भारत बायोटेक ने भोपाल गैस पीड़ितों को धोखे में रखकर कोरोना की वैक्सीन लगा दी!
वैक्सीन लगाने वाली यूनिवर्सिटी ने इस पर क्या कहा है?

"पीपल्स यूनिवर्सिटी के आसपास रहने वाले तीन-चार समुदाय के लोगों को ट्रायल वैक्सीन लगवाने के लिए 750 रुपये देने की बात कही गई. इन लोगों से यह कहा गया कि ये वैक्सीन कोरोना वायरस से बचने के लिए है. इन्हें ये नहीं बताया गया कि ये वैक्सीन कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के तहत दिया जा रहा है. इन लोगों में से किसी को भी ब्लड और पीसीआर रिपोर्ट भी नहीं दिए गए हैं. जिन लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया है, उन्हें कोई कंसेंट लेटर तक नहीं दिया गया है."
मामले को लेकर रचना ढिंगरा ने छोटू दास नाम के एक लड़के का विडियो पोस्ट किया. इस विडियो में छोटू कह रहे हैं, " हमें 3 दिसंबर को टीका लगाया गया. उन लोगों ने कहा था कि आपको कुछ भी होगा तो उसका इलाज़ हम करेंगे. उन्होंने पर्ची पर दवाई लिख के दी और ये दवाई हमने बाहर की दुकान से अपने पैसे से ली. 3 जनवरी को दूसरी बार बुलाया गया था. लेकिन उन्होंने कोई इंजेक्शन नहीं दी. टीका लगाने के बाद मोहल्ले में कई लोगों को उल्टी, रीढ़ की हड्डियों में दर्द आदि जैसी दिक्कतें आ रही हैं." विडियो देखिए.3rd Phase #Covaxine trial taking place in Bhopal hasviolated every rule in d book Poor & vulnerable residents of gas affected communities r herded by d People's 🏥 with a promise of Rs750. No copy of informed consent is being given 2 d participants @CDSCO_INDIA_INF pic.twitter.com/dsb9u8L77T
— Rachna Dhingra (@RachnaDhingra) January 3, 2021
पीपल्स यूनिवर्सिटी का क्या कहना है? पीपल्स यूनिवर्सिटी ने कोवैक्सीन ट्रायल को लेकर अपनी वेबसाइट पर एक टैब बनाया हुआ है. जहां कोवैक्सीन ट्रायल को लेकर जानकारी दी गई है. इस मामले को लेकर पीपल्स यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक ट्विटर पेज से कई ट्वीट किए. लिखा,When a participant experiences an adverse event they call up d hospital who asks them to come in and then they r prescribed medicines & investigations where the participant is expected to foot the bill. Things cannot get any worse than this. @CDSCO_INDIA_INF pic.twitter.com/AXqOestmXM
— Rachna Dhingra (@RachnaDhingra) January 3, 2021
"महामारी काल में रचना ढिंगरा बेबुनियाद आरोप लगा रही हैं. ट्रायल वैक्सीन के लिए लोगों की सहमति ली गई थी और इसमें समाज के सभी वर्ग के लोग शामिल थे. किसी भी गैस पीड़ित पर ट्रायल वैक्सीन नहीं किया गया है. सिर्फ कोविड नेगेटिव वालंटियर्स को ही ट्रायल वैक्सीन दी गई है. 750 रुपये दैनिक भत्ता के रूप में इन लोगों को दिया गया था."
पीपल्स यूनिवर्सिटी ने एक विडियो ट्वीट भी किया है जिसमें छोटू दास ने अपनी पुरानी विडियो पर सफाई दी है. इस विडियो में छोटू कहते हैं कि उन्होंने कोरोना का ट्रायल वाला टीका लगवाया है. वह बताते हैं, "कुछ दिन पहले मुझे बताया गया कि मैं कोरोना पॉजिटिव हूं और एक सर ने मुझे बाहर से दवाई लेने को कहा था. लेकिन अब जब मैं दोबारा आया हूं तो ठीक से इलाज़ कर रहे हैं और यहीं से दवाई दी जा रही है. गैस राहत वाली मैडम (रचना ढिंगरा) ने मुझे बताया था कि सिर्फ गरीबों पर ही ट्रायल किया जा रहा है क्योंकि 750 रुपये के लालच में लोग टीका लगवा रहे हैं. लेकिन मैंने यहां आकर देखा तो यहां सभी लोगों को वैक्सीन लग रहा है. बीते दिनों मेरी यहां गार्ड से बहस हो गई थी जिसके बाद मैंने आवेश में रचना जी से विडियो में बोल दिया था." विडियो देखिए.It is shocking, in this pandemic time people are making baseless allegations. W.r.t @RachnaDhingra 's tweets the rebuttal is as follows :- 1. All participants were volunteers who consented for this trial & represent various sections of society & professions. @CDSCO_INDIA_INF
— People's University Bhopal (@Uni_Peoples) January 4, 2021
हमने मामले को लेकर यूनिवर्सिटी के जनरल मैनेजर (पब्लिक रिलेशंस) दीपेंद्र श्रीवास्तव से बात की और उन्होंने पीपल्स यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए ट्वीट की पुष्टि की. वहीं, पीपल्स यूनिवर्सिटी की सफाई पर रचना ने सवाल उठाए हैं. कहा है कि अगर वाकई कंसेंट लिया गया था तो ये पीपल्स यूनिवर्सिटी बताए कि 7 दिसंबर को जिस व्यक्ति को पहला टीका दिया गया था उसे 4 जनवरी को दूसरा डोज़ क्यों दिया गया?W.r.t @RachnaDhingra 's tweet, the rebuttal:- The video posted by Ms. Dhingra appears to be fabricated the factual narrative of the volunteer is below- @CDSCO_INDIA_INF pic.twitter.com/Qcqsexwxt3
— People's University Bhopal (@Uni_Peoples) January 4, 2021
इस पूरे मामले पर भोपाल प्रशासन, मध्य प्रदेश सरकार और भारत बायोटेक की तरफ से खबर लिखे जाने तक कोई बयान नहीं आया है.If participants really consented 2 trial as @Uni_Peoples claims then do explain that how a participant who was enrolled in d study on 7Dec but gave his consent after receiving d second dose on 4Jan. @CDSCO_INDIA_INF @BharatBiotech Pl ensure that this participant is not harrased https://t.co/MUzSJnsp9Q pic.twitter.com/pFQbIAmT9N
— Rachna Dhingra (@RachnaDhingra) January 5, 2021

