तीन दिनों तक चुप थे BHU वीसी, अब बोले भी तो बेतुकी बातें
छात्राओं से अब भी नहीं मिले हैं वीसी, मीडिया से बतिया रहे.
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फोटो - thelallantop
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बीएचयू की लड़कियां पिछले तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. पुलिस की लाठियां भी खा रही हैं और रबर की बुलेट भी. उनका साथ देने के लिए लड़के भी आ गए हैं. लड़के और लड़कियों दोनों को इस आंदोलन का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. लड़के हो या लड़की, दोनों को ही 24 सितंबर की शाम चार बजे तक हॉस्टल खाली करने को कहा गया है. कुछ लड़के-लड़कियां हाथों में झोला उठाए बीएचयू से बाहर निकलने भी लगे हैं. ये आदेश खुद वीसी प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी की ओर से आया है. तीन दिनों तक चुप्पी साधने के बाद वीसी 24 सितंबर को दूसरी बार लाठीचार्ज होने के बाद मीडिया के सामने आए. उन्होंने कहा कि
1. बड़ी मात्रा में बाहर से लोग आए, जिन्होंने इस आंदोलन को हवा देने की कोशिश की.
पहली बात, वो कह रहे हैं कि बड़ी मात्रा में बाहर से लोग आए, जिन्होंने इस आंदोलन को हवा देने की कोशिश की. वीसी साहब, ये आपकी कमी है, आपकी यूनिवर्सिटी और इसके प्रशासन की कमी है कि बाहर के लोग कैंपस में कैसे दाखिल हो गए. आपकी पुलिस और आपके सुरक्षाकर्मी उसस वक्त कहां थे, जब बाहर के लोग कैंपस में दाखिल हो रहे थे. अगर तस्वीरों को ही देखें, तो संख्या हजारों में है. इतने लोग आपके कैंपस में घुस गए और आपकी पुलिस को पता भी नहीं चला कि इतनी बड़ी संख्या में लोग कैंपस में दाखिल हुए हैं. जब आपके लोग बाहरी लोगों को कैंपस में दाखिल होने से नहीं रोक पाए, तो वो लड़कियों से होने वाली छेड़खानी कैसे रोक पाएंगे. और विरोध करने वाली लड़कियां भी तो यही कह रही हैं कि उनकी सुरक्षा कीजिए. और तो वो आपसे किसी चीज की मांग कर ही नहीं रही हैं.
दूसरी बात, आपको पहले से सूचना मिली थी कि कुछ असामाजिक लोग कैंपस का माहौल खराब कर सकते हैं. जब आपको पता था कि कुछ लोग माहौल खराब कर सकते हैं, तो आपने क्या किया? क्या आपने जिले के एसएसपी और डीएम से इस बारे में बात की, क्या आपने लंका थाने को इस बारे में बताया कि कैंपस में कुछ असामाजिक तत्व घुस सकते हैं. क्या आपने यूनिवर्सिटी की सुरक्षा बढ़ाई या फिर आप इंतजार कर रहे थे कि कैंपस में इतना बड़ा हंगामा हो और पुलिस लाठीचार्ज करे, जिसके बाद आप ये बयान दे सकें कि आपको पहले से सूचना थी कि कैंपस का माहौल खराब हो सकता है.
हॉस्टल छोड़कर चली जाओ, तुम्हारे मां-बाप ने यही सब करने भेजा है. ये वाक्य पिछले तीन दिनों से बीएचयू के गर्ल्स हॉस्टल में जोर-जोर से दुहराया जा रहा है. इसे बोलने वाली अलग-अलग गर्ल्स हॉस्टल की वॉर्डन हैं. हॉस्टल चाहे त्रिवेणी हो या फिर आनंदी, सभी की लड़कियों के लिए इस वाक्य का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है. एक गर्ल्स हॉस्टल की वॉर्डन नाम न बताने की शर्त पर कहती हैं कि हम ऐसा कहना नहीं चाहते हैं, क्योंकि लड़कियों की मांग स्वाभाविक है. लेकिन हमारे ऊपर दबाव बनाया जा रहा है कि हम लड़कियों को हॉस्टल के कमरे में कैद कर लें या फिर उन्हें घर भेजने को मजबूर कर दें.
आनंदी हॉस्टल की एक लड़की बताती है कि उसे और उसकी जैसी लड़कियों को दो घंटे में हॉस्टल खाली करने को कहा गया है. यूनिवर्सिटी को 2 तारीख तक बंद कर दिया गया है. ऐसे में हम कहा जाएं. वो बताती है कि उसे 26 को दिल्ली निकलना था. उसका टिकट भी हो चुका था. ऐसे में 24 को ही हॉस्टल खाली करने को कहा गया है. वो क्या करे. वहीं लाठीचार्ज के मामले में वो बताती है कि रात में लाठीचार्ज के दौरान कोई भी महिला सुरक्षाकर्मी नहीं थी और पुरुष सुरक्षाकर्मी ही लाठीचार्ज कर रहे थे. आज तक ऐसा नहीं हुआ था कि लड़कियों के हॉस्टल में घुसकर पुलिसवाले लाठी चलाएं.
वीडियो में देखें कैसे लड़कियों को हॉस्टल से निकाला जा रहा है
23 सितंबर की रात लाठीचार्ज के बाद 24 सितंबर की दोपहर में एक बार फिर लड़कियों पर लाठीचार्ज किया गया. त्रिवेणी हॉस्टल की एक लड़की बताती है कि वो लोग एलडी गेस्ट हाउस के पास 24 सितंबर की दोपहर में शांति मार्च निकाल रहे थे. एक बार फिर वही प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी सामने आए, जिनसे छेड़खानी के दौरान बचाव की गुहार लगाई थी और उन्होंने कुछ नहीं किया था. इन लोगों ने फिर से लाठियां निकालीं और बरसानी शुरू कर दीं. छात्रा बताती है कि इस लाठीचार्ज में छह लड़कियां घायल हो गई हैं.
आनंदी हॉस्टल की एक लड़की बताती है कि उसके साथ पढ़ने वाले कुछ लड़के ही इस आंदोलन को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. उसने बताया कि जिन लोगों को उसने सरेआम छेड़खानी करते हुए देखा था, वही लोग अब इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं और महिला सशक्तीकरण का नारा लगा रहे हैं. ये इस आंदोलन को फेल करने की साजिश है.
आनंदी हॉस्टल की एक लड़की बताती है कि जब उनलोगों ने वीसी से बात करने से इनकार कर दिया, तो उन्हें बताया गया कि त्रिवेणी हॉस्टल की लड़कियां वीसी से बात करने को तैयार हैं. जब आनंदी की लड़कियों ने ये सुना तो वो भी बात करने को तैयार हो गईं. कुछ ही देर में पता लगा कि प्रशासन झूठ बोल रहा है कि कोई भी लड़की हॉस्टल में बात करने को तैयार नहीं है. इतना ही नहीं, त्रिवेणी हॉस्टल की लड़कियों ने बात नहीं मानी है तो उनपर लाठीचार्ज कर दिया गया है. इससे आनंदी की भी लड़कियां भड़क गईं और उन्होंने वीसी से बात करने से इनकार कर दिया.
ये भी पढ़ें: सुरक्षा मांगने वाली लड़कियों पर लाठी चलवाने वाले वीसी साहब, जय माता दी! BHU के इन 10 विवादों को जानेंगे तो खुदहै कहेंगे- वीसी साहब, तुमसे न हो पाएगा प्रधानमंत्री मोदी के नाम खुला ख़त: “BHU की बेटियां क्या बेटियां नहीं हैं?”
2. हमें पहले से सूचना मिली थी कि कुछ असामाजिक तत्व यूनिवर्सिटी का माहौल खराब कर सकते हैं.We had information that some anti-social elements will try to disturb the environment of the University: #BHU VC Girish Chandra Tripathi
— ANI UP (@ANINewsUP) September 24, 2017
Badi maatra mein bahaar se log aaye jinhone iss andolan ko hawa dene ki koshish ki: #BHU VC Girish Chandra Tripathi pic.twitter.com/PXkaDPxmwd — ANI UP (@ANINewsUP) September 24, 20173. मैं लड़कियों की बातों से सहमत हूं. सुरक्षा जरूरी है. यूनिवर्सिटी में सुरक्षा कड़ी करने के लिए हम काम कर रहे हैं. 4. सीसीटीवी लगाने में कुछ शिकायतें आई हैं, जिनको देखा जा रहा है. कुछ लड़कियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी को सुरक्षा के प्रति और ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए.
ठीक है, वीसी साहब तीन दिन बाद ही सही, मीडिया के सामने तो आए. उन्होंने कुछ तो कहा, यही बातें अगर वो उन लड़कियों से लंका गेट पर जाकर कह देते, तो शायद इतना हंगामा हुआ ही नहीं होता. लेकिन अब तो उनके आदेश पर दो बार लाठीचार्ज हो ही चुका है. फिर भी उन्होंने जो पहली दो बाते कहीं हैं, वो खुद उनको सवालों के घेरे में खड़ी करती हैं.I agreed to their viewpoint. Safety & security is imp, will have to consider various aspects with regard to safety in University: BHU VC
— ANI UP (@ANINewsUP) September 24, 2017
पहली बात, वो कह रहे हैं कि बड़ी मात्रा में बाहर से लोग आए, जिन्होंने इस आंदोलन को हवा देने की कोशिश की. वीसी साहब, ये आपकी कमी है, आपकी यूनिवर्सिटी और इसके प्रशासन की कमी है कि बाहर के लोग कैंपस में कैसे दाखिल हो गए. आपकी पुलिस और आपके सुरक्षाकर्मी उसस वक्त कहां थे, जब बाहर के लोग कैंपस में दाखिल हो रहे थे. अगर तस्वीरों को ही देखें, तो संख्या हजारों में है. इतने लोग आपके कैंपस में घुस गए और आपकी पुलिस को पता भी नहीं चला कि इतनी बड़ी संख्या में लोग कैंपस में दाखिल हुए हैं. जब आपके लोग बाहरी लोगों को कैंपस में दाखिल होने से नहीं रोक पाए, तो वो लड़कियों से होने वाली छेड़खानी कैसे रोक पाएंगे. और विरोध करने वाली लड़कियां भी तो यही कह रही हैं कि उनकी सुरक्षा कीजिए. और तो वो आपसे किसी चीज की मांग कर ही नहीं रही हैं.
दूसरी बात, आपको पहले से सूचना मिली थी कि कुछ असामाजिक लोग कैंपस का माहौल खराब कर सकते हैं. जब आपको पता था कि कुछ लोग माहौल खराब कर सकते हैं, तो आपने क्या किया? क्या आपने जिले के एसएसपी और डीएम से इस बारे में बात की, क्या आपने लंका थाने को इस बारे में बताया कि कैंपस में कुछ असामाजिक तत्व घुस सकते हैं. क्या आपने यूनिवर्सिटी की सुरक्षा बढ़ाई या फिर आप इंतजार कर रहे थे कि कैंपस में इतना बड़ा हंगामा हो और पुलिस लाठीचार्ज करे, जिसके बाद आप ये बयान दे सकें कि आपको पहले से सूचना थी कि कैंपस का माहौल खराब हो सकता है.
इससे पहले BHU में जो कहा गया, वो बेहद शर्मनाक है
हॉस्टल छोड़कर चली जाओ, तुम्हारे मां-बाप ने यही सब करने भेजा है. ये वाक्य पिछले तीन दिनों से बीएचयू के गर्ल्स हॉस्टल में जोर-जोर से दुहराया जा रहा है. इसे बोलने वाली अलग-अलग गर्ल्स हॉस्टल की वॉर्डन हैं. हॉस्टल चाहे त्रिवेणी हो या फिर आनंदी, सभी की लड़कियों के लिए इस वाक्य का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है. एक गर्ल्स हॉस्टल की वॉर्डन नाम न बताने की शर्त पर कहती हैं कि हम ऐसा कहना नहीं चाहते हैं, क्योंकि लड़कियों की मांग स्वाभाविक है. लेकिन हमारे ऊपर दबाव बनाया जा रहा है कि हम लड़कियों को हॉस्टल के कमरे में कैद कर लें या फिर उन्हें घर भेजने को मजबूर कर दें.
दो तारीख तक बंद कर दिया बीएचयू, कहां जाएंगी लड़कियां
आनंदी हॉस्टल की एक लड़की बताती है कि उसे और उसकी जैसी लड़कियों को दो घंटे में हॉस्टल खाली करने को कहा गया है. यूनिवर्सिटी को 2 तारीख तक बंद कर दिया गया है. ऐसे में हम कहा जाएं. वो बताती है कि उसे 26 को दिल्ली निकलना था. उसका टिकट भी हो चुका था. ऐसे में 24 को ही हॉस्टल खाली करने को कहा गया है. वो क्या करे. वहीं लाठीचार्ज के मामले में वो बताती है कि रात में लाठीचार्ज के दौरान कोई भी महिला सुरक्षाकर्मी नहीं थी और पुरुष सुरक्षाकर्मी ही लाठीचार्ज कर रहे थे. आज तक ऐसा नहीं हुआ था कि लड़कियों के हॉस्टल में घुसकर पुलिसवाले लाठी चलाएं.
वीडियो में देखें कैसे लड़कियों को हॉस्टल से निकाला जा रहा है
हम तो शांति से मार्च निकाल रहे थे, फिर क्यों चला दी लाठी
23 सितंबर की रात लाठीचार्ज के बाद 24 सितंबर की दोपहर में एक बार फिर लड़कियों पर लाठीचार्ज किया गया. त्रिवेणी हॉस्टल की एक लड़की बताती है कि वो लोग एलडी गेस्ट हाउस के पास 24 सितंबर की दोपहर में शांति मार्च निकाल रहे थे. एक बार फिर वही प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी सामने आए, जिनसे छेड़खानी के दौरान बचाव की गुहार लगाई थी और उन्होंने कुछ नहीं किया था. इन लोगों ने फिर से लाठियां निकालीं और बरसानी शुरू कर दीं. छात्रा बताती है कि इस लाठीचार्ज में छह लड़कियां घायल हो गई हैं.
पहले छेड़ते हैं और फिर कहते हैं महिला सशक्तीकरण, ये साजिश है
आनंदी हॉस्टल की एक लड़की बताती है कि उसके साथ पढ़ने वाले कुछ लड़के ही इस आंदोलन को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. उसने बताया कि जिन लोगों को उसने सरेआम छेड़खानी करते हुए देखा था, वही लोग अब इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं और महिला सशक्तीकरण का नारा लगा रहे हैं. ये इस आंदोलन को फेल करने की साजिश है.
रात में भी फूट डालने की कोशिश की थी बीएचयू प्रशासन ने
आनंदी हॉस्टल की एक लड़की बताती है कि जब उनलोगों ने वीसी से बात करने से इनकार कर दिया, तो उन्हें बताया गया कि त्रिवेणी हॉस्टल की लड़कियां वीसी से बात करने को तैयार हैं. जब आनंदी की लड़कियों ने ये सुना तो वो भी बात करने को तैयार हो गईं. कुछ ही देर में पता लगा कि प्रशासन झूठ बोल रहा है कि कोई भी लड़की हॉस्टल में बात करने को तैयार नहीं है. इतना ही नहीं, त्रिवेणी हॉस्टल की लड़कियों ने बात नहीं मानी है तो उनपर लाठीचार्ज कर दिया गया है. इससे आनंदी की भी लड़कियां भड़क गईं और उन्होंने वीसी से बात करने से इनकार कर दिया.
ये भी पढ़ें: सुरक्षा मांगने वाली लड़कियों पर लाठी चलवाने वाले वीसी साहब, जय माता दी! BHU के इन 10 विवादों को जानेंगे तो खुदहै कहेंगे- वीसी साहब, तुमसे न हो पाएगा प्रधानमंत्री मोदी के नाम खुला ख़त: “BHU की बेटियां क्या बेटियां नहीं हैं?”
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