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तो बम के दम पर लड़ा जाएगा वेस्ट बंगाल में चुनाव!

इलेक्शन है भैया. बम बनाने वालों की सहालग है. उनके रेट हाई हैं. बीरभूम जिला बम बनाने वालों से अटा पड़ा है. कुटीर उद्योग सा हाल है.

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आशुतोष चचा
28 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 28 अप्रैल 2016, 09:30 AM IST)
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पश्चिम बंगाल में कुछ दिन पहले हुई चुनावी रैली याद कीजिए. जिसमें भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बतौर बीजेपी स्टार प्रचारक स्पीच दी. इसमें वो सबसे ज्यादा बोले बम पर. आरोप लगाया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस बैलट के नहीं बम के दम पर चुनाव लड़ रही है. बम बनाना यहां कुटीर उद्योग सा हो गया है. बम बनाने वाले लोग सावधान हो जाएं. सब पकड़ के जेल में डाले जाएंगे. और वेस्ट बंगाल वालों को चुनना है. वो 'बम' को चुनेंगे या 'हमको.' https://twitter.com/ANI_news/status/721995238592614401 https://twitter.com/ANI_news/status/721993676944228352 पिछले साल बर्धमान में बम बनाते हुए दो लड़के जख्मी हो गए थे. पता लगा कि जहां वो बम बना रहे थे वो TMC नेता का ऑफिस था. अब चल रहा है वहां इलेक्शन का सीजन. वइसे तो इलेक्शन का मतलब बैटेट की लड़ाई. लेकिन इस वाले में बुलेट और बम को भी रोल अहम होता दिख रहा है. और पता लगा है कि जो बीरभूम जिला है, वहां बम बनाने का काम बहुत जोर से चल रहा है. सिर्फ बीरभूम ही नहीं, आसपास के सभी जिलों में बम का धंधा फुल स्विंग पर है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पूरे स्टेट से लोग आ रहे हैं और बम बना रहे हैं. 10 हजार से 40 हजार एक दिन का कमा रहे हैं. जैसे जैसे इलेक्शन नजदीक आ रहा है, रिस्क और रेट बढ़ते जा रहे हैं. बम बनाने वालों की हालत खुद खराब है. लेकिन सब पैसे का खेला है साहब. वो आदमी को कहीं भी ले जा सकता है. कुछ भी करा सकता है. इस्माइल हैं, वो बम बनाते हैं. बताते हैं "हां, हमको डर लगता है. लेकिन पैसे की जरूरत भी तो है. अगर हम 100 से 120 बम बनाते हैं तो 20 से 30 हजार रुपए कमा लेते हैं. हमारे पास बंदूकें हैं, कच्चे बम हैं और कुछ अलग तरह के हथियार." जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, बंगाल का माहौल गर्माता जाता है. ऐसा लग रहा है कि ये वाला चुनाव भी कम खतरनाक नहीं होगा. उधर वोटिंग चालू होती है इधर बम ब्लास्ट. नानूर विधानसभा क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील है. पिछले साल 20 से ज्यादा पॉलिटिकल बलवे इस क्षेत्र में हो चुके हैं. उधर अपोजीशन वाले चिल्ला रहे हैं बम बम. इधर सीएम ममता बनर्जी का अपना हल्ला चालू है. वो कह रही हैं लेफ्ट पार्टियां बूथ कैप्चरिंग की तैयारी कर रही हैं. एक दूसरे के साथ ब्लेम गेम तो चल ही रहा है. लेकिन खतरनाक है वो बारूदी तैयारी, जो चुनाव को खूनी लड़ाई में बदल देगी.

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