जानते हैं फेसबुक पर चुनाव प्रचार के लिए बीजेपी ने कितने करोड़ खर्च किए?
सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है, जानिए कौन चल रहा आगे...
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भाजपा और उसके समर्थकों का चुनावी विज्ञापन अभी से करोड़ों में पहुंच गया है. फाइल फोटो. इंडिया टु़डे.
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लोकसभा चुनाव से पहले ही सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार शुरू हो गया है. राजनीतिक दलों ने वोटरों को लुभाना शुरू कर दिया है. और साल 2019 के चुनाव की पहली लड़ाई फेसबुक पर लड़ी जा रही है. हाल-फिलहाल इसमें बीजेपी ने अभी से लीड ले रखी है. भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज्ञापन फेसबुक पर सबसे ज्यादा दिख रहे हैं.
फेसबुक ने 7 फरवरी से 2 मार्च तक का एक डेटा जारी किया है. इंडिया टुडे के मुताबिक राजनीतिक विज्ञापन देने में भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी समर्थक पेज सबसे आगे रहे.बाकी दल इस मामले में काफी पीछे हैं. फेसबुक के फरवरी डेटा के मुताबिक भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने 50 फीसदी से ज्यादा राजनीतिक विज्ञापन फेसबुक को दिए. इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक विज्ञापन देने में दूसरे स्थान पर रीजनल पार्टियां रहीं. लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा अपने कुल चुनावी विज्ञापन खर्च का 20 से 25 फीसदी खर्च सोशल मीडिया पर खर्च कर सकती है. इंडिया टुडे के मुताबिक प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस फेसबुक को विज्ञापन के मामले में पीछे रही. 7 फरवरी से 2 मार्च के बीच पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कोई विज्ञापन जारी नहीं किया.
कितना रुपया खर्च किया भाजपा ने फेसबुक पर अब तक? भाजपा और उसके समर्थकों का चुनावी विज्ञापन अभी से करोड़ों में पहुंच गया है. ईटी के मुताबिक इन्होंने फेसबुक पर 7 फरवरी से 2 मार्च तक 2 करोड़, 37 लाख रुपए खर्च किए हैं. इससे उलट क्षेत्रीय दलों ने सिर्फ 19.8 लाख रुपए खर्च किए. कांग्रेस और उसके समर्थकों का खर्च 10.6 लाख रुपए ही रहा. क्षेत्रीय दलों में शिवसेना, शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, तेलुगुदेशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस शामिल हैं. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सबसे ज्यादा फेसबुक प्रचार पाने वाले नेता रहे. नवीन पटनायक के फेसबुक पेज को प्रमोट करने के लिए 7 फरवरी से 2 मार्च के बीच 8.6 लाख रुपए जारी किए गए.

नवीन पटनायक के लिए फेसबुक पर 8.6 लाख रुपए के विज्ञापन दिए गए. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
किस पेज पर कितना खर्च? इंडिया टुडे के मुताबिक चुनाव प्रचार के लिए 'भारत के मन की बात' के नाम से एक फेसबुक पेज है. फरवरी में बीजेपी और मोदी सरकार से जुड़े विज्ञापन प्रमोट करने में 1.2 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए. इस पेज के 3 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. दूसरे नंबर पर 'नेशन विद नमो' नाम का फेसबुक पेज है. इसे 10 लाख से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं. इस पर फरवरी में बीजेपी और मोदी सरकार से जुड़े विज्ञापनों को दिखाने में करीब 64 लाख रुपए खर्च हुए. माईगोव इंडिया पेज के 3 लाख 70 हजार फॉलोवर्स हैं. इस पर 34 लाख रुपए खर्च हुए.
खर्च का आकलन कैसे किया जाता है? राजनीतिक विज्ञापन में खर्च का आकलन पार्टी के नेता, मंत्री, सांसद और संगठन के नेताओं की ओर से दिए गए विज्ञापन खर्च को जोड़कर किया जाता है. समर्थकों में मुख्य दल के समर्थक नेता और उनके संगठनों का खर्च भी जोड़ा जाता है. भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के कई ऐसे समर्थक संगठन हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता रहता है. ऐसे अनाम संगठनों के खर्च को अब चुनाव आयोग मुख्य दलों के खर्च में जोड़ेगा. फेसबुक भी ऐसे संगठनों की पहचान उजागर करेगा.
फेसबुक ने राजनीतिक विज्ञापन के नियम कितने सख्त कर दिए हैं? लोकसभा चुनाव से पहले फेसबुक ने राजनीतिक दलों के लिए विज्ञापन के सख्त नियम बनाए हैं. फेसबुक पर दिए गए राजनीतिक विज्ञापन पर अब उसके स्रोत की जानकारी देना जरूरी है. मतलब ये कि विज्ञापन के साथ विज्ञापनदाता या उसके लिए पैसे का भुगतान करने वाले का ब्योरा देना भी जरूरी है. इससे ये पता रहता है कि विज्ञापन के पीछे कौन लोग हैं. इस वक्त भारत में फेसबुक के करीब 20 करोड़ यूजर हैं.

राजनीतिक दलों के विज्ञापनों के लिए फेसबुक ने नियम कड़े कर दिए हैं. सांकेतिक तस्वीर. रॉयटर्स
टीवी विज्ञापन में भी भाजपा आगे नवंबर, 2018 में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल BARC के मुताबिक उस वक्त तक टीवी पर विज्ञापन देने में भी बीजेपी आगे थी. प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस टॉप 10 में भी नहीं थी. टीवी पर विज्ञापन देने में दूसरे स्थान पर नेटफ्लिक्स और तीसरे स्थान पर ट्रिवैगो थी. 10-16 नंवबर, 2018 के बीच बीजेपी के विज्ञापन 22,099 बार, नेटफ्लिक्स के 12,951 और ट्रिवैगो के विज्ञापन 12,795 बार दिखाए गए. उस वक्त मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के चुनाव थे. इससे जाहिर होता है कि भाजपा चुनाव के दौरान आक्रामक रूप से विज्ञापनों पर खर्च करती है.
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कितना रुपया खर्च किया भाजपा ने फेसबुक पर अब तक? भाजपा और उसके समर्थकों का चुनावी विज्ञापन अभी से करोड़ों में पहुंच गया है. ईटी के मुताबिक इन्होंने फेसबुक पर 7 फरवरी से 2 मार्च तक 2 करोड़, 37 लाख रुपए खर्च किए हैं. इससे उलट क्षेत्रीय दलों ने सिर्फ 19.8 लाख रुपए खर्च किए. कांग्रेस और उसके समर्थकों का खर्च 10.6 लाख रुपए ही रहा. क्षेत्रीय दलों में शिवसेना, शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, तेलुगुदेशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस शामिल हैं. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सबसे ज्यादा फेसबुक प्रचार पाने वाले नेता रहे. नवीन पटनायक के फेसबुक पेज को प्रमोट करने के लिए 7 फरवरी से 2 मार्च के बीच 8.6 लाख रुपए जारी किए गए.

नवीन पटनायक के लिए फेसबुक पर 8.6 लाख रुपए के विज्ञापन दिए गए. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
किस पेज पर कितना खर्च? इंडिया टुडे के मुताबिक चुनाव प्रचार के लिए 'भारत के मन की बात' के नाम से एक फेसबुक पेज है. फरवरी में बीजेपी और मोदी सरकार से जुड़े विज्ञापन प्रमोट करने में 1.2 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए. इस पेज के 3 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. दूसरे नंबर पर 'नेशन विद नमो' नाम का फेसबुक पेज है. इसे 10 लाख से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं. इस पर फरवरी में बीजेपी और मोदी सरकार से जुड़े विज्ञापनों को दिखाने में करीब 64 लाख रुपए खर्च हुए. माईगोव इंडिया पेज के 3 लाख 70 हजार फॉलोवर्स हैं. इस पर 34 लाख रुपए खर्च हुए.
खर्च का आकलन कैसे किया जाता है? राजनीतिक विज्ञापन में खर्च का आकलन पार्टी के नेता, मंत्री, सांसद और संगठन के नेताओं की ओर से दिए गए विज्ञापन खर्च को जोड़कर किया जाता है. समर्थकों में मुख्य दल के समर्थक नेता और उनके संगठनों का खर्च भी जोड़ा जाता है. भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के कई ऐसे समर्थक संगठन हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता रहता है. ऐसे अनाम संगठनों के खर्च को अब चुनाव आयोग मुख्य दलों के खर्च में जोड़ेगा. फेसबुक भी ऐसे संगठनों की पहचान उजागर करेगा.
फेसबुक ने राजनीतिक विज्ञापन के नियम कितने सख्त कर दिए हैं? लोकसभा चुनाव से पहले फेसबुक ने राजनीतिक दलों के लिए विज्ञापन के सख्त नियम बनाए हैं. फेसबुक पर दिए गए राजनीतिक विज्ञापन पर अब उसके स्रोत की जानकारी देना जरूरी है. मतलब ये कि विज्ञापन के साथ विज्ञापनदाता या उसके लिए पैसे का भुगतान करने वाले का ब्योरा देना भी जरूरी है. इससे ये पता रहता है कि विज्ञापन के पीछे कौन लोग हैं. इस वक्त भारत में फेसबुक के करीब 20 करोड़ यूजर हैं.

राजनीतिक दलों के विज्ञापनों के लिए फेसबुक ने नियम कड़े कर दिए हैं. सांकेतिक तस्वीर. रॉयटर्स
टीवी विज्ञापन में भी भाजपा आगे नवंबर, 2018 में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल BARC के मुताबिक उस वक्त तक टीवी पर विज्ञापन देने में भी बीजेपी आगे थी. प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस टॉप 10 में भी नहीं थी. टीवी पर विज्ञापन देने में दूसरे स्थान पर नेटफ्लिक्स और तीसरे स्थान पर ट्रिवैगो थी. 10-16 नंवबर, 2018 के बीच बीजेपी के विज्ञापन 22,099 बार, नेटफ्लिक्स के 12,951 और ट्रिवैगो के विज्ञापन 12,795 बार दिखाए गए. उस वक्त मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के चुनाव थे. इससे जाहिर होता है कि भाजपा चुनाव के दौरान आक्रामक रूप से विज्ञापनों पर खर्च करती है.
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