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Covaxin के बाद अब नाक से डालने वाली वैक्सीन लाने की तैयारी में है भारत बायोटेक

कहा जा रहा है कि कोवैक्सीन और कोविशील्ड से ज्यादा असरदार होगी नेज़ल वैक्सीन.

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8 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 8 जनवरी 2021, 08:12 PM IST)
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Bharat biotech ने नाक के जरिए दिए जाने वाली वैक्सीन को लेकर ट्रायल शुरू करने वाली है. यह वैक्सीन वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च पर आधारित होगी.
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कोविशील्ड और कोवैक्सीन. ये दो वैक्सीन्स हैं जिन्हें भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अप्रूवल मिल गया है. कोविशील्ड को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने बनाया है. वहीं, कोवैक्सीन को भारत बायोटेक ने. इस वैक्सीन को अप्रूवल मिलने के बाद अब भारत बायोटेक ने एक और वैक्सीन का प्रपोज़ल DCGI को भेज दिया है. ये Nasal Vaccine होगी, जो नाक से दी जाएगी.
भारत बायोटेक का दावा है कि ये वैक्सीन नॉर्मल वैक्सीन की तुलना में ज्यादा असरदार होगी. वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की टीम के साथ किया गया है रिसर्च भारत बायोटक का कहना है कि इस वैक्सीन को कंपनी ने वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर तैयार किया है. भारत बायोटेक के डॉक्टर कृष्णा एला ने आजतक की रिपोर्टर मिलन शर्मा से इस बारे में बात की. उन्होंने बताया कि रिसर्च में सामने आया है कि आम वैक्सीन की तुलना में ये एक बेहतरीन ऑप्शन है. नेज़ल वैक्सीन का सिर्फ एक डोज़ ही काफी होगा, बता दें कि नॉर्मल वैक्सीन के सही तरीके से काम करने के लिए उसके दो डोज़ लोगों को लगाए जाएंगे.
कंपनी ने इसके ट्रायल के लिए DCGI से परमिशन मांगी है. कंपनी के मुताबिक, फरवरी-मार्च में Nasal Covaxin का ट्रायल नागपुर, भुवनेश्वर, पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों में किया जा सकता है.

जानकारी के मुताबिक, पहले फेज़ में वैक्सीन का ट्रायल 18 से 65 साल के करीब 40-45 वॉलेंटियर्स पर किया जाएगा. गौरतलब है कि भारत बायोटेक अभी भी दो इंट्रा-नेसल वैक्सीन पर काम कर रहा है. दोनों ही वैक्सीन अमेरिका की हैं.


पहले भी कई बीमारियों के लिए इंट्रानेज़ल वैक्सीन को बनाया जा चुका है
पहले भी कई बीमारियों के लिए इंट्रानेज़ल वैक्सीन को बनाया जा चुका है

क्या होती है Nasal Vaccine? 

आपको बता दें कि अभी तक जो भी वैक्सीन बाजार में आई हैं, उसमें व्यक्ति के हाथ पर ही टीका लगाया जाता है. लेकिन Nasal वैक्सीन को नाक के जरिए ही दिया जाएगा. चूंकि नाक से ही सबसे अधिक वायरस फैलने का खतरा रहता है, ऐसे में इस वैक्सीन के कारगर होने की अधिक संभावना है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस तरह की वैक्सीन को मंजूरी मिलती है तो कोरोना से लड़ाई में ये गेम चेंजर साबित होगी. क्योंकि जो इंजेक्शन लगाया जाता है, उससे इंसान का सिर्फ निचला लंग ही सेफ हो पाता है. लेकिन अगर नाक के जरिए वैक्सीन दी जाती है तो उससे ऊपरी और निचला लंग दोनों सेफ होने की संभावना है.
आपको बता दें कि फिलहाल UK में कोरोना के दो नेज़ल वैक्सीन के फेज़ 1 का ट्रायल किया जा रहा है.

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