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'आपको ये करने का हक नहीं... ' SC ने नीतीश सरकार की शामिल की गई जाति को एससी कोटे से बाहर किया

Tanti Tantwa Reservation: फैसला सुनाते हुए Supreme Court ने बिहार सरकार को 'फटकार' लगाई है. कोर्ट ने कहा है कि राज्य को इस गलती के लिए माफ नहीं किया जा सकता. क्या है पूरा मामला?

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Nitish Kumar
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को 'फटकार' लगाई है. (फाइल फोटो: PTI)
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रवि सुमन
17 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 17 जुलाई 2024, 04:24 PM IST)
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बिहार में ‘तांती-ततवा’ (Tanti Tantwa Reservation) जाति को अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में नहीं रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राज्य सरकार की 2015 की अधिसूचना को रद्द कर दिया है. इस अधिसूचना में ‘तांती-ततवा’ जाति को अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) से हटाकर SC वर्ग में ‘पान/सावासी’ जाति के साथ मिला दिया गया था. जस्टिस विक्रम नाथ और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है. संविधान के आर्टिकल 341 के तहत SC वर्ग के जातियों की लिस्ट बनाई जाती है. बेंच ने कहा कि राज्य सरकार को इस लिस्ट में फेरबदल करने का कोई अधिकार नहीं है.

बेंच ने कहा कि SC लिस्ट में बदलाव सिर्फ संसद द्वारा बनाए गए कानून से ही किया जा सकता है. कहा कि संसद में कानून के बिना ना तो केंद्र सरकार और ना ही राष्ट्रपति ऐसा कर सकते हैं. कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा,

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संसद में कानून बनाना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि राज्य सरकार का ये कहना कि ये फैसला इस मामले को और स्पष्ट करने के लिए था, एक पल के लिए भी विचारणीय नहीं है. इसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए. तांती-ततवा जाति, पान/सावासी जाति का पर्यायावाची या अभिन्न अंग था या नहीं? इसे संसद के कानून के बिना नहीं जोड़ा जा सकता.

बिहार सरकार को फटकार

कोर्ट ने बिहार सरकार के इस फैसले को लेकर कहा,

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बेंच ने कहा कि राज्य पिछड़ा आयोग की सिफारिश पर EBC लिस्ट से ‘तांती-ततवा’ को हटाना न्यायोचित हो सकता है. लेकिन SC लिस्ट में इसे ‘पान/सावासी’ के साथ जोड़ना ‘दुर्भावनापूर्ण प्रयास’ से कम नहीं है. भले ही राज्य उस समय अच्छी, बुरा या उदासीन सोच रखता हो. कोर्ट ने कहा,

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'Patna High Court ने गलती की'

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस दौरान पटना हाई कोर्ट की गलती पर भी टिप्पणी की है. बेंच ने कहा कि पटना हाई कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 341 का संदर्भ दिए बिना पूरी तरह गलत आधार पर इस अधिसूचना को बरकरार रखने में ‘गंभीर गलती’ की है.

'राज्य को माफ नहीं किया जा सकता'

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि राज्य की इस गलती के लिए उन्हें माफ नहीं किया जा सकता. शीर्ष अदालत का कहना था,

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कोर्ट ने कहा कि 'तांती-ततवा' समुदाय के ऐसे सभी सदस्य, जिन्हें इस तरह का लाभ दिया गया है, उन्हें EBC की उनकी मूल श्रेणी के अंतर्गत ‘समायोजित’ किया जाए. इसके लिए राज्य कोई उचित उपाय कर सकता है.

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