैं. विडंबना कहांमुंह छिपाए, कुएं में ही भांग पड़ी है.नेताओं में पसरे अंधविश्वासउज्जैन में महाकाल से पंगा न लेनाबात मध्य प्रदेश से ही शुरू करें. एक कहानी तो ऊपर पढ़ ही चुके. दूसरी ये लो.उज्जैन है न, जहां इस साल सिंहस्थ कुंभ हुआ था. वहां सीएम शिवराज भी पहुंचे.पूजा-पाठ किए और रात 9 बजे से पहले उज्जैन छोड़ दिया. देवास चले गए. पूछो ये कौनबात हुई. तो बात है. कोई सीएम उज्जैन में रात 9 बजे के बाद नहीं रुकता. कहते हैंवहां के राजा महाकाल हैं. और कोई उनके यहां शान-पट्टी कर आए तो वो उसे कुर्सी सेउतार देते हैं. मध्य प्रदेश में एक जगह है अशोकनगर. कोई मुख्यमंत्री वहां नहीं जायाकरता था. कहते हैं 1975 में प्रकाशचंद्र सेठे गए थे, उनकी कुर्सी चली गई. श्यामाचरणशुक्ला 1977 में एक तालाब के उद्घाटन में आए, उनकी कुर्सी चली गई. फिर वीरेंद्रसकलेचा से लेकर अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह तक वहां आए और अगले चुनावों में सबकीकुर्सी चली गई. लेकिन उस जगह का दोष थोड़े है. जानी थी तो गई.नोएडा से उचित दूरी बहुत जरूरीआगे बढ़ो पड़ोस में. उत्तर प्रदेश के सीएम साहब. वो कभी नोएडा नहीं आते. डर रहता हैकि चीफ मिनिस्टरी चली जाएगी. पिछले साल किसी एक्सप्रेस वे के उद्घाटन में पीएम मोदीऔर सीएम अखिलेश यादव को एक मंच पर आना था. वेन्यू रखा गया था नोएडा. मोदी पहुंचे.अखिलेश यादव नहीं आए. उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई नोएडा बॉर्डर पर चू गई.बद्रीनाथ में हेलीकॉप्टर बैननेशनल लेवल पर बात करो अब. ऐसा मानते हैं कि जो नेता बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर से जाताहै, उसके हाथ से अगले टर्न में सत्ता चली जाती है. अमित शाह भी इस साल वहां गएलेकिन कार से. उसकी वजह ये है कि वो नहीं चाहते थे कि उनकी कुर्सी चली जाए. अमितशाह के पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी जब वहां गए थे तो हेलीकॉप्टर की बजाय कारसे गए थे. गोविन्दघाट तक उड़कर आए थे, फिर कार से गए. वजह वही कि हेलीकॉप्टर सेजाएंगे तो कुर्सी छिन जाएगी. कहते तो ये भी हैं कि भगवान के मंदिर के ऊपर से कोई भीमंत्री उड़ता है, उसे भगवान दंड देते हैं. उनके सामने जो शोशेबाजी करता है उसको जमीनपर ला पटकते हैं. उनके आगे सबको सादगी से जाना चाहिए. टिहरी के राजा भी वहां जातेथे, तो उन्हें कुष्ठ हो गया था. ऐसा लोग कहते हैं. इसके पहले इंदिरा गांधी, राजीवगांधी, एनडी तिवारी, वीर बहादुर सिंह, रमेश पोखरियाल, यूपी के राज्यपाल सूरजभान,मोतीलाल वोरा, रोमेश भंडारी और लालकृष्ण आडवाणी वगैरह भी वहां हेलिकॉप्टर से गए थे.बकैतों का कहना है कि वहां हेलीकॉप्टर से जाने के कारण सबकी कुर्सी चली गई. जैसा किकहते हैं कि बद्रीनाथ सबके नाथ हैं, उनके सामने ऐश्वर्य लेकर नहीं जाना चाहिए, नहींतो वो छीन लेते हैं. तो क्या कार सो कॉल्ड ‘ऐश्वर्य’ में नहीं आएगी. कुछ लोगों केलिए कार भी लक्जरी है, मेरी तो ड्रीम बाइक भी स्प्लेंडर है. भगवान अगर हेलीकॉप्टरसे बुरा मान जाते हैं, तो कार से भी मान सकते हैं. ये कब तय हो गया कि कार ऐश्वर्यका पैरामीटर नहीं है? कार से काहे जाएंगे, साइकल से जाएं. हम तो कहते हैं. पूरापैदल चले जाएं. हेलीकॉप्टर से ऑफेंड होकर कुर्सी छीनने वाले भगवान कार भी छीनलेंगे, तब तो आप लोकसभा-विधानसभा का क्या प्रधानी का चुनाव भी न जीत पाएंगे. लेकिनमौत के बारे में ज्यादा दिमाग लगाने की मनाही है. इमोशनल मामला है न. फिर भी इतनीगुंजाइश तो होनी चाहिए कि उस पर ढपोरशंखों वाली बात न कहें.