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'मेरी जिंदगी का मकसद ईरान को... ' बेंजामिन नेतन्याहू ने डील को लेकर अब अपने पत्ते खोले

US-Iran जंग खत्म होने के तरीके को लेकर Israel के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को अपने देश के अंदर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. उनकी अपनी सरकार के कुछ लोग भी सवाल उठा रहे हैं. अब नेतन्याहू ने सामने आकर हर सवाल का जवाब दिया है.

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आसिफ़ असरार
| मौ. जिशान
16 जून 2026 (पब्लिश्ड: 11:22 AM IST)
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बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ युद्ध पर सवालों के जवाब दिए. (X)
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अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर समझौता हो गया है. लेकिन इस समझौते ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को मुश्किलों में ला खड़ा कर दिया है. वजह ये कि जिस जंग में इजरायल सबसे आगे था, उसी जंग को खत्म करने वाले समझौते की शर्तें उसे अभी तक ठीक से पता नहीं हैं.

15 जून की शाम बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. ये प्रेस कॉन्फ्रेंस उस वक्त हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमति बन चुकी थी. समझौते पर 14 जून की रात डिजिटल साइन हो चुके थे. 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस पर औपचारिक साइन होने हैं.

बेंजामिन नेतन्याहू से तल्ख सवाल

टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने समझौते के बारे में पूछा तो इजरायली पीएम ने बेंजामिन नेतन्याहू ने माना कि इजरायल को अभी तक नहीं पता कि इस डील में लिखा क्या है. इसका मतलब ये हो सकता है कि ईरान और अमेरिका के बीच जो भी बातचीत हो रही है, उससे इजरायल लगभग बाहर ही रहा.

इसके बावजूद बेंजामिन नेतन्याहू ने छह हफ्तों तक चले अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान को बड़ी कामयाबी बताया. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने इजरायल को एक न्यूक्लियर हथियारों से लैस ईरान के खतरे से बचा लिया. बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा,

"समझौता हो या न हो, ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे. न आज, न कल. जब तक मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं, ऐसा नहीं होने दूंगा. यही मेरी जिंदगी का मिशन है."

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बेंजामिन नेतन्याहू का पोस्ट. (X)

जंग खत्म होने के तरीके को लेकर नेतन्याहू को अपने देश के अंदर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. उनकी अपनी सरकार के कुछ लोग भी सवाल उठा रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल पर जंग रोकने का दबाव बनाया और कई मामलों में वॉशिंगटन की शर्तें माननी पड़ीं.

लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू का दावा है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम इजरायल के लिए 'तैयार खतरा' था और अमेरिका के साथ मिलकर उसे खत्म कर दिया गया. उन्होंने कहा, “हमने इजरायल के इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य अभियान चलाया.”

इसके बाद इजरायली प्रधानमंत्री ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं. नेतन्याहू के मुताबिक इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर वैज्ञानिकों को निशाना बनाया, सरकार और सुरक्षा तंत्र के कई शीर्ष नेताओं को मार गिराया, न्यूक्लियर ठिकानों को तबाह किया, मिसाइलों और मिसाइल बनाने वाली ज्यादातर फैक्ट्रियों को खत्म कर दिया.

उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और एयरफोर्स को भारी नुकसान पहुंचाया गया, कई सैन्य ठिकानों को तबाह किया गया और ईरान की अर्थव्यवस्था को सैकड़ों अरब डॉलर से लेकर लगभग एक ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान पहुंचा.

जून 2025 में ईरान के साथ 12 दिन चली पिछली जंग के बाद भी बेंजामिन नेतन्याहू ने लगभग ऐसे ही दावे किए थे. तब उन्होंने कहा था कि इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को पूरी तरह पीछे धकेल दिया है और एक ऐतिहासिक जीत हासिल की है.

अब, एक साल से भी कम समय बाद, नेतन्याहू फिर कह रहे हैं कि इजरायल ने आने वाले कई सालों के लिए अपने ऊपर मंडरा रहा खतरा खत्म कर दिया है. उन्होंने कहा,

"हमने इजरायल को विनाश से बचा लिया."

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने पूछा कि अगर इजरायल का लक्ष्य ईरान की मौजूदा सरकार से पैदा हो रहे खतरे को खत्म करना था, तो तीन महीने बाद जंग खत्म हो रही है, लेकिन ईरान की सरकार तो अब भी बनी हुई है.

इस पर नेतन्याहू ने कहा कि ऐसा कहना गलत है कि अभियान अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया. उन्होंने कहा, "हमने कभी सरकार बदलने को आधिकारिक लक्ष्य नहीं बताया था."

बेंजामिन नेतन्याहू के मुताबिक सरकार और कैबिनेट ने तीन लक्ष्य तय किए थे-

पहला: न्यूक्लियर खतरे को खत्म करना.

दूसरा: बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे को खत्म करना.

तीसरा: ऐसे हालात बनाना कि अगर ईरान की जनता चाहे तो खुद अपनी सरकार बदल सके.

ईरान की सरकार कब गिरेगी?

बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है, देश का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है और सरकार के भीतर भी दरारें दिखाई दे रही हैं. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि ईरान की मौजूदा सरकार कब गिरेगी, तो उन्होंने कहा,

"मुझे नहीं पता. क्या कोई बता सकता था कि सोवियत संघ की सरकार कब गिरेगी? मैं भी नहीं बता सकता."

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू से ये भी पूछा गया कि क्या इजरायल ने अपनी रणनीतिक आजादी खो दी है? क्योंकि उसे जंग रोकनी पड़ी, अमेरिका-ईरान बातचीत से बाहर रखा गया और हाल ही में डॉनल्ड ट्रंप ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज्बुल्लाह के एक ठिकाने पर इजरायली हमले को लेकर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी भी जताई थी. इस पर नेतन्याहू ने कहा,

"अमेरिका में लोग कहते हैं कि ट्रंप वो सब करते हैं जो मैं कहता हूं. इजरायल में लोग कहते हैं कि मैं वो सब करता हूं जो ट्रंप कहते हैं. दोनों बातें गलत हैं."

बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप और उनके बीच पार्टनर्स का रिश्ता है. कई बार दोनों सहमत होते हैं और कई बार असहमत भी. उन्होंने कहा कि इजरायल को अमेरिका की बातों का ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि ट्रंप ने अमेरिका की सेना को ईरान के खिलाफ लड़ाई में शामिल किया था. उन्होंने कहा, "ये बहुत बड़ी बात है और मैं इसका सम्मान करता हूं."

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इजरायल किसी भी हाल में अपने फैसले खुद लेने की क्षमता नहीं छोड़ेगा. डॉनल्ड ट्रंप के साथ रिश्तों पर बात करते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा,

"कई बार हमारी सोच एक जैसी होती है और कई बार नहीं. लेकिन मैं इजरायल की सुरक्षा के हितों की जिम्मेदारी निभाता हूं."

नेतन्याहू ने ये बताने से इनकार कर दिया कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इजरायल अकेले ईरान पर हमला करेगा या नहीं. लेकिन उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने की कोशिश करेगा तो इजरायल जरूरी कदम उठाएगा.

लेबनान में इजरायली सैनिक बने रहेंगे

उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिणी लेबनान के बफर जोन में इजरायली सैनिक फिलहाल बने रहेंगे और यह स्थिति 'जब तक जरूरी होगी' तब तक जारी रहेगी.

नेतन्याहू ने अमेरिका-ईरान समझौते की आलोचना करने से भी परहेज किया. उन्होंने कहा,

"ये समझौता अमेरिका और अमेरिका के राष्ट्रपति ने किया है. उनका मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट खुल जाएगा और ईरान का न्यूक्लियर कार्यक्रम भी खत्म हो जाएगा. ये उनका फैसला है."

बेंजामिन नेतन्याहू ने साथ में जोड़ा कि उन्होंने बातचीत के दौरान अपनी राय अमेरिका के सामने रखी थी और इजरायल अपने सुरक्षा हितों को लेकर सतर्क रहेगा.

वीडियो: ट्रंप-नेतन्याहू फ़ोन कॉल की एक-एक बात पता चली

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