वो साल 2003-04 था. एक पतला-दुबला लड़का घरेलू क्रिकेट में अपनी विकेट कीपिंग औरजोरदार बैटिंग के जरिए नेशनल टीम के दरवाजे पर खड़ा था. इसी बीच जिस स्टेट टीम कीवो कप्तानी करता था, उसी की मान्यता खत्म कर दी गई थी. ये लड़का था महेंद्र सिंहधोनी. और टीम थी बिहार. बतौर कप्तान आखिरी बार धोनी ने ही बिहार का रणजी मेंनेतृत्व किया था. 2003 से आज तक बिहार रणजी नहीं खेल पाया क्योंकि झारखंड ने उसकीजगह ले ली. अब 2018-19 में जब बिहार एक बार फिर रणजी में खेलेगा, धोनी अपने करियरकी तमाम ऊंचाइयों के बाद अपनी रिटारमेंट की ओर हैं. बिहार ने इस दौरान कई धोनी खोएहैं. कई धोनी बचे हुए हैं जिन्हें अब उम्मीद है कि वो बीसीसीआई की छतरी तले अपनेक्रिकेट करियर चमका पाएंगे.बिहार क्यों रहा रणजी से बाहर?पास के राज्यों में जाकर खेलने को मजबूर है बिहार की क्रिकेट पौध.4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि बिहार को रणजी में शामिल किया जाए.1936 से 2003 तक बिहार की टीम रणजी में खेलती रही. मगर साल 2000 में जब बिहार सेझारखंड बना तो दोनों राज्यों में क्रिकेट कंट्रोल पर विवाद हो गया. बिहार क्रिकेटएसोसिएशन को मानने से बीसीसीआई ने मना कर दिया. कारण ये बना कि 1935 से बिहारक्रिकेट एसोसिएशन का हेडक्वार्ट्स जमशेदपुर में रहा जो अब झारखंड में आता है.इसीआधार पर जब नई झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन बनी तो उसे मान्यता मिल गई. वहीं बिहार कोडीरिकॉगनाइज कर दिया गया. मामला इतना ही नहीं है. बिहार में क्रिकेट को कंट्रोलकरने के कई दावेदार हैं. यानी कई क्रिकेट एसोसिएशन्स हैं. बिहार क्रिकेट एसोसिएशन्सके अलावा एसोसिएशन ऑफ बिहार क्रिकेट (ABC)और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (CAB) भीखुद को असली एसोसिएशन बताती हैं. इसी के चलते बीसीसीआई ने बिहार को डिस्क्वालिफाईकर दिया था.हालांकि बिहार के पास क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर तो है, मगर क्रिकेट गायब दिखती है.यहां पटना, भागलपुर और दरभंगा में पांच फर्स्ट क्लास क्रिकेट ग्राउंड हैं. वहींपटना का मोइन-उल-हक़ स्टेडियम बीसीए का होम ग्राउंड है. मगर 14 साल के इस गैप मेंबिहार में क्रिकेट के कई सपने पूरे नहीं हो पाए. जिसे क्रिकेटर बनना है वो पास केराज्यों में जाकर खेलने लगे. दूसरे राज्यों में सबसे बाद में ही नंबर आता है.बिहार में क्रिकेट का केजरीवालBCCI की नाक में दम करने के लिए मशहूर हैं आदित्य वर्मा.2007-08 में एक अदमी रोज मुंबई में चर्चगेट पर बीसीसीआई दफ्तर के बाहर खड़ा हो जाताथा. रोज जाता. सिक्योरिटी गार्ड से दोस्ती करता, अधिकारियों के सामने अपनी पहचानबनाता और कोशिश करता किसी तरह अंदर जा सके. उसके हाथ में कुछ कागज होते थे जिन्हेंवो ऊपर तक पहुंचाना चाहता था. मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया. ये आदमी था आदित्यवर्मा. क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार का सेक्रेट्री. वो क्रिकेट बॉडी जो अभी तकरिकॉगनाइज नहीं थी. तब से इस आदमी ने न सिर्फ बिहार की रणजी में वापसी की लड़ाईलड़ी, साथ ही बीसीसीआई के काम करने में पारदर्शिता लाने के लिए भी मुहिम छेड़ी.छपरा के आदित्य ने बीसीसीआई को आईपीएल फिक्सिंग मामले में भी बॉम्बे हाई कोर्ट मेंघेरा. अपना केस को खुद सुप्रीम कोर्ट में लड़ा. फिर इन्हीं की अपील पर नौ महीने बादसुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन को बोर्ड प्रेसिडेंट की कुर्सी ने हटने के आदेशदिए. साथ ही राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपरकिंग्स को दो साल के लिए सस्पेंड कियागया.--------------------------------------------------------------------------------Also Read:गुमनाम चिट्ठी ने बताया, प्रोफेसर ने बीमार मां को कैसे ठिकाने लगायाभारत को पाकिस्तान से डरना चाहिए, क्योंकि उसके पास मुअज़्ज़म खान निआज़ी हैइस BJP MLA का बेटा एग्ज़ाम पास कर के चपरासी बन गया हैवीडियो भी देखिए-