क्या MP में एक वोट से हार गया ये BJP कैंडिडेट?
नोटा का हवाला दिया जा रहा है, जिसे 1510 वोट मिले. लेकिन उस कैंडिडेट का असली रिजल्ट तो जान लीजिए...
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एक वक्त काउंटिंग में ये हाल था.
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क्या मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक उम्मीदवार बस एक वोट से जीता है? सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक पोस्ट में यही दावा किया जा रहा है.
क्या है इस वायरल पोस्ट में? इलेक्शन कमिशन, यानी चुनाव आयोग की ऑफिशल वेबसाइट का एक स्क्रीनशॉट है. ये विधानसभा क्षेत्रों के मुताबिक रिज़ल्ट जानने वाला पेज है. इसमें उम्मीदवारों की लिस्ट में सबसे ऊपर है के के सिंह कालूखेड़ा का नाम. ये कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. वोट वाले खाने में इनके नाम पर 61,906 वोट दर्ज़ हैं. इनसे ठीक नीचे हैं राजेंद्र पाण्डेय उर्फ़ राजू भैया. ये बीजेपी के प्रत्याशी हैं. इन्हें मिले हैं 61,905 वोट. इस स्क्रीनशॉट के साथ कई तरह के मेसेज चल रहे हैं.

इस स्क्रीनशॉट के साथ कई तरह के मेसेज शेयर हो रहे हैं. कहीं ये लिखा जा रहा है जीत का अंतर एक सीट है, जबकि नोटा पर इतने वोट पड़े हैं. कई मेसेज ऐसे हैं, जिसमें लोग ये केस बताकर एक-एक वोट की अहमियत समझा रहे हैं औरों को.

ये एक और सैंपल देखिए.

इस मेसेज का मतलब क्या है? एक ही स्क्रीनशॉट से अलग-अलग इमोशन के मेसेज चल रहे हैं. किसी में लिखा है कि देखो, मध्य प्रदेश में बीजेपी उम्मीदवार बस एक वोट से हार गया. जबकि NOTA (यानी किसी उम्मीदवार को वोट नहीं) वाले ऑप्शन पर 1,462 मत गए हैं. ये मेसेज शेयर करने वाले ज़्यादातर लोगों का अंदाज़ ये है कि अगर एक वोट से उम्मीदवार जीता है और नोटा को इतने सारे वोट मिले हैं, तो इसका मतलब कि जीतने वाले की जीत बेमानी है. कुछ ने यूं लिखा है कि एक-एक वोट कितनी अहमियत रखता है. एक वोट से कोई जीत सकता है, कोई हार सकता है. मोरल ऑफ द मेसेज ये है कि सबको वोट डालना चाहिए. वोट की वैल्यू समझनी चाहिए.

ये स्क्रीनशॉट मध्य प्रदेश की जावरा सीट का नतीज़ा कहकर शेयर किया जा रहा है.

इसके मुताबिक, कालूखेड़ा बस एक वोट से चुनाव जीत गए हैं. ये एक वोट से जीतने वाली बात के साथ-साथ ये भी देखना चाहिए कि चुनाव सच में कौन जीता है.
असलियत क्या है? ये जो स्क्रीनशॉट घूम रहा है, वो फाइनल रिज़ल्ट नहीं है. 11 दिसंबर को शाम के चार-पांच बजे के करीब का है. उस समय इन दोनों प्रत्याशियों के बीच एक वोट का ही अंतर दिखाया जा रहा था. फिर छह बजते-बजते चुनाव आयोग की वेबसाइट अपडेट हुई और ये अंतर बढ़कर 469 के करीब दिखने लगा. जो स्क्रीनशॉट चल रहे हैं, उनको ग़ौर से देखिए. सबसे नीचे 'लास्ट अपडेटेड' लिखा हुआ है. मतलब जिस समय स्क्रीनशॉट लिया गया, उस समय आखिरी बार इतने बजे वेबसाइट अपडेट की गई. किसी स्क्रीनशॉट पर 11 दिसंबर की शाम 04:46 बजे का टाइम दिखता है. किसी पर शाम 05:02 बजे का. सारे स्क्रीनशॉट उसी समय के आस-पास लिए गए हैं, जिसकी बात हमने ऊपर बताई.

ये नीचे लाल घेरे में देखिए. ये 11 दिसंबर की शाम को लिया गया स्क्रीनशॉट है. उस समय तक तो फाइनल रिज़ल्ट आया भी नहीं था.

दो स्क्रीनशॉट चल रहे हैं. एक पौने पांच बजे शाम का. दूसरा शाम 05.02 मिनट का.
मामला क्यों लंबा खिंचा? बीजेपी ये सीट जीत गई है. जीत के ऐलान से पहले थोड़ा मामला भी फंसा. हुआ ये कि एक EVM के वोट मैच नहीं हो रहे थे. तो उसको आखिरी राउंड में गिना गया. जहां तक पता है, तो ये मॉक पोल को डिलीट नहीं किए जाने की वजह से हुआ था. EVM ठीक से काम कर रही है या नहीं, इसका भरोसा दिलाने के लिए चुनाव आयोग पहले प्रत्याशियों के आगे झूठ-मूठ पोलिंग करवाता है. इसको मॉक पोल कहते हैं. ये वाला डेटा EVM में दर्ज़ रहता है, जिसे असली मतदान शुरू होने से पहले पोलिंग ऑफिसर डिलीट करता है. कई बार ऐसा भी होता है कि पोलिंग अफसर डिलीट करना भूल जाता है. तब वोटिंग के आंकड़े (जो कि हाथ के हाथ पोलिंग बूथ पर रजिस्टर किए जाते हैं) और EVM मशीन में डले वोटों की संख्या मेल नहीं खाती. जिन ईवीएम मशीनों में ये गड़बड़ी आई थी, उन्हें आखिरी राउंड में दोबारा गिना गया. VVPAT पर्ची के साथ मैच करके सही वोट संख्या मालूम की गई.

ये रहा फाइनल रिज़ल्ट. राजू भैया 511 वोटों से जीते. हालांकि नोटा में इससे करीब तीन गुना वोट ज़्यादा पड़े.
फाइनल रिज़ल्ट क्या रहा? इसके अलावा ये बात भी थी कि वोटों का अंतर इतना कम था, तो हारने वाले उम्मीदवार ने दोबारा गिनती करवाने की बात की. मगर चुनाव आयोग ने पहले ही ऐसा इंतज़ाम किया था कि रिकाउंटिंग की नौबत न आए. हर राउंड की गिनती के बाद उस राउंड के वोटों का ऐलान करवाया जा रहा था. फिर सारे ही प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट दिए जा रहे थे. सबसे हाथ के हाथ पूछा जा रहा था कि उनको कोई दिक्कत तो नहीं है, कोई शंका तो नहीं है. फिर पूरे इत्मीनान के बाद, सबकी सहमति लेकर अगले राउंड की गिनती चालू करवाई जा रही थी. जहां पर क्लोज फाइट थी, उन सीटों पर दबाव ज़्यादा था. ये ही सारी चीजें थीं, जिनके कारण कई सीटों पर रिज़ल्ट फंसा हुआ था. जावरा सीट पर फाइनल वोटों की हालत ये रही-
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क्या है इस वायरल पोस्ट में? इलेक्शन कमिशन, यानी चुनाव आयोग की ऑफिशल वेबसाइट का एक स्क्रीनशॉट है. ये विधानसभा क्षेत्रों के मुताबिक रिज़ल्ट जानने वाला पेज है. इसमें उम्मीदवारों की लिस्ट में सबसे ऊपर है के के सिंह कालूखेड़ा का नाम. ये कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. वोट वाले खाने में इनके नाम पर 61,906 वोट दर्ज़ हैं. इनसे ठीक नीचे हैं राजेंद्र पाण्डेय उर्फ़ राजू भैया. ये बीजेपी के प्रत्याशी हैं. इन्हें मिले हैं 61,905 वोट. इस स्क्रीनशॉट के साथ कई तरह के मेसेज चल रहे हैं.

इस स्क्रीनशॉट के साथ कई तरह के मेसेज शेयर हो रहे हैं. कहीं ये लिखा जा रहा है जीत का अंतर एक सीट है, जबकि नोटा पर इतने वोट पड़े हैं. कई मेसेज ऐसे हैं, जिसमें लोग ये केस बताकर एक-एक वोट की अहमियत समझा रहे हैं औरों को.

ये एक और सैंपल देखिए.

इस मेसेज का मतलब क्या है? एक ही स्क्रीनशॉट से अलग-अलग इमोशन के मेसेज चल रहे हैं. किसी में लिखा है कि देखो, मध्य प्रदेश में बीजेपी उम्मीदवार बस एक वोट से हार गया. जबकि NOTA (यानी किसी उम्मीदवार को वोट नहीं) वाले ऑप्शन पर 1,462 मत गए हैं. ये मेसेज शेयर करने वाले ज़्यादातर लोगों का अंदाज़ ये है कि अगर एक वोट से उम्मीदवार जीता है और नोटा को इतने सारे वोट मिले हैं, तो इसका मतलब कि जीतने वाले की जीत बेमानी है. कुछ ने यूं लिखा है कि एक-एक वोट कितनी अहमियत रखता है. एक वोट से कोई जीत सकता है, कोई हार सकता है. मोरल ऑफ द मेसेज ये है कि सबको वोट डालना चाहिए. वोट की वैल्यू समझनी चाहिए.

ये स्क्रीनशॉट मध्य प्रदेश की जावरा सीट का नतीज़ा कहकर शेयर किया जा रहा है.

इसके मुताबिक, कालूखेड़ा बस एक वोट से चुनाव जीत गए हैं. ये एक वोट से जीतने वाली बात के साथ-साथ ये भी देखना चाहिए कि चुनाव सच में कौन जीता है.
असलियत क्या है? ये जो स्क्रीनशॉट घूम रहा है, वो फाइनल रिज़ल्ट नहीं है. 11 दिसंबर को शाम के चार-पांच बजे के करीब का है. उस समय इन दोनों प्रत्याशियों के बीच एक वोट का ही अंतर दिखाया जा रहा था. फिर छह बजते-बजते चुनाव आयोग की वेबसाइट अपडेट हुई और ये अंतर बढ़कर 469 के करीब दिखने लगा. जो स्क्रीनशॉट चल रहे हैं, उनको ग़ौर से देखिए. सबसे नीचे 'लास्ट अपडेटेड' लिखा हुआ है. मतलब जिस समय स्क्रीनशॉट लिया गया, उस समय आखिरी बार इतने बजे वेबसाइट अपडेट की गई. किसी स्क्रीनशॉट पर 11 दिसंबर की शाम 04:46 बजे का टाइम दिखता है. किसी पर शाम 05:02 बजे का. सारे स्क्रीनशॉट उसी समय के आस-पास लिए गए हैं, जिसकी बात हमने ऊपर बताई.

ये नीचे लाल घेरे में देखिए. ये 11 दिसंबर की शाम को लिया गया स्क्रीनशॉट है. उस समय तक तो फाइनल रिज़ल्ट आया भी नहीं था.

दो स्क्रीनशॉट चल रहे हैं. एक पौने पांच बजे शाम का. दूसरा शाम 05.02 मिनट का.
मामला क्यों लंबा खिंचा? बीजेपी ये सीट जीत गई है. जीत के ऐलान से पहले थोड़ा मामला भी फंसा. हुआ ये कि एक EVM के वोट मैच नहीं हो रहे थे. तो उसको आखिरी राउंड में गिना गया. जहां तक पता है, तो ये मॉक पोल को डिलीट नहीं किए जाने की वजह से हुआ था. EVM ठीक से काम कर रही है या नहीं, इसका भरोसा दिलाने के लिए चुनाव आयोग पहले प्रत्याशियों के आगे झूठ-मूठ पोलिंग करवाता है. इसको मॉक पोल कहते हैं. ये वाला डेटा EVM में दर्ज़ रहता है, जिसे असली मतदान शुरू होने से पहले पोलिंग ऑफिसर डिलीट करता है. कई बार ऐसा भी होता है कि पोलिंग अफसर डिलीट करना भूल जाता है. तब वोटिंग के आंकड़े (जो कि हाथ के हाथ पोलिंग बूथ पर रजिस्टर किए जाते हैं) और EVM मशीन में डले वोटों की संख्या मेल नहीं खाती. जिन ईवीएम मशीनों में ये गड़बड़ी आई थी, उन्हें आखिरी राउंड में दोबारा गिना गया. VVPAT पर्ची के साथ मैच करके सही वोट संख्या मालूम की गई.

ये रहा फाइनल रिज़ल्ट. राजू भैया 511 वोटों से जीते. हालांकि नोटा में इससे करीब तीन गुना वोट ज़्यादा पड़े.
फाइनल रिज़ल्ट क्या रहा? इसके अलावा ये बात भी थी कि वोटों का अंतर इतना कम था, तो हारने वाले उम्मीदवार ने दोबारा गिनती करवाने की बात की. मगर चुनाव आयोग ने पहले ही ऐसा इंतज़ाम किया था कि रिकाउंटिंग की नौबत न आए. हर राउंड की गिनती के बाद उस राउंड के वोटों का ऐलान करवाया जा रहा था. फिर सारे ही प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट दिए जा रहे थे. सबसे हाथ के हाथ पूछा जा रहा था कि उनको कोई दिक्कत तो नहीं है, कोई शंका तो नहीं है. फिर पूरे इत्मीनान के बाद, सबकी सहमति लेकर अगले राउंड की गिनती चालू करवाई जा रही थी. जहां पर क्लोज फाइट थी, उन सीटों पर दबाव ज़्यादा था. ये ही सारी चीजें थीं, जिनके कारण कई सीटों पर रिज़ल्ट फंसा हुआ था. जावरा सीट पर फाइनल वोटों की हालत ये रही-
राजेंद्र पाण्डेय राजू भैया (बीजेपी)- 64,503 के के सिंह कालूखेड़ा (कांग्रेस)- 63,992 NOTA- 1,510यानी जीतने वाले को 511 वोट ज़्यादा मिले. जीत का ये अंतर नोटा के हिस्से में गए वोटों से कम ही था. बाकी बात रही मतदान के वैल्यू की, तो ये डेमोक्रेसी है. वोट देकर ही तो जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है. वोट तो सबको ही देना चाहिए. ज़रूर देना चाहिए. सोच-समझकर देना चाहिए. अच्छे, बेहतर उम्मीदवार को देना चाहिए. जाति-धर्म जैसे बंटवारों के ऊपर उठकर देना चाहिए. हम इस बात से भी सहमत हैं कि नोटा को भी तवज़्जो दी जानी चाहिए. लेकिन शायद ये धीरे-धीरे होगा. मगर फिलहाल तो यही सच है कि जिस वायरल पोस्ट की हमने यहां पड़ताल की, वो ग़लत है.
पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर राहुल गांधी ने पहली प्रेस कान्फ्रेन्स में क्या कहा?
चुनावों के नतीज़े तो आ गए हैं, लेकिन सबसे जबर बात अखिलेश यादव ने की है
जहां किसानों पर गोली चली वहां बीजेपी हारी या जीती ये जानना नहीं चाहेंगे?
खींचतान के बाद आखिरकार कैसे बाजीगर बनी कांग्रेस?

