सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमिटी से अलग हुए भूपिंदर मान, लिखा- मैं पंजाब और किसानों के साथ हूं
प्रोटेस्ट पर बैठे किसानों और सरकार के बीच गतिरोध को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई थी कमिटी.
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किसान कानूनों पर राय देने किए सुप्रीम कोर्ट ने जिन चार लोगों का नाम सुझाया है उसमें से एक भूपिंदर सिंह मान ने गुरुवार को अपना नाम बाहर रखने की बात कह दी.
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कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. हालांकि, 50 दिन से प्रोटेस्ट पर बैठे किसान चाहते हैं कि इन कानूनों को रद्द किया जाए. इसलिए रोक लगने के बाद भी वो प्रोटेस्ट खत्म करने को तैयार नहीं हैं. वहीं सरकार भी इस बात पर अड़ी हुई है कि ये कानून किसानों की भलाई के लिए हैं. यानी सरकार और किसानों के बीच गतिरोध पैदा हो गया है.
इसके समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यों की एक कमिटी बनाई थी. इन चार में से एक सदस्य यानी भूपिंदर सिंह मान ने खुद को कमिटी से अलग कर लिया है. भूपिंदर सिंह मान के नाम पर शुरू से बवाल हो रहा है. आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि भूपिंदर सिंह मान पहले ही तीनों कृषि कानून का समर्थन कर चुके हैं. सिर्फ मान ही नहीं कमेटी के बाकी तीन सदस्यों को भी सरकार समर्थक बताकर किसान कमिटी को खारिज कर चुके हैं. भूपिंदर सिंह मान ने क्यों खुद को अलग किया? भूपिंदर सिंह मान ने कमेटी से खुद को अलग रखने के पीछे किसानों की भावनाओं को कारण बताया है. उन्होंने कारण बताते हुए एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने लिखा,

भूपिंदर सिंह मान ने किसानों के प्रति एकजुटता की बात कहते हुए खुद को कमिटी से अलग किया है.
भूपेंद्र सिंह मान के फैसले पर दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान नेताओं ने खुशी जाहिर की है. किसान आंदोलन में शामिल भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है. टिकैत ने कहा,
अशोक गुलाटी- कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी ICRIER में तीन साल प्रोफेसर रह चुके हैं. भारत सरकार को MSP के मुद्दे पर सलाह देने वाली कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं, 2015 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.
भूपिंदर सिंह मान- पूर्व राज्यसभा सांसद भूपिंदर सिंह मान, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं. इसके साथ ही वह ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख भी हैं.
प्रमोद जोशी- नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रिकल्चर रिसर्च मैनेजमेंट के डायरेक्टर रह चुके प्रमोद कुमार जोशी को आर्थिक-कृषि मामलों का जानकार माना जाता है.
अनिल घनवंत- महाराष्ट्र के बहुचर्चित शेतकारी संगठन के प्रमुख अनिल घनवंत की किसानों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. इस संगठन की शुरुआत किसान नेता शरद जोशी ने की थी, जिनकी मांग थी कि किसानों को खुले बाजार में आने का अवसर मिले.
दिल्ली के बॉर्डर पर 50 दिन से किसान प्रोटेस्ट कर रहे हैं. सरकार से कई दौरों की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका है.सुप्रीम कोर्ट ने जिस कमेटी को बनाने की बात की है उसे भी किसान नेताओं ने अस्वीकार किया है. आंदोलनरत किसानों ने किसी भी कमेटी के सामने जाने से मना कर दिया है.
इसके समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यों की एक कमिटी बनाई थी. इन चार में से एक सदस्य यानी भूपिंदर सिंह मान ने खुद को कमिटी से अलग कर लिया है. भूपिंदर सिंह मान के नाम पर शुरू से बवाल हो रहा है. आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि भूपिंदर सिंह मान पहले ही तीनों कृषि कानून का समर्थन कर चुके हैं. सिर्फ मान ही नहीं कमेटी के बाकी तीन सदस्यों को भी सरकार समर्थक बताकर किसान कमिटी को खारिज कर चुके हैं. भूपिंदर सिंह मान ने क्यों खुद को अलग किया? भूपिंदर सिंह मान ने कमेटी से खुद को अलग रखने के पीछे किसानों की भावनाओं को कारण बताया है. उन्होंने कारण बताते हुए एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने लिखा,
"मैं सुप्रीम कोर्ट का आभार जताता हूं, लेकिन एक किसान और संगठन का नेता होने के नाते मैं किसानों की भावना जानता हूं. मैं अपने किसानों और पंजाब के प्रति वफादार हूं. इनके हितों से कभी कोई समझौता नहीं कर सकता. मैं इसके लिए कितने भी बड़े पद या सम्मान की बलि चढ़ा सकता हूं. मैं कोर्ट की ओर से दी गई जिम्मेदारी नहीं निभा सकता. मैं खुद को इस कमेटी से अलग करता हूं."
S. Bhupinder Singh Mann Ex MP and National President of BKU and Chairman of All India Kisan Coordination Committee has recused himself from the 4 member committee constituted by Hon'ble Supreme Court pic.twitter.com/pHZhKXcVdT
— Bhartiya Kisan Union (@BKU_KisanUnion) January 14, 2021

भूपिंदर सिंह मान ने किसानों के प्रति एकजुटता की बात कहते हुए खुद को कमिटी से अलग किया है.
भूपेंद्र सिंह मान के फैसले पर दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान नेताओं ने खुशी जाहिर की है. किसान आंदोलन में शामिल भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है. टिकैत ने कहा,
कमेटी से भूपेंद्र मान जी का इस्तीफा इस आंदोलन की वैचारिक जीत का उदाहरण है. भूपेंद्र सिंह मान ने कहा है कि वह किसानों की जन भावनाओं के, पंजाब के किसान के साथ हैं. हम उनका धन्यवाद करते हैं कि आज उनके अंदर का किसान जाग गया और हम भूपेंद्र सिंह मान जी को आमंत्रित करते हैं कि वह भी आंदोलन में शामिल हों.सुप्रीम कोर्ट ने इन 4 लोगों की बनाई थी कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यों की कमिटी बनाते हुए कहा था कि सभी पक्ष इस कमेटी के पास जाकर अपना पक्ष रखें और यह कमेटी कोर्ट को सही तस्वीर पेश करे. इसके लिए कोर्ट ने कमेटी में चार लोगों का नाम प्रस्तावित किया. ये चार लोग हैं-
अशोक गुलाटी- कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी ICRIER में तीन साल प्रोफेसर रह चुके हैं. भारत सरकार को MSP के मुद्दे पर सलाह देने वाली कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं, 2015 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.
भूपिंदर सिंह मान- पूर्व राज्यसभा सांसद भूपिंदर सिंह मान, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं. इसके साथ ही वह ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख भी हैं.
प्रमोद जोशी- नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रिकल्चर रिसर्च मैनेजमेंट के डायरेक्टर रह चुके प्रमोद कुमार जोशी को आर्थिक-कृषि मामलों का जानकार माना जाता है.
अनिल घनवंत- महाराष्ट्र के बहुचर्चित शेतकारी संगठन के प्रमुख अनिल घनवंत की किसानों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. इस संगठन की शुरुआत किसान नेता शरद जोशी ने की थी, जिनकी मांग थी कि किसानों को खुले बाजार में आने का अवसर मिले.
दिल्ली के बॉर्डर पर 50 दिन से किसान प्रोटेस्ट कर रहे हैं. सरकार से कई दौरों की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका है.सुप्रीम कोर्ट ने जिस कमेटी को बनाने की बात की है उसे भी किसान नेताओं ने अस्वीकार किया है. आंदोलनरत किसानों ने किसी भी कमेटी के सामने जाने से मना कर दिया है.

