भोपाल एनकाउंटर के कुछ और भी वीडियो आपके सामने आ सकते थे, लेकिन उनमें से कुछपुलिस वालों ने उसी वक्त डिलीट करवा दिए. अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' नेचश्मदीदों से बातचीत के आधार पर ये खबर दी है. एक चश्मदीद ने अखबार को बताया,'संदिग्ध आतंकियों के यहां होने की खबर आग की तरह फैली. सैकड़ों लोग वहां जमा हो गएऔर थोड़ी ही देर में फायरिंग की आवाज आने लगी. कई लोगों ने इसका वीडियो बनाने कीकोशिश की. कुछ वीडियो तो वायरल हो गए, लेकिन कुछ पुलिस वालों ने उसी टाइम डिलीटकरवा दिए थे.' पीछे खड़े एक और आदमी ने बताया, 'मैं एनकाउंटर का वीडियो अपने मोबाइलमें बना रहा था. लेकिन पुलिस वालों ने जैसे ही देखा. मुझसे फोन छीन लिया और वीडियोडिलीट कर दिया. उन्होंने मेरा फोन पूरे दिन अपने साथ रखा. मैंने कई बार माफी मांगी,रिक्वेस्ट की, तब शाम को फोन लौटाया.' भोपाल की सेंट्रल जेल से सोमवार तड़के सिमीसे जुड़े 8 संदिग्ध आतंकी एक हेड कॉन्स्टेबल की हत्या करके फरार हो गए थे. यहां से13 किलोमीटर दूर खेजड़ादेव गांव में पुलिस टीम ने उन्हें घेरकर मार दिया था. यहएनकाउंटर इसलिए विवादों में है क्योंकि कई वीडियोज इस बात की ओर इशारा करते हैं किपुलिस टीम चाहती तो उन्हें जिंदा पकड़ सकती थी, लेकिन फिर भी उन्हें मार दिया गया.टूरिस्ट स्पॉट बनी एनकाउंटर वाली जगहभोपाल की मनीखेड़ी पहाड़ी, जहां सिमी से जुड़े 8 संदिग्ध आतंकियों का एनकाउंटर हुआ,अब एक टूरिस्ट स्पॉट बन गई है. मंगलवार को वहां आस-पास के गांव वाले पहुंचे औरउन्होंने खूब सेल्फी-वेल्फी ली. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के मुताबिक, वहां सुरक्षा केकोई इंतजाम नहीं थे. खेजड़ादेव गांव की इस पहाड़ी पर न कोई पुलिस बैरिकेड दिखा और नही कोई पुलिसकर्मी. जेल से भागने के बाद संदिग्ध आतंकियों ने कपड़े बदल लिए थे.मौके पर उनके पुराने कपड़े बिखरे पड़े थे. चट्टान और घास पर खून के सूख चुके धब्बेमौजूद थे, जिनके साथ सेल्फी लेते हुए कई लोगों को देखा गया. कई गांव वाले तो अपनेबच्चों को साथ लेकर पहुंचे थे. जब एडिशनल एसपी धरमवीर सिंह से पूछा गया कि एनकाउंटरकी जगह पर सुरक्षा क्यों नहीं है, तो उन्होंने कहा, 'फिजिकल सबूत वहां से ले लिए गएहैं. वहां हमने पूरी तलाशी कर ली है और वहां चट्टानों पर सिर्फ खून के धब्बे बचेहैं.' इसी वक्त अखबार के रिपोर्टर को संतोष नाम का एक आदमी मिला, जिसका दावा था किउसने संदिग्ध आतंकियों को पुलिस से पहले देखा था. उसने बताया कि सोमवार को जब येघटना हुई, पुलिस के आने से पहले ही गांव वालों ने संदिग्धों को घेर लिया था. संतोषके मुताबिक, उन आठों में से एक ने कहा था, 'हमको जो करना था कर दिया. अब मर भी जाएंतो फिक्र नहीं.' लोगों ने बताया कि भोपाल सेंट्रल जेल से भागे ये संदिग्ध आतंकीएकदम 'नॉर्मल' लग रहे थे. पास में ही रहने वाले मैनी सिंह ने बताया, 'मैंने उन्हेंलाठी-डंडे लेकर भागते देखा. वो बिल्कुल साधारण लग रहे थे.' मनीखेड़ी पहाड़ी कीस्थिति ही ऐसी है कि संदिग्ध आतंकियों के पास भाग निकलने का कोई रास्ता नहीं बचाथा. चारों तरफ से जंगल और खेत दिखते हैं. एक तरफ खड़ी चट्टान है, सैकड़ों फीट कीऊंचाई है. वहां से कूदकर जान जानी तय है. बाकी तीन तरफ से पुलिस और एसटीएफ की टीमने घेर लिया था. एक चश्मदीद ने बताया, 'उनका पीछा कर रही पुलिस टीम ने उनसे बातकरने की कोशिश की. लेकिन बाकी दोनों तरफ की टीमों ने उन्हें कोनों की ओर धकेल दियाऔर मार डाला. हमने पुलिस की तरफ से चलाई गई 45 राउंड गोलियां गिनीं. एनकाउंटर करीब15 मिनट तक चला.' इस अखबार ने अपनी खबर में कहीं नहीं लिखा है कि संदिग्ध आतंकियोंकी तरफ से गोली चलाई गई. ये भी पढ़ें -मध्य प्रदेश 'एनकाउंटर' का तीसरा वीडियो, जिससे पूरी पिक्चर क्लियर हो गई हैभोपाल एनकाउंटर में सबसे ट्रैजिक कहानी है हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर की!भोपाल जेल से फरार संदिग्ध आतंकियों का एनकाउंटर, आठों हलाकखून से लाल होकर बाणगंगा बनी हलाली नदी, जहां सिमी के लोगों का एनकाउंटर हुआ