भीमा कोरेगांव केस: वरवरा राव को जमानत, SC ने कहा- 'सिर्फ स्वास्थ्य कारणों से बेल मिली'
जेल में काफी समय से बीमार चल रहे थे वरवरा.

सुप्रीम कोर्ट ने वरवरा राव को जमानत दे दी है. तेलगु कवि वरवरा राव महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव एल्गार परिषद केस में जेल में थे. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जमानत दी.
जमानत देते हुए कोर्ट ने वरवरा को कई तरह की हिदायतें दीं. कोर्ट ने कहा कि वो जमानत का दुरुपयोग नहीं करेंगे. वो जेल से बाहर रहने के दौरान किसी भी गवाह से नहीं मिलेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि राव, जिस कोर्ट में उनका ट्रायल चल रहा है उसकी अनुमति के बिना संबंधित कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगे.
आजतक की खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने वरवरा राव को जमानत देते हुए कहा कि वे अपनी पसंद से अपना इलाज करा सकते हैं. हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि इलाज की जानकारी उन्हें NIA को देनी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही ये भी साफ किया कि जमानत पूरी तरह से मेडिकल ग्राउंड पर दी गई है और इस मामले के अन्य आरोपियों का इससे कोई प्रभाव नहीं पड़.
वरवरा राव पर क्या है आरोप?वरवरा राव को 28 अगस्त, 2018 को हैदराबाद में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था. वरवरा राव उन पांच लोगों में शामिल हैं, जिन पर नक्सलियों के साथ संबंध रखने और भीमा कोरेगांव हिंसा में शामिल होने के आरोप हैं.
इस मामले में, पुणे पुलिस ने 8 जनवरी, 2018 को पुलिस विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की. राव को पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नजरबंद किया गया. बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
आजतक की खबर के मुताबिक, साल 2018 की शुरुआत में पुणे पुलिस ने नक्सल नेताओं की तरफ से लिखा एक कथित पत्र को जब्त किया था. इस चिट्ठी में देश में कई नक्सल गतिविधियों के लिए तेलुगु कवि वरवरा राव के कथित ‘मार्गदर्शन’ के लिए उनकी तारीफ की गई थी.
वरवरा राव तेलगू कवि के अलावा माओवाद के समर्थक के तौर पर भी जाने जाते हैं. देश में आपातकाल के दौरान वरवरा राव को मीसा एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था. आजतक की खबर के मुताबिक उन्हें वीरासम जो एक क्रांतिकारी लेखक संगठन था, उसके संस्थापक बताया जाता है. साल 1986 के रामनगर साजिश कांड के अलावा कई अलग-अलग मामलों में 1975 और 1986 के बीच उन्हें कई दफे गिरफ्तार किया गया.
वीडियो: एक्टिविस्ट वरवरा राव की तबीयत खराब हुई तो हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिए?

